नागरिकता पर ऐतिहासिक बदलाव: 8 राज्यों में DM को मिली नयी शक्ति

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने नागरिकता से जुड़े मामलों में जिला स्तर पर बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी नए प्रावधानों के तहत गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा (जनजातीय क्षेत्रों को छोड़कर) के साथ केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जिला मजिस्ट्रेट (DM) को नागरिकता संबंधी आवेदनों […]

Aug 21, 2026 - 18:38
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नागरिकता पर ऐतिहासिक बदलाव: 8 राज्यों में DM को मिली नयी शक्ति
नागरिकता पर ऐतिहासिक बदलाव: 8 राज्यों में DM को मिली नयी शक्ति

नागरिकता पर ऐतिहासिक बदलाव: 8 राज्यों में DM को मिली नयी शक्ति

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने नागरिकता संबंधी मामलों को लेकर जिला स्तर पर बड़ा प्रशासनिक परिवर्तन किया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नए आदेशों के तहत, गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा (जनजातीय क्षेत्रों को छोड़कर) के साथ केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जिला मजिस्ट्रेट (DM) को नागरिकता संबंधी आवेदनों के निर्णय लेने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बदलाव के तहत कुल मिलाकर आठ राज्य और केंद्रशासित क्षेत्र प्रभावित होंगे।

कम शब्दों में कहें तो, यह निर्णय नागरिकता आवेदन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और सरल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे पहले, इस प्रक्रिया में सशक्त समितियों और नामित अधिकारियों की भूमिका होती थी, जबकि नई व्यवस्था में जिला प्रशासन को अधिक केंद्रित रूप से कार्य करने का अवसर दिया गया है।

क्या बदला है नागरिकता देने की प्रक्रिया में?

केंद्र सरकार के नए नियमों के अनुसार, अब जिला मजिस्ट्रेट पात्र आवेदकों के आवेदन को आगे बढ़ाने और निर्णय लेने में अधिकृत होंगे। इससे नागरिकता के लिए आवेदन करने वालों के लिए प्रक्रिया में तेजी आ सकती है और उन्हें जिला स्तर पर सहायता मिलेगी। पहले के दृष्टिकोण में कई केंद्रीय विभागों और अधिकारियों की भूमिका होती थी, लेकिन अब DM को सीधे जिम्मेदारी दी गई है।

हालांकि, इसके अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति को स्वचालित रूप से भारतीय नागरिकता मिलेगी। आवेदक को आवश्यक पात्रता, दस्तावेज और कानून के अनुसार प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा।

कौन-कौन से राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं?

नई व्यवस्था का दायरा कुल आठ क्षेत्रों तक फैला है, जिसमें गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं। ध्यान रहे कि त्रिपुरा में जनजातीय क्षेत्रों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। इसलिए इसे '8 राज्यों' का फैसला कहना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा, क्योंकि इसमें छह राज्य और दो केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं।

आवेदकों के लिए नियमों में बदलाव

नए प्रावधानों के तहत, आवेदक की व्यक्तिगत उपस्थिति और औपचारिकताएं पूरी करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। अगर कोई आवेदक आवेदन पर हस्ताक्षर या निष्ठा की शपथ लेने के लिए उपस्थित नहीं होता, तो कलेक्टर आवेदन को खारिज करने का अधिकार रखता है। इसलिए दस्तावेजों का केवल जमा करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आवेदक को निर्धारित प्रक्रिया के पालन के लिए उपस्थित होना आवश्यक है।

सरकार का जोर इस बात पर है कि नागरिकता जैसे संवेदनशील विषय में आवेदन की वास्तविकता, पात्रता और पहचान की सही जांच की जाए ताकि फर्जी दस्तावेजों से संबंधित समस्याओं को कम किया जा सके।

लंबित आवेदनों पर नये बदलाव का प्रभाव

नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिन क्षेत्रों में पहले से सशक्त समितियां नागरिकता आवेदन देखने में लगी थीं, वहां लंबित मामलों को भी संबंधित अधिकारियों के पास स्थानांतरित करने की व्यवस्था की गई है। यह कदम पुराने मामलों के तेजी से निपटारे में सहायक हो सकता है।

CAA से जुड़े आवेदनों के लिए अहम निर्णय

यह बदलाव नागरिकता संशोधन कानून (CAA) से जुड़े मामलों में भी महत्वपूर्ण है। CAA के अंतर्गत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों के लिए नागरिकता के प्रावधान बने हैं। 19 अगस्त 2026 को जारी किए गए नए आदेशों के बाद अब DM को इन मामलों में अधिकृत भूमिका दी गई है।

सरकार का प्रक्रिया को सरल बनाना

नागरिकता से जुड़े मामलों को जिला स्तर पर अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से, सरकार को उम्मीद है कि आवेदन प्रक्रिया में अनावश्यक देरी कम होगी। नए बदलावों से आवेदनों की जांच और कार्रवाई करने में अधिक केंद्रीयकृत प्रशासनिक समन्वय संभावित है।

आवेदकों को क्या ध्यान में रखना चाहिए?

नागरिकता का आवेदन करने वाले व्यक्तियों को सबसे पहले सुनिश्चित करना चाहिए कि वे संबंधित कानून के तहत पात्र हैं। आवेदन में दी गई जानकारी सही होनी चाहिए और सभी आवश्यक दस्तावेजों को सही तरीके से प्रस्तुत करना आवश्यक है।

गलत जानकारी, अधूरे दस्तावेज या नियमों का पालन न करने की स्थिति में आवेदन प्रभावित हो सकता है। इसलिए आवेदकों के लिए आधिकारिक अधिसूचना का पालन करना महत्वपूर्ण होगा।

निष्कर्ष

केंद्र सरकार का यह कदम नागरिकता आवेदन प्रक्रिया में जिला प्रशासन की भूमिका को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। DM को मिली नई जिम्मेदारी से यह उम्मीद की जा सकती है कि लंबित मामलों के निपटारे और आवेदन प्रक्रिया में तेजी आएगी। हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि नागरिकता प्राप्त करने के लिए आवेदकों को सभी कानूनी शर्तों का पालन करना होगा।

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अवनी शर्मा
Team The Odd Naari

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