महाकवि कालिदास की याद में दून में भव्य साहित्यिक-सांस्कृतिक उत्सव
The post दून में कालिदास को किया याद ,सजा साहित्यिक-सांस्कृतिक मंच appeared first on Avikal Uttarakhand. दून पुस्तकालय में महाकवि कालिदास की कृतियों का सजीव उत्सव श्लोक, चित्रकला और नृत्य के संग कालिदास को नमन कालिदास पर केन्द्रित कार्यक्रम का आयोजन दून पुस्तकालय में अविकल उत्तराखण्ड… The post दून में कालिदास को किया याद ,सजा साहित्यिक-सांस्कृतिक मंच appeared first on Avikal Uttarakhand.
महाकवि कालिदास की याद में दून में भव्य साहित्यिक-सांस्कृतिक उत्सव
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कम शब्दों में कहें तो, दून पुस्तकालय में महाकवि कालिदास की कृतियों पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें श्लोक, चित्रकला और नृत्य के माध्यम से उनकी प्रतिभा का सम्मान किया गया।
देहरादून। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र ने महाकवि कालिदास की कृतियों को समर्पित एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर कालिदास की साहित्यिक रचनाओं और उनके जीवन पर विमर्श किया गया, साथ ही विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आयोजन हुआ। यह कार्यक्रम उत्तराखण्ड राज्य स्थापना दिवस के रजत जयंती समारोह का एक हिस्सा था।
सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत मेल
कार्यक्रम में भाग लेने वाले विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के छात्रों ने संस्कृत श्लोकों का सामूहिक गायन किया। छात्रों द्वारा महाकवि कालिदास के चित्रों पर आधारित चित्रकला प्रदर्शनी भी लगाई गई, जो दर्शकों की उत्सुकता का केंद्र रही।
प्रतिभाशाली कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुति
कार्यक्रम के दूसरे चरण में दून पुस्तकालय के एम्फीथियेटर में कालिदास की रचनाओं जैसे कि 'मेघदूत', 'हिमालय प्रशस्ति', 'कुमार संभव' और 'काली' पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। प्रसिद्ध नृत्यांगना शर्मिला गांगुली व उनकी टीम की प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया।
सम्मानित वक्ता और अतिथियों का योगदान
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. सुधा रानी पांडेय, पूर्व कुलपति, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में श्री दीपक गैरोला, सचिव संस्कृत शिक्षा, उत्तराखण्ड शासन उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता डॉ. रामविनय सिंह, प्रोफेसर, संस्कृत, डी.ए.वी. (पीजी) कॉलेज थे।
वक्ता डॉ. राम विनय सिंह ने कहा कि कालिदास सच में श्रंगार के महाकवि हैं। उन्होंने कालिदास के जीवन, उनके कार्य और उनके महत्व पर गहराई से चर्चा की। उनका जन्म स्थान रुद्रप्रयाग जनपद का कविल्ठा गांव माना जाता है।
संस्कृत साहित्य का संरक्षण और संवर्धन
मुख्य अतिथि दीपक गैरोला ने संस्कृत कवि कालिदास के व्यापक कृतित्व के लिए इस कार्यक्रम को महत्वपूर्ण बताया और सरकार द्वारा आयोजित प्रयासों की भी प्रशंसा की।
डॉ. सुधा रानी पांडेय ने कहा, "देहरादून जैसे आधुनिक शहर में संस्कृत साहित्य की अच्छी परंपरा विकसित हो रही है, और दून पुस्तकालय का यह अभिनव प्रयास इस दिशा में महत्वपूर्ण है।"
कार्यक्रम के प्रारम्भ में दून पुस्तकालय के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी ने सभी का अभिनंदन किया। संचालन का कार्य डॉ. भारती मिश्रा ने किया, जबकि दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के मानद निदेशक एन. रवि शंकर ने अतिथियों और कलाकारों को प्रतीक चिन्ह भेंट किये।
उपस्थित महत्वपूर्ण शख्सियतें
इस कार्यक्रम में मुख्य सूचना आयुक्त, उत्तराखण्ड, राधा रतूड़ी, पूर्व मुख्य सचिव नृप सिंह नपलच्याल, कई साहित्यकार और संस्कृतिकर्मी उपस्थित रहे, जिन्होंने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
इस कार्यक्रम ने महाकवि कालिदास की कृतियों को जीवंत किया और दर्शकों को उनकी महानता का अनुभव करने का अवसर प्रदान किया। आगे भी इस प्रकार के आयोजनों से संस्कृत साहित्य की महत्ता और उसका संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।
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Team The Odd Naari
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