उत्तराखंड: एलटी शिक्षकों को 20 वर्षों के बाद मिला वरिष्ठता का अधिकार

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Jul 13, 2026 - 00:38
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उत्तराखंड: एलटी शिक्षकों को 20 वर्षों के बाद मिला वरिष्ठता का अधिकार
उत्तराखंड: एलटी शिक्षकों को 20 वर्षों के बाद मिला वरिष्ठता का अधिकार

उत्तराखंड में एलटी शिक्षकों को बीस वर्ष बाद मिला वरिष्ठता का अधिकार

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कम शब्दों में कहें तो, 1994 बैच के एलटी शिक्षकों को 20 वर्षों के बाद वरिष्ठता का अधिकार मिल गया है, जिससे उनकी लंबे समय से चली आ रही शिकायतें अब पूरी होंगी।

उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा विभाग ने वरिष्ठता विवाद के मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। 1994 बैच के सहायक अध्यापकों (एलटी) को अन्ततः उनके अधिकारों के अनुसार वरिष्ठता प्रदान करने की दिशा में यह निर्णय लिया गया है। वरिष्ठ शिक्षक रूप चंद्र लखेड़ा द्वारा दायर अवमानना याचिका के चलते विभाग ने यह कदम उठाया है।

दिशानिर्देश जारी

विभाग ने शासन के 25 जनवरी 2024 के आदेश के पालन में 09 जुलाई 2026 को एक निर्देश जारी किया है, जिसमें मंडलीय अपर शिक्षा निदेशक, गढ़वाल एवं कुमाऊं मंडल को 1992 से 1996 तक के एलटी शिक्षकों की अंतिम वरिष्ठता सूची तैयार करने के लिए कहा गया है।

पृष्ठभूमि

यह मामला तब और जटिल हो गया था जब सीटी (CT) संवर्ग के शिक्षकों को 2005 में नियमों के विपरीत मात्र 5 वर्ष की सेवा के आधार पर सहायक अध्यापक एलटी में समायोजन का लाभ मिल गया, जबकि इस समायोजन की नियमानुसार अवधि 10 वर्ष होनी चाहिए थी। इसके कारण, 1994 में चयनित एलटी शिक्षकों की वरिष्ठता को गहरा धक्का लगा और वे वर्षों तक पदोन्नति से वंचित रहे।

न्यायालय की भूमिका

रूप चंद्र लखेड़ा द्वारा दायर अवमानना याचिका के बाद, न्यायालय और ट्रिब्यूनल की सख्ती के चलते विभाग को कार्रवाई करनी पड़ी। यही कारण है कि अब यह स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी संबंधित शिक्षकों की वरिष्ठता सूची जारी की जाए।

समाज पर प्रभाव

यह निर्णय न केवल शिक्षकों के लिए बल्कि समग्र शिक्षा प्रणाली के लिए भी महत्वपूर्ण है। वर्षों से यह मामला लम्बित था, जिसके कारण अनेक शिक्षकों का मनोबल गिर गया था। अब जब इन्हें उनका हक मिल गया है, यह उम्मीद की जा रही है कि इससे शिक्षकों की कार्यक्षमता में सुधार होगा और शिक्षा का स्तर भी ऊँचा उठेगा।

इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि यदि किसी मामले में लंबे समय तक न्याय नहीं होता, तो अंततः वह न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। जिससे यह संदेश जाता है कि किसी भी अन्याय के खिलाफ बात करने की जरूरत है।

इस नई व्यवस्था के लागू होने से, शिक्षकों को उनके अधिकार अनुसार मिल रही वरिष्ठता का उन्हें भरपूर लाभ मिलेगा। इसके साथ ही, उम्मीद है कि इससे शिक्षकों की पदोन्नति में भी तेजी आएगी।

इस तरह, 1994 बैच के एलटी शिक्षकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। विभाग के इस निर्णय से सभी शिक्षकों को सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी, जिससे कि वे अपनी शिक्षा दान की ज़िम्मेदारियों को और बेहतर ढंग से निभा सकें।

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सादर,
टीम द ओड नारी
(नीहा शर्मा)

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