उत्तराखंड: पशुपालकों के दूध के दाम में इजाफे की मांग, किसान मंच ने शुरू किया आंदोलन की चेतावनी

हल्द्वानी: उत्तराखंड में पशुपालकों को दूध का उचित और सम्मानजनक खरीद मूल्य दिलाने की मांग को लेकर किसान मंच उत्तराखंड ने आंदोलन का ऐलान किया है। किसान मंच ने राज्य सरकार को दो सप्ताह का समय देते हुए कहा है कि यदि इस अवधि में पशुपालकों के हित में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया […] The post उत्तराखंड में दूध के दाम पर किसान मंच का बड़ा ऐलान, दो सप्ताह में फैसला नहीं तो चंपावत से शुरू होगा पशुपालक आंदोलन appeared first on Uttarakhand Broadcast.

Oct 7, 2026 - 00:38
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उत्तराखंड: पशुपालकों के दूध के दाम में इजाफे की मांग, किसान मंच ने शुरू किया आंदोलन की चेतावनी
उत्तराखंड: पशुपालकों के दूध के दाम में इजाफे की मांग, किसान मंच ने शुरू किया आंदोलन की चेतावनी

उत्तराखंड: पशुपालकों के दूध के दाम में इजाफे की मांग, किसान मंच ने शुरू किया आंदोलन की चेतावनी

हल्द्वानी: उत्तराखंड में पशुपालकों को दूध का उचित और सम्मानजनक खरीद मूल्य दिलाने के लिए किसान मंच उत्तराखंड ने एक बड़ा ऐलान किया है। संगठन ने राज्य सरकार को दो सप्ताह का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में पशुपालकों की मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विधानसभा चंपवत से एक शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक पशुपालक आंदोलन का प्रारंभ किया जाएगा।

यह घोषणा मंगलवार, 6 अक्टूबर को हल्द्वानी के मोती महल रेस्टोरेंट, नैनीताल रोड में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान की गई। किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष, कार्तिक उपाध्याय ने कहा कि उनका संगठन आंदोलन को अंतिम विकल्प के रूप में नहीं देखता है। इससे पहले, 1 अक्टूबर 2026 को निदेशक, डेयरी विकास विभाग, उत्तराखंड को ज्ञापन देकर समस्याओं के समाधान के लिए सरकार को दो सप्ताह का समय दिया गया था।

उन्होंने कहा, "हम संवाद के माध्यम से समाधान चाहते हैं। यदि सरकार हमारी मांगों पर सकारात्मक निर्णय करती है, तो हमें आंदोलन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, लेकिन यदि हमारी अनदेखी की गई तो आंदोलन जरूर किया जाएगा।"

इस प्रेस वार्ता में प्रदेश प्रवक्ता कुसुम लता बौड़ाई, प्रदेश उपाध्यक्ष युवा पहाड़ी कमल तिवारी, संरक्षक पीयूष जोशी और हल्द्वानी ब्लॉक अध्यक्ष ललित मोहन जोशी भी उपस्थित रहे।

किसान मंच ने पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए उत्तराखंड सरकार से सवाल उठाया है। संगठन का कहना है कि हिमाचल प्रदेश के वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में गाय के दूध का खरीद मूल्य ₹51 से बढ़ाकर ₹61 प्रति लीटर और भैंस के दूध का खरीद मूल्य ₹61 से बढ़ाकर ₹71 प्रति लीटर करने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही, दूध खरीद से जुड़ी प्रोत्साहन राशि को ₹3 से बढ़ाकर ₹6 प्रति लीटर करने की बात भी की गई है।

कुसुम लता बौड़ाई ने कहा, "उत्तराखंड भी एक पहाड़ी राज्य है, जहां पशुपालन ग्रामीण परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है। चारा, पशु आहार, दवाइयाँ और पशुओं के इलाज की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन दूध का मूल्य उसी अनुपात में नहीं बढ़ रहा।"

“जब पशुपालक की लागत लगातार बढ़ रही है, तो उसकी मेहनत से पैदा होने वाले दूध का सम्मानजनक मूल्य क्यों नहीं मिल रहा?”, ये सवाल किया गया। किसान मंच का मानना है कि पशुपालन केवल दूध बेचने तक सीमित नहीं है, यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी से भी जुड़ा है।

प्रदेश अध्यक्ष कार्तिक उपाध्याय ने कहा कि किसान मंच ने सरकार को पहले ही पर्याप्त समय दिया है। उन्होंने कहा, “हमने सरकार का दरवाजा पहले कागज लेकर खटखटाया है, भीड़ लेकर नहीं। यदि सरकार हमारी समस्याओं पर ध्यान नहीं देती, तो हमें आन्दोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।”

कार्तिक ने यह भी बताया कि आंदोलन का आरंभ चंपावत से करना प्रतीकात्मक होगा, क्योंकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि दो सप्ताह की समय सीमा पूरी होने के बाद चंपावत के पशुपालकों के साथ बैठक की जाएगी और इसके बाद आंदोलन की तारीख और कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी।

किसान मंच ने यह स्पष्ट किया है कि यदि आंदोलन की आवश्यकता पड़ी तो इसे चंपावत से कुमाऊं और फिर पूरे उत्तराखंड में विस्तार दिया जाएगा। इसके साथ ही, उन्होंने कहा है कि पहाड़ों से पलायन रोकने और गांवों को बचाने की बात तभी संभव होगी जब किसान और पशुपालक आर्थिक रूप से मजबूत होंगे।

प्रदेश उपाध्यक्ष युवा पहाड़ी कमल तिवारी ने यह टिप्पणी की कि पहाड़ का युवा रोजगार के लिए मैदानों और अन्य राज्यों की ओर भाग रहा है। उन्होंने इसे आवश्यक बताया कि खेती और पशुपालन को आर्थिक रूप से मजबूत किया जाए।

हल्द्वानी ब्लॉक अध्यक्ष ललित मोहन जोशी ने कहा कि दूध का उचित मूल्य एक जिले तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी और नैनीताल क्षेत्र के पशुपालकों के साथ भी बैठक कर उन्हें अभियान से जोड़ा जाएगा।

किसान मंच के संरक्षक पीयूष जोशी ने भी घोषणा की है कि यदि सरकार से सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो प्रदेश के अन्य किसान संगठनों और सामाजिक संगठनों से समर्थन की अपील की जाएगी। उन्होंने कहा, “संघर्ष शुरू करने से पहले हम सौ बार संवाद के लिए तैयार हैं, लेकिन संघर्ष शुरू होने के बाद पशुपालक को बीच रास्ते में छोड़ने का प्रश्न ही नहीं उठता।”

किसान मंच ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित आंदोलन शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से किया जाएगा। संगठन ने राज्य सरकार से निवेदन किया है कि दो सप्ताह की समय-सीमा को आंदोलन की उलटी गिनती बनने देने के बजाय इसे समाधान के लिए एक अवसर बनाएं।

किसान मंच स्पष्ट करता है कि पशुपालक किसी प्रकार की खैरात नहीं मांग रहे हैं, बल्कि अपनी मेहनत का उचित मूल्य चाहते हैं। उन्होंने सरकार से दूध के खरीद मूल्य को लेकर जल्द ठोस निर्णय लेने की मांग की है।

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में दूध के दाम के मामले में किसान मंच ने चंपावत से आंदोलन की चेतावनी दी है। सरकार को 2 सप्ताह का समय दिया गया है, अन्यथा आंदोलन शुरू होगा। नवीनतम अपडेट के लिए यहाँ क्लिक करें.

— टीम द ऑड नारी

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