ग्राम प्रधानों की 10 मांगों पर सरकार ने बनाई 4 सदस्यीय समिति, सचिवालय कूच का असर

देहरादून: उत्तराखंड में ग्राम प्रधानों के 10 सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेशभर से ग्राम प्रधानों के देहरादून पहुंचकर प्रदर्शन और सचिवालय कूच के बाद शासन ने उनकी मांगों के परीक्षण के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति ग्राम प्रधान संगठन की […] The post सचिवालय कूच का असर! ग्राम प्रधानों की 10 मांगों पर सरकार ने बनाई 4 सदस्यीय समिति appeared first on Uttarakhand Broadcast.

Oct 9, 2026 - 00:38
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ग्राम प्रधानों की 10 मांगों पर सरकार ने बनाई 4 सदस्यीय समिति, सचिवालय कूच का असर
ग्राम प्रधानों की 10 मांगों पर सरकार ने बनाई 4 सदस्यीय समिति, सचिवालय कूच का असर

ग्राम प्रधानों की 10 मांगों पर सरकार ने बनाई 4 सदस्यीय समिति, सचिवालय कूच का असर

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देहरादून: उत्तराखंड में ग्राम प्रधानों के 10 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहा आंदोलन अब एक नए मोड़ पर पहुँच गया है। शासन ने उनके द्वारा उठाई गई मांगों के परीक्षण के लिए एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह निर्णय उन ग्राम प्रधानों के देहरादून पहुंचकर किए गए प्रदर्शन और सचिवालय कूच के बाद लिया गया है। इस समिति का मुख्य उद्देश्य ग्राम प्रधान संगठन द्वारा प्रस्तुत 10 मांगों का बिंदुवार परीक्षण कर उनकी संस्तुति सरकार के समक्ष प्रस्तुत करना है।

कम शब्दों में कहें तो, यह समिति सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो ग्राम प्रधानों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रयासरत है। इससे सरकार की मंशा भी स्पष्ट होती है कि वह ग्राम प्रधानों की आवाज सुनने को गंभीरता से ले रही है।

इस मामले में 8 अक्टूबर 2026प्रदर्शन के बाद सरकार का बड़ा फैसला

ग्राम प्रधान संगठन ने लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार के समक्ष आवाज उठाई थी। 8 अक्टूबर को प्रदेशभर के ग्राम प्रधानों ने देहरादून आकर परेड ग्राउंड में एक सभा आयोजित की और फिर सचिवालय की ओर कूच किया।

सचिवालय तक पहुँचने से पहले, पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। इस दौरान कुछ ग्राम प्रधानों ने बैरिकेडिंग को पार करने की कोशिश की, जिसके परिणामस्वरूप प्रदर्शनकारी सड़क पर धरने पर बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करने लगे।

ग्राम प्रधानों की इन गतिविधियों के बाद ही शासन ने चार सदस्यीय समिति के गठन का निर्णय लिया।

चार सदस्यीय समिति में ये अधिकारी शामिल

इस समिति में निम्नलिखित अधिकारियों को शामिल किया गया है:

  • सचिव, पंचायती राज — अध्यक्ष
  • सचिव, वित्त — सदस्य
  • सचिव, ग्राम्य विकास — सदस्य
  • निदेशक, पंचायती राज — सदस्य संयोजक

यह समिति ग्राम प्रधान संगठन द्वारा प्रस्तुत 10 सूत्रीय मांगों का बिंदुवार परीक्षण करेगी और अपनी संस्तुति सक्षम स्तर पर प्रस्तुत करेगी।

ग्राम प्रधानों की प्रमुख मांगें

ग्राम प्रधानों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • न्यूनतम 20 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय की मांग
  • मनरेगा/वीबी जीरामजी योजना में पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था में बदलाव
  • अकुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी 600 रुपये प्रतिदिन और कुशल श्रमिकों के लिए 800 रुपये प्रतिदिन

ग्राम प्रधानों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या के कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने में बहुत दिक्कत आती है। इस समस्या का समाधान न होने के कारण विकास कार्य प्रभावित हुए हैं और श्रमिकों को रोजगार देने में परेशानी आ रही है।

अब समिति की संस्तुति पर टिकी नजर

समिति के गठन के बाद अब ग्राम प्रधान संगठन की नजर समिति की कार्रवाई और उसकी संस्तुतियों पर रहेगी। समिति अपनी रिपोर्ट और संस्तुतियां सक्षम स्तर पर प्रस्तुत करेगी, जिसके बाद सरकार ग्राम प्रधानों की मांगों पर आगे निर्णय लेगी।

इस सरकार के कदम के बाद, अब ग्राम प्रधान संगठन की निगाहें इस बात पर होंगी कि समिति कैसे कार्य करती है और उनकी मांगों को लेकर सरकार क्या निर्णय लेगी। इसके साथ ही, यह कदम एक सकारात्मक संकेत भी है कि सरकार ग्राम प्रधानों के मुद्दों को सुनने के लिए तैयार है।

सरकार की यह पहल निश्चित रूप से विकास कार्यों को गति देने और ग्राम प्रधानों की समस्याओं को हल करने में मदद करेगी।

ग्राम प्रधानों का प्रदर्शन

इस प्रकार, उत्तराखंड में ग्राम प्रधानों की 10 सूत्रीय मांगों पर बनी समिति उनके लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।

इसके अलावा, अधिक जानकारी और विस्तार के लिए, कृपया यहां क्लिक करें.

सादर,

टीम द ओड नारी

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