जल-सृष्टि पार्क: पुराने जलस्रोत को मिली नई पहचान और जीवन
The post जल-सृष्टि पार्क – पुराने जलस्रोत को मिला नया जीवन appeared first on Avikal Uttarakhand. सिटी फॉरेस्ट के बाद मियांवाला में एक और पर्यावरणीय तोहफा मियांवाला स्थित जौहड़ की भूमि का 8.63 करोड़ की लागत से सौंदर्यीकरण जल-सृष्टि पार्क में जल संरक्षण के साथ आमजन… The post जल-सृष्टि पार्क – पुराने जलस्रोत को मिला नया जीवन appeared first on Avikal Uttarakhand.
जल-सृष्टि पार्क: पुराने जलस्रोत को मिली नई पहचान और जीवन
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कम शब्दों में कहें तो, मियांवाला का जौहड़ क्षेत्र अब जल-सृष्टि पार्क के रूप में नया जीवन पा चुका है। यह पार्क 8.63 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है, जिसमें जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पर्यावरण-संरक्षण एवं विकास के विजन को साकार करने की दिशा में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने मियांवाला स्थित जौहड़ की भूमि का सौंदर्यीकरण कर इसे जल-सृष्टि पार्क के रूप में विकसित किया है। दशकों से उपेक्षित जलस्रोत और उसके आसपास का क्षेत्र अब शहरवासियों के लिए प्राकृतिक सौंदर्य, स्वास्थ्य, मनोरंजन और शांति का नया ठिकाना बन गया है।
मुख्यमंत्री धामी ने लगातार शहरी विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया है। इसी के चलते जौहड़ की भूमि और पुराने तालाब क्षेत्र को पूर्णरूपेण विकसित किया गया है। पार्क में जल संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है, और जल जीवों के लिए सुरक्षित वातावरण भी तैयार किया गया है।
एमडीडीए के उपाध्यक्ष, बंशीधर तिवारी ने पार्क का दौरा किया और वहां रुद्राक्ष का पौधा रोपा। उन्होंने कहा, "हम ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं, जो विकास के साथ-साथ प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित करें।" पार्क में उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी शैली का मुख्य प्रवेश द्वार, योग डेक, मूर्तिकला, गजीबो, वॉकिंग ट्रैक, गार्डन बेंच, कैंटीन, स्वच्छ शौचालय और सुरक्षा रेलिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं स्थापित की गई हैं।
जीर्ण तालाब से जल-सृष्टि पार्क तक का सफर
वास्तव में, पंचायत घर गन्ना सेंटर के समीप स्थित जौहड़ क्षेत्र का कायाकल्प कर इसे आकर्षक पार्क का स्वरूप देने की पहल बेहद महत्वपूर्ण है। यह परियोजना जल संरक्षण, आसपास हरित क्षेत्र, और जनसुविधाओं को एक साथ जोड़ती है। नौकायन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया गया है, जिससे स्थानीय जलस्रोतों का महत्व लोगों को समझ में आ सके।
हरित क्षेत्रों का संचयन
जल-सृष्टि पार्क मियांवाला की सिटी फॉरेस्ट के बाद एक नया पर्यावरणीय तोहफा है। इससे न केवल क्षेत्र की सुंदरता बढ़ी है, बल्कि यह स्थानीय पारिस्थितिकी और जल संरक्षण के लिए भी एक बड़ा कदम है। यहाँ विभिन्न प्रकार की गतिविधियाँ जैसे नौकायन, योगा कक्षाएं, और पारिवारिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जो लोगों को प्रकृति और जल स्रोतों से जोड़ेंगे।
प्रमुख सुविधाएं और आकृष्ट करने वाली विशेषताएं
इस पार्क में पारंपरिक पहाड़ी शैली में निर्मित मुख्य प्रवेश द्वार, योग डेक, गजीबो, वॉकिंग ट्रैक, और अन्य आधुनिक सुविधाएं हैं। यहां जलीय जीवन के लिए अनुकूलता भी सुनिश्चित की गई है। यह पार्क अब केवल एक मनोरंजन स्थल नहीं है, बल्कि यह जल एवं पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक भी बन गया है।
भविष्य की योजनाएं
एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि यह पार्क विकास और पर्यावरण संरक्षण का एक सफल उदाहरण है, जिसे 8.63 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। भविष्य में भी, ऐसे प्रोजेक्ट्स पर ध्यान दिया जाएगा, जो शहर के प्राकृतिक संसाधनों और हरित क्षेत्रों को संरक्षण दें।
सच्चाई यह है कि जल-सृष्टि पार्क सिर्फ एक पार्क नहीं है, बल्कि यह आम जनता को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने की एक एकीकृत पहल है। यह प्रदर्शित करता है कि पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास को कैसे एक साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।
फिर आज के समय में, जब जल संकट और पर्यावरणीय समस्याएं अत्यधिक बढ़ गई हैं, ऐसे प्रोजेक्ट्स वर्तमान में बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनमें जल-स्रोतों की रक्षा और उनके सहेजने के उपायों को शामिल किया गया है।
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सादर,
पीया राज, टीम द ओड नारी
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