नैनीताल के भूमियाधार में पानी और सड़क की मांग को लेकर उग्र आंदोलन

Nainital News : नैनीताल के भूमियाधार के ग्रामीणों ने पानी और सड़क के लिए अपना आंदोलन तेज किया भूमियाधार के ग्रामीण कई दिनों से पानी और मोटर मार्ग के लिए धरना प्रदर्शन किया उनके समर्थन में समाजसेवी शीलू कुमार भी पहुंचे ग्रामीण का कहना है कि 10 वर्षों से विधायक सरिता आर्या का गढ़ होने […]

Sep 10, 2026 - 00:38
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नैनीताल के भूमियाधार में पानी और सड़क की मांग को लेकर उग्र आंदोलन

नैनीताल के भूमियाधार में पानी और सड़क की मांग को लेकर उग्र आंदोलन

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कम शब्दों में कहें तो नैनीताल के भूमियाधार के ग्रामीणों ने पानी और सड़क की व्यवस्था नहीं होने पर अपना आंदोलन तेज कर दिया है। पिछले कई दिनों से यह ग्रामीण धरने पर बैठे हैं। उनके साथ समाजसेवी शीलू कुमार भी जुड़े हुए हैं, और ग्रामीणों का आरोप है कि विधायक सरिता आर्या के गढ़ होने के बावजूद उन्हें इंटरनेट, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

नैनीताल में भूमियाधार के ग्रामीणों का आंदोलन पिछले कुछ दिनों से चर्चा का विषय बना हुआ है। गांव के लोगों ने हाल ही में हल्द्वानी-बवाली रोड पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन आयोजित किया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंकज बिष्ट ने कहा कि अगर उनकी मांगें जल्दी नहीं मानी गईं, तो ग्रामीण उग्र आंदोलनों पर मजबूर होंगे।

सड़क और पानी की कमी से परेशान ग्रामीण

ग्रामीणों का कहना है कि उनकी पानी और सड़क की समस्या को लेकर गंभीर दिक्कतें आ रही हैं। जब रात होती है, तो उन्हें जंगली जानवरों के हमले का भी खतरा होता है। खासकर, गुलदार के आने से लोग भयभीत हैं। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि अगर उनकी मांगें जल्दी पूरी नहीं होती हैं, तो वे और भी उग्र आंदोलन का रुख करेंगे।

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भूमियाधार के लोगों ने जमकर की नारेबाजी

इस दौरान ग्रामीणों ने "रोड नहीं, वोट नहीं" जैसे नारे लगाए। लोगों का कहना है कि विधायक सरिता आर्या के गृह क्षेत्र होने के बाद भी वे अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क की समस्याओं के कारण, उनकी सामुदायिक और व्यक्तिगत जिंदगी पर बुरा असर पड़ा है।

ग्रामीणों ने ठानी, मांगें मानने पर मजबूर करेंगे प्रशासन

ग्रामीणों का कहना है कि बीमार और बुजुर्ग नागरिकों को सड़क न होने पर अत्यधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अगर उनकी आवश्यकताएं जल्द नहीं मानी गईं, तो वे सख्त आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, और इसका सभी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

समाजसेवी शीलू कुमार ने भी इस आंदोलन में ग्रामीणों का साथ देने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि यह मुद्दा केवल एक गांव का नहीं, बल्कि पूरी प्रणाली का है। अगर ऐसे हालात बने रहें, तो विकास का कोई मतलब नहीं है।

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Team The Odd Naari

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