नेकॉफ के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: दो मुकदमे दर्ज, सरकारी धन की वसूली की प्रक्रिया शुरू
The post नेकॉफ के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज कराने की कार्रवाई appeared first on Avikal Uttarakhand. देशभर में ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू सरकारी धन के गबन पर बड़ा एक्शन ₹71.90 लाख की राशि हड़पने के साथ 9 सहकारी संस्थाओं के ₹75.82 लाख से अधिक के… The post नेकॉफ के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज कराने की कार्रवाई appeared first on Avikal Uttarakhand.
नेकॉफ के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: दो मुकदमे दर्ज, सरकारी धन की वसूली की प्रक्रिया शुरू
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड सरकार ने नेकॉफ के खिलाफ दो मुकदमे दायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें उसने ₹71.90 लाख की हड़पने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही, नौ सहकारी संस्थाओं के ₹75.82 लाख के सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला भी सामने आया है।
देहरादून। उत्तराखंड राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के अंतर्गत सहकारिता विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए नेशनल फेडरेशन ऑफ फार्मर्स प्रोक्योरमेंट, प्रोसेसिंग एंड रिटेलिंग कोऑपरेटिव ऑफ इंडिया लिमिटेड (नेकॉफ) के खिलाफ दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। इसके अलावा, संस्था को अखिल भारतीय स्तर पर ब्लैकलिस्ट करने तथा सरकारी धन की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
सरकारी धन के गबन पर बड़ा एक्शन
राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि करना तथा पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकना है। इसी क्रम में जनपद टिहरी गढ़वाल की मौगी दीर्घाकार बहुउद्देशीय सहकारी समिति लिमिटेड द्वारा 70 एकड़ अनुपयोगी भूमि को लीज पर लेकर संयुक्त सहकारी खेती परियोजना का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। इसे सफलतापूर्वक चलाने के लिए नेकॉफ को हैंडहोल्डिंग सपोर्ट एजेंसी के रूप में चुना गया था।
परियोजना के स्वीकृति मिलने के बाद समिति को ₹1,28,43,860 की धनराशि उपलब्ध कराई गई, जिसमें से ₹71,90,319 की राशि नेकॉफ को हस्तांतरित की गई थी। लेकिन, आरोप है कि पांच वर्षों के बाद भी संस्था ने न तो कोई कार्य किया और न ही सरकारी धन वापस किया। इस लापरवाही के कारण समिति को किसी भी प्रकार की आय प्राप्त नहीं हुई, जबकि सरकारी धन पर ब्याज का भार बढ़ता गया।
किसानों की उम्मीदों पर कुठाराघात
परियोजना कार्यालय एवं समिति द्वारा कई बार कार्य पूर्ण करने के लिए पत्राचार किया गया, लेकिन संस्था ने केवल आश्वासन दिए। इसके चलते परियोजना से जुड़े किसानों में भारी रोष व्याप्त है और उन्होंने कठोर कार्रवाई की मांग की है।
जांच में यह भी पता चला है कि नेकॉफ ने ई-एमसीपी योजना के अंतर्गत भी प्रदेश की नौ सहकारी संस्थाओं से सरकारी धन के उपयोग में गंभीर अनियमितताएं की हैं। इन संस्थाओं से प्राप्त धनराशि का कुल मामला ₹75,82,680 है।
- एमपैक्स गरुड़, बागेश्वर
- जिला सहकारी विकास संघ, चमोली
- फल एवं साग-भाजी सहकारी क्रय-विक्रय समिति, चकराता (देहरादून)
- टनकपुर क्रय-विक्रय समिति लिमिटेड, चम्पावत
- सीमांत सहकारी संघ लिमिटेड, चमोली
- डीसीडीएफ, देहरादून
- मंगलौर क्रय-विक्रय समिति, हरिद्वार
- जिला भेषज एवं सहकारी विकास संघ लिमिटेड, टिहरी गढ़वाल
- केंद्रीय उपभोक्ता भंडार, उत्तरकाशी
राजनीतिक कदम उठाता राज्य सहकारिता विभाग
मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, इसे सचिव, सहकारिता के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसके बाद संस्था को ब्लैकलिस्ट करने, सरकारी धन की वसूली सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की दिशा में निर्देश जारी किए गए।
राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आनंद शुक्ल ने कहा, "नेकॉफ संस्था के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की गई है। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि संस्था को राष्ट्रीय स्तर पर ब्लैकलिस्ट किया जाए। सरकारी धन का दुरुपयोग और सहकारी संस्थाओं के हितों के खिलाफ कोई भी कार्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" उन्होंने कहा कि सहकारिता विभाग हर मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है।
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सादर,
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