सुप्रीम कोर्ट का CBSE की डिजिटल मार्किंग प्रणाली पर कड़ा रुख

कहा- डिजिटल मार्किंग सिस्टम से छात्र हो रहे निराश नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर छात्रों की शिकायतों पर गंभीर चिंता जताई। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के कारण छात्रों में निराशा बढ़ रही है और इस समस्या […]

Jul 15, 2026 - 18:38
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सुप्रीम कोर्ट का CBSE की डिजिटल मार्किंग प्रणाली पर कड़ा रुख
सुप्रीम कोर्ट का CBSE की डिजिटल मार्किंग प्रणाली पर कड़ा रुख

सुप्रीम कोर्ट का CBSE की डिजिटल मार्किंग प्रणाली पर कड़ा रुख

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कम शब्दों में कहें तो: सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली पर छात्रों की निराशा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। मुख्य न्यायाधीश ने इस प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को उजागर किया है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर बढ़ती शिकायतों पर गंभीर चिंता जाहिर की। सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के कारण छात्रों के बीच निराशा का स्तर बढ़ रहा है और इस मामले का समाधान बेहद जरूरी है।

कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि वह CBSE या सरकार के साथ किसी भी प्रकार के टकराव को नहीं चाहती, बल्कि उनका लक्ष्य छात्रों की समस्याओं को हल करना है। उन्होंने CBSE से यह भी पूछा कि क्या सुधार के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। सरकार को भी इस प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग देने के लिए कहा गया है।

क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम?

CBSE का ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है, जिसमें बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर कंप्यूटर स्क्रीन पर जाँचा जाता है। इसके तहत परीक्षक अब कागजी उत्तर पुस्तिकाओं के बजाय डिजिटल स्क्रीन पर उत्तरों का मूल्यांकन करते हैं। इस प्रणाली की शुरुआत बेहतर मूल्यांकन के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन छात्रों को इससे निराशा का सामना करना पड़ रहा है।

केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि:

  • जिन छात्रों की मार्कशीट में गड़बड़ी की शिकायतें आई थीं, उन मामलों का समाधान किया जा चुका है।
  • सरकार इस समस्त मामले को गम्भीरता से ले रही है।
  • मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा के लिए एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया गया है।
  • यह आयोग OSM प्रणाली की कमियों की जांच करेगा और सुधार हेतु सुझाव देगा।
  • सरकार इस मामले को किसी टकराव के रूप में नहीं, बल्कि सुधार के अवसर के रूप में देख रही है।

याचिका में क्या मांग की गई?

यह जनहित याचिका राकेश बिंजोला ने अधिवक्ता लक्ष्मीकांत मटादन शुक्ला के माध्यम से दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि:

  • OSM मूल्यांकन प्रणाली के लिए स्पष्ट और पारदर्शी नियमों का निर्धारण किया जाए।
  • इसके निगरानी हेतु एक हाई-पावर कमेटी का गठन किया जाए।
  • जो छात्र पहले से प्रोविजनल एडमिशन प्राप्त कर चुके हैं या जिन्होंने प्रवेश परीक्षाएं पास की हैं, उन्हें न्यूनतम अंक की शर्त में राहत दी जाए।
  • शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए निर्धारित 75 प्रतिशत या अन्य न्यूनतम अंकों में भी आवश्यक छूट दी जाए।

छात्रों की शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट की गंभीरता

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बड़ी संख्या में छात्र इस डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली से असंतुष्ट हैं, और उनकी शिकायतों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। यह महत्वपूर्ण है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे ताकि छात्रों का बोर्ड परीक्षा प्रणाली में विश्वास बना रहे।

अब CBSE द्वारा उठाए गए सुधारात्मक कदमों और सरकार की रिपोर्ट के आधार पर अगली सुनवाई में अदालत आगे का फैसला करेगी।

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सादर, टीम द ओड नारी

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