उत्तराखंड में बुजुर्गों की देखभाल के लिए केयर इकॉनमी का नया मोड़: देहरादून में कार्यशाला आयोजित

देहरादून: उत्तराखंड में बढ़ती वरिष्ठ नागरिक आबादी और बदलती सामाजिक परिस्थितियों के बीच केयर इकॉनॉमी (Care Economy) को मजबूत बनाने की दिशा में बुधवार को देहरादून में पहली विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार और समाज कल्याण विभाग, उत्तराखंड के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यशाला में देखभाल सेवाओं […] The post अकेले रह रहे बुजुर्गों की देखभाल के लिए बनेगी बेहतर व्यवस्था, देहरादून में Care Economy पर चर्चा appeared first on Uttarakhand Broadcast.

Aug 12, 2026 - 18:38
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उत्तराखंड में बुजुर्गों की देखभाल के लिए केयर इकॉनमी का नया मोड़: देहरादून में कार्यशाला आयोजित
उत्तराखंड में बुजुर्गों की देखभाल के लिए केयर इकॉनमी का नया मोड़: देहरादून में कार्यशाला आयोजित

उत्तराखंड में बुजुर्गों की देखभाल के लिए केयर इकॉनमी का नया मोड़: देहरादून में कार्यशाला आयोजित

कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में केयर इकॉनमी को सुदृढ़ करने के लिए पहली कार्यशाला का आयोजन हुआ, जिसमें बुजुर्गों की देखभाल के लिए नई योजनाओं पर चर्चा की गई। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बढ़ती वरिष्ठ नागरिक आबादी को देखते हुए उचित देखभाल सेवाएँ सुनिश्चित करना है।

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देहरादून: उत्तराखंड में बुजुर्ग नागरिकों की बढ़ती संख्या और सामाजिक परिवर्तनों के मद्देनजर, केयर इकॉनमी (Care Economy) को सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार और उत्तराखंड के समाज कल्याण विभाग के सहयोग से हुई। इस बैठक में देखभाल सेवाओं के संगठन, पेशेवर मानकों को लागू करने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर विचार किया गया।

केयर इकॉनमी का अर्थ

केयर इकॉनमी में विभिन्न सेवाएं शामिल हैं जो लोगों की देखभाल, स्वास्थ्य, शिक्षा और दैनिक जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करती हैं, जैसे बच्चों की देखभाल, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल, स्वास्थ्य सेवाएं और घरेलू कार्य। कार्यशाला का लक्ष्‍य इन सेवाओं को प्रशिक्षित और पेशेवर बनाना था ताकि यह युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न कर सके।

बदलती पारिवारिक संरचना की चुनौतियां

समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने बैठक में उल्लेख किया कि उत्तराखंड में पहले पारिवारिक संरचना परंपरागत रूप से वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल करने वाले सदस्यों पर निर्भर थी, लेकिन अब Professional Care Services की जरूरत बढ़ रही है। बढ़ती एकल परिवारों की संख्या, जिसमें पुरुष और महिलाएं दोनों नौकरी करते हैं, ने पेशेवर देखभाल सेवाओं की मांग को बढ़ाया है।

पर्वतीय क्षेत्रों में बुजुर्गों की स्थिति

खजान दास ने चिंता व्यक्त की कि युवा वर्ग के पलायन के कारण पर्वतीय गांवों में कई वरिष्ठ नागरिक अकेले रह गए हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन बुजुर्गों की सामाजिक और भावनात्मक आवश्यकताओं के लिए कुशल देखभाल व्यवस्था स्थापित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि केयर इकॉनमी को मजबूत करने के लिए संयुक्त प्रयास आवश्यक हैं, जिसमें सरकार, NGOs, विशेषज्ञ और सिविल सोसाइटी सभी शामिल होंगे।

बुजुर्गों की संख्या में वृद्धि

कार्यशाला में यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या वर्ष 2011 में 10.38 करोड़ थी, जो कि कुल जनसंख्या का लगभग 8.6 प्रतिशत बनाती है। अनुमान है कि वर्ष 2050 तक यह संख्या लगभग 35 करोड़ तक पहुँच सकती है।

कई सेवाओं की भागीदारी

इस कार्यशाला में स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, ग्रामीण विकास और वित्त विभाग के अधिकारियों ने भी भाग लिया। लतिका रॉय फाउंडेशन और हैप्पी फैमिली हेल्थ केयर एंड रिसर्च एसोसिएशन जैसे विभिन्न NGOs ने केयर इकॉनमी से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतियां दीं।

केयर इकॉनमी का रोजगार पर प्रभाव

काम में भागीदारी से यह पता चला कि उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां बुजुर्ग आबादी और युवाओं का पलायन जारी है, Care Economy आने वाले समय में आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यदि देखभाल सेवाओं को कौशल विकास और ट्रेनिंग के माध्यम से रोजगार से जोड़ा जाता है, तो इससे न केवल वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर देखभाल मिलेगी, बल्कि युवाओं के लिए भी नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

इसके अलावा, सभी प्रतिभागियों ने सहमति व्यक्त की कि इन सेवाओं का प्रशिक्षण देने से निकट भविष्य में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। यह न केवल बुजुर्गों की गुणवत्ता की देखभाल सुनिश्चित करेगा, बल्कि समग्र विकास में भी योगदान देगा।

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सादर,
दीप्ति शर्मा
Team The Odd Naari

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