उत्तराखंड ने हासिल किया पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा: राज्यपाल गुरमीत सिंह की मंजूरी

Uttarakhand News : उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा देने का प्रस्ताव हाल ही में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में पारित किया गया था। बुधवार को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने इस प्रस्ताव को अपनी औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। उत्तराखंड अब पूर्ण साक्षर राज्य घोषित उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में […]

Jul 8, 2026 - 18:38
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उत्तराखंड ने हासिल किया पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा: राज्यपाल गुरमीत सिंह की मंजूरी
उत्तराखंड ने हासिल किया पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा: राज्यपाल गुरमीत सिंह की मंजूरी

उत्तराखंड ने हासिल किया पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड को अब पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा मिल गया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने इस तथ्य की पुष्टि की है कि प्रदेश ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मानकों को पूरा करते हुए यह उपलब्धि हासिल की है। राज्य मंत्रिमंडल की हालिया बैठक में इस प्रस्ताव को पारित किया गया था।

उत्तराखंड अब पूर्ण साक्षर राज्य घोषित

हाल ही में उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार किया है। राज्य ने खुद को पूर्ण साक्षर राज्यों की सूची में शामिल कर लिया है। इस फैसले के बाद यहां शिक्षा की गुणवत्ता और साक्षरता के मानकों में सुधार की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

उल्लास कार्यक्रम (Understanding Lifelong Learning for All in Society – ULLAS) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की दिशा में काम करते हुए, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने उत्तराखंड को इस दर्जे की स्वीकृति प्रदान की है। यह शिक्षा के क्षेत्र में की गई मेहनत और प्रयासों का परिणाम है।

प्रदेश की साक्षरता दर अब 98 प्रतिशत से अधिक

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस उपलब्धि की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब उत्तराखंड की साक्षरता दर 98 प्रतिशत से अधिक हो गई है। यह आंकड़ा केंद्र सरकार के उल्लास कार्यक्रम के लक्ष्यों को पूरा करने के बाद प्राप्त हुआ है।

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वयस्क शिक्षा पर रहा विशेष फोकस

उल्लास कार्यक्रम के तहत 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के निरक्षर लोगों को शिक्षित करने पर जोर दिया गया। अभियान ने वयस्कों को पढ़ना-लिखना सिखाने के साथ-साथ जीवनोपयोगी कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर भी ध्यान केंद्रित किया।

इस अभियान की सफलता के लिए सामाजिक संगठनों, कॉरपोरेट्स और स्वयंसेवकों का सहयोग लिया गया। इसके तहत कई गांवों को गोद लेकर वहां निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने का प्रयास किया गया।

महिलाओं और वंचित वर्गों को मिली प्राथमिकता

इस कार्यक्रम के दौरान महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वंचित वर्गों को प्राथमिकता दी गई। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में, जहां महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत से कम थी, अभियान को तेजी से बढ़ाया गया।

इस प्रकार, उत्तराखंड ने न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि महिला साक्षरता और समावेशिता के कार्यक्रमों में भी अहम कदम बढ़ाया है।

इसके लिए, राज्य की योजनाएँ आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल बन सकती हैं। क्या आपकी राज्य सरकार भी इस तरह की योजनाएँ लागू कर रही है? विचार करें और अपने विचार साझा करें!

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सादर, टीम द ऑड नारी (सपना कौर)

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