नीट पेपर लीक मामला: पुणे के शिक्षक का खुलासा, सीबीआई ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार
CBI का खुलासा, 3 आरोपी जेल भेजे गए नई दिल्ली: नीट-यूजी पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीबीआई (CBI) ने सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में एक बड़ा सनसनीखेज खुलासा किया। जांच एजेंसी के मुताबिक, पुणे की एक नामी मेडिकल एकेडमी में फिजिक्स फैकल्टी (शिक्षक) रहे आरोपी हर्षदकुमार शाह ने प्रश्नपत्र की […]
नीट पेपर लीक मामला: पुणे के शिक्षक का खुलासा, सीबीआई ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार
कम शब्दों में कहें तो, सीबीआई ने नीट-यूजी पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा किया है। तीन आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। यह जानकारी राउज एवेन्यू कोर्ट में दी गई है।
नई दिल्ली: नीट-यूजी पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीबीआई (CBI) ने सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में एक सनसनीखेज खुलासा किया। सीबीआई ने बताया है कि पुणे की एक प्रसिद्ध मेडिकल एकेडमी के फिजिक्स फैकल्टी रहे आरोपी हर्षदकुमार शाह ने प्रश्नपत्र की व्यवस्था (अरेंज) कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
पूछताछ में किए गए अहम खुलासे
सीबीआई ने अदालती सुनवाई में कहा कि हर्षदकुमार शाह ने फिजिक्स का लीक हुआ प्रश्नपत्र मनीषा हवालदार नामक एक महिला तक पहुंचाया था। तकनीकी जांच और फॉरेंसिक साक्ष्यों ने पुष्टि की है कि मनीषा के मोबाइल से मिले प्रश्नपत्र वही लीक हुआ पेपर था। इस खुलासे ने पूरे मामले को अलग मोड़ दिया है।
तीनों आरोपी 15 जून तक न्यायिक हिरासत में
सोमवार को सीबीआई ने तीन प्रमुख आरोपियों— डॉ. मनोज शिरुरे, हर्षदकुमार शाह और मनीषा हवालदार को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। सीबीआई ने अदालत को यह बताया कि आरोपियों से पूछताछ पूरी हो चुकी है और जांच को प्रभावित न होने देने के लिए उन्हें जेल भेजा जाना जरूरी है। कोर्ट ने सीबीआई के अनुरोध को स्वीकार करते हुए तीनों आरोपियों को 15 जून 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
मुख्य आरोपी से लिए गए ₹5 लाख और छापेमारी में बरामदगी
सीबीआई ने अदालत में इस गिरोह के वित्तीय लेन-देन का ब्योरा भी प्रस्तुत किया। जांच एजेंसी का कहना है कि डॉ. मनोज शिरुरे इस पेपर लीक नेटवर्क के प्रमुख सदस्यों में से एक थे। उन्होंने मुख्य मास्टरमाइंड ‘शिवराज मोटेगांवकर’ से पेपर लीक में मदद करने के लिए 5 लाख रुपए की एडवांस राशि ली थी।
- डॉ. मनोज शिरुरे की भूमिका: सीबीआई का दावा है कि डॉ. मनोज शिरुरे इस पेपर लीक नेटवर्क का सबसे सक्रिय सदस्य थे।
- डील और बरामदगी: उन्होंने पूरे स्कैंडल के लिए पैसे लिए थे, और 5 लाख रुपए की राशि को उनकी बहन के घर से बरामद किया गया।
- सीबीआई की छापेमारी: गुप्त सूचना पर सीबीआई ने डॉ. मनोज की बहन के घर पर छापेमारी की, जहां से पूरे ₹5 लाख की नकदी बरामद की गई।
सुप्रीम कोर्ट का रुख: 21 जून की री-एग्जाम पर कोई रोक नहीं
इस बीच, जहां सीबीआई आरोपियों पर शिकंजा कस रही है, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने आगामी नीट-यूजी री-एग्जाम को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। अदालत ने कहा है कि 21 जून को होने वाली परीक्षा अपने निर्धारित शेड्यूल के अनुसार पेन-पेपर मोड (ओएमआर शीट) में ही आयोजित की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन या कंप्यूटर आधारित परीक्षा आयोजित करने की मांग वाली याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि परीक्षा एजेंसियां पहले से ही भारी दबाव में हैं और इतनी जल्दी किसी भी बदलाव को लागू करना छात्रों के हित में नहीं होगा।
इस पूरे मामले से यह सार्थक निकलता है कि शिक्षा क्षेत्र में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता है। यदि इस तरह के घोटाले होते रहे, तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी प्रभावित होगा।
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सincerely, दीप्ति शर्मा
Team The Odd Naari
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