ड्रग्स तस्करी नेटवर्क पर NCB का बड़ा प्रहार
38 ठिकानों पर छापेमारी; 100 करोड़ के हवाला कारोबार का खुलासा नई दिल्ली। भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क पर शिकंजा कसा है। ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत असम, मिजोरम और मणिपुर में 38 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इस […]

38 ठिकानों पर छापेमारी; 100 करोड़ के हवाला कारोबार का खुलासा
नई दिल्ली। भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क पर शिकंजा कसा है। ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत असम, मिजोरम और मणिपुर में 38 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये के हवाला कारोबार का खुलासा हुआ है। एजेंसियों ने 1,424 बैंक खातों को फ्रीज करने के साथ 17.82 करोड़ रुपये जब्त किए हैं। मामले में 18 आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है।
यह कार्रवाई म्यांमार से भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क को निशाना बनाकर की गई। जांच एजेंसियों का उद्देश्य केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि तस्करी से जुड़े पूरे तंत्र, उसके वित्तीय नेटवर्क और आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ना भी है।
तीन राज्यों में एक साथ चला अभियान
जानकारी के अनुसार, एनसीबी ने 23 अक्टूबर की सुबह स्थानीय पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ शुरू किया। अभियान के तहत मिजोरम की राजधानी आइजोल, चम्फाई और भारत-म्यांमार सीमा के पास स्थित जोखाथर सहित कई स्थानों पर कार्रवाई की गई।
इसके अलावा मणिपुर के चूड़ाचांदपुर और असम के कछार जिले के उन इलाकों में भी छापेमारी की गई, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर नशीले पदार्थों की आवाजाही और परिवहन के लिए किया जाता था।
जांच एजेंसियों ने कई दिनों तक खुफिया सूचनाएं जुटाने और संदिग्ध ठिकानों की पहचान करने के बाद संयुक्त अभियान की योजना बनाई थी। इस कार्रवाई में वित्तीय लेन-देन की जांच पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
हवाला नेटवर्क और बैंक खातों पर कार्रवाई
अभियान की सबसे अहम उपलब्धियों में कथित हवाला कारोबार का खुलासा और बड़ी संख्या में बैंक खातों को फ्रीज करना शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, तस्करी से अर्जित धन को अलग-अलग माध्यमों से स्थानांतरित किए जाने की आशंका है। इसी वित्तीय नेटवर्क की जांच के तहत 1,424 बैंक खातों को फ्रीज किया गया और 17.82 करोड़ रुपये जब्त किए गए।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि नशीले पदार्थों की खरीद, परिवहन और बिक्री से प्राप्त धन किन लोगों और संस्थाओं तक पहुंचता था। हवाला लेन-देन की पूरी कड़ी सामने आने के बाद नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है।
म्यांमार से जुड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह पर नजर
जांच के अनुसार, इस नेटवर्क के तार भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा म्यांमार और बांग्लादेश तक फैले हुए थे। मिजोरम को इस गिरोह का प्रमुख संचालन क्षेत्र बताया गया है। सीमावर्ती इलाकों से कथित तौर पर नशीले पदार्थों की खेप भारत में पहुंचाई जाती थी और फिर अलग-अलग मार्गों से आगे भेजी जाती थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, थांगसिंतुआंग उर्फ चिंतुआंग उर्फ त्लुआंगा को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। उस पर नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप हैं। वहीं, गिरोह के कथित प्रमुख सरगना के म्यांमार में मौजूद होने की बात कही गई है। उसके खिलाफ मिजोरम में नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े कई मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
नशामुक्त भारत के लक्ष्य पर जोर
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई की सराहना करते हुए नशीले पदार्थों के नेटवर्क को खत्म करने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों और संबंधित राज्यों की पुलिस के समन्वित प्रयासों की प्रशंसा की।
विशेषज्ञों के अनुसार, सीमा पार से होने वाली तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए खुफिया जानकारी साझा करना, वित्तीय लेन-देन पर निगरानी रखना और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग बढ़ाना जरूरी है। ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के बाद जांच का अगला चरण नेटवर्क के बाकी सदस्यों, धन के स्रोतों और तस्करी के मार्गों की पहचान करना हो सकता है।
नशीले पदार्थों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई तभी स्थायी परिणाम दे सकती है, जब तस्करी के पूरे तंत्र को तोड़ने के साथ युवाओं को नशे से बचाने और पुनर्वास की व्यवस्था पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाए।
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