अमेरिकी दबाव में भारत सरकार ने ट्रेड डील पर हस्ताक्षर किए तो देशव्यापी आंदोलन की तैयारी — कार्तिक उपाध्याय

हल्द्वानी। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर किसान संगठनों ने केंद्र सरकार से कृषि, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। किसान मंच उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष एवं देश बचाओ मोर्चा उत्तराखंड के कार्यक्रम संयोजक कार्तिक उपाध्याय ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी दबाव में किसानों के हितों के […] The post अमेरिकी दबाव में भारत सरकार ने ट्रेड डील पर हस्ताक्षर किए तो देशव्यापी आंदोलन की तैयारी — कार्तिक उपाध्याय appeared first on Uttarakhand Broadcast.

Oct 26, 2026 - 18:38
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अमेरिकी दबाव में भारत सरकार ने ट्रेड डील पर हस्ताक्षर किए तो देशव्यापी आंदोलन की तैयारी — कार्तिक उपाध्याय

हल्द्वानी। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर किसान संगठनों ने केंद्र सरकार से कृषि, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। किसान मंच उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष एवं देश बचाओ मोर्चा उत्तराखंड के कार्यक्रम संयोजक कार्तिक उपाध्याय ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी दबाव में किसानों के हितों के विपरीत किसी व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, तो देशव्यापी आंदोलन की तैयारी की जाएगी।

हल्द्वानी में आयोजित प्रेस वार्ता में कार्तिक उपाध्याय ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील में भारतीय किसानों, पशुपालकों और डेयरी क्षेत्र के हित सर्वोपरि होने चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से समझौते की शर्तों को सार्वजनिक करने और किसान संगठनों के साथ व्यापक संवाद करने की मांग की। उनके अनुसार, व्यापार समझौते का असर देश के छोटे एवं सीमांत किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की आजीविका पर पड़ सकता है।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील की शर्तें सार्वजनिक करने की मांग

कार्तिक उपाध्याय ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सामने आ रही जानकारियों के बीच किसान संगठनों की चिंताएं बढ़ी हैं। उन्होंने कृषि एवं खाद्य उत्पादों के व्यापार में संभावित रियायतों का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतिम समझौते में भारतीय कृषि, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के संरक्षण को स्पष्ट रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार को विश्वास है कि समझौते से भारतीय किसानों के हित प्रभावित नहीं होंगे, तो किसान संगठनों के साथ इसकी शर्तें साझा कर संभावित आयात, शुल्क में रियायतों और घरेलू बाजार पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

उपाध्याय ने कहा कि अमेरिकी कृषि क्षेत्र और भारत के छोटे किसानों की परिस्थितियों में बड़ा अंतर है। भारतीय किसान पहले ही बढ़ती कृषि लागत, कर्ज, फसलों के उचित मूल्य और बाजार की अनिश्चितता जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में किसी भी व्यापारिक रियायत से पहले उसके संभावित प्रभावों की गंभीर समीक्षा जरूरी है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देश की आर्थिक संप्रभुता, किसानों की आजीविका और पशुपालकों के हितों को प्राथमिकता दी जाए।

100 से अधिक किसान-मजदूर और सामाजिक संगठन देश बचाओ मोर्चा से जुड़े

प्रेस वार्ता में उपाध्याय ने बताया कि किसान, मजदूर, कर्मचारी, युवा और सामाजिक संगठनों के विभिन्न आंदोलनों को साझा राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से देश बचाओ मोर्चा का गठन किया गया है। उन्होंने दावा किया कि अब तक 100 से अधिक किसान, मजदूर और सामाजिक संगठन इस मोर्चे के साथ जुड़ चुके हैं।

उन्होंने बताया कि जून और जुलाई 2026 में चंडीगढ़ के किसान भवन में आयोजित बैठकों के माध्यम से इस पहल को आगे बढ़ाया गया। उनके अनुसार, किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी, सरवन सिंह पंधेर, वी. एम. सिंह, सरजीत सिंह फूल, प्रकाश पोहरे और शिव कुमार कक्का सहित विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने मोर्चे के गठन और गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उपाध्याय ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, किसानों की कर्जमुक्ति और कृषि संकट जैसे मुद्दे भी मोर्चे की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

चंडीगढ़ से दिल्ली तक हुईं राष्ट्रीय स्तर की बैठकें

कार्तिक उपाध्याय के मुताबिक, देश बचाओ मोर्चा की अब तक चार महत्वपूर्ण बैठकें हो चुकी हैं। 25 जून और 1 जुलाई 2026 को चंडीगढ़ में किसान संगठनों के बीच विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद 21 जुलाई को नई दिल्ली के किसान घाट पर व्यापार समझौते के विरोध में किसान महापंचायत और प्रदर्शन का आह्वान किया गया।

उन्होंने बताया कि 1 सितंबर को नई दिल्ली स्थित गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में संगठनात्मक बैठक हुई। इसके बाद 22 अक्टूबर 2026 को इसी स्थान पर आयोजित राष्ट्रीय बैठक में किसान-मजदूर संगठनों की साझा रणनीति, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा की गई।

उपाध्याय ने कहा कि 22 अक्टूबर की बैठक में उन्होंने उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व किया और प्रदेश में आगामी बैठक आयोजित करने की जिम्मेदारी स्वीकार की।

19 नवंबर को उत्तराखंड में होगी महत्वपूर्ण बैठक

देश बचाओ मोर्चा की अगली महत्वपूर्ण बैठक 19 नवंबर 2026 को उत्तराखंड में आयोजित की जाएगी। कार्तिक उपाध्याय ने बताया कि बैठक का आयोजन किसान मंच उत्तराखंड की ओर से किया जाएगा। इसके लिए देहरादून या हरिद्वार में से किसी एक स्थान का चयन किया जाना है।

उन्होंने बताया कि बैठक का नेतृत्व किसान मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता तथा टीम अन्ना की कोर कमेटी से जुड़े वरिष्ठ आंदोलनकारी भोपाल सिंह चौधरी करेंगे।

इस बैठक में देश के 20 से अधिक राज्यों के किसान, मजदूर, सामाजिक और जनआंदोलनकारी संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित करने की योजना है। उपाध्याय के अनुसार, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश सहित पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधियों से भी संपर्क किया जाएगा।

बैठक का प्रमुख उद्देश्य विभिन्न संगठनों के बीच संवाद बढ़ाना, साझा मुद्दों पर विचार-विमर्श करना और उत्तराखंड में देश बचाओ मोर्चा के संगठनात्मक विस्तार की रूपरेखा तैयार करना होगा।

गैरसैंण, बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दों पर भी बनेगी साझा रणनीति

कार्तिक उपाध्याय ने कहा कि उत्तराखंड में स्थायी राजधानी गैरसैंण, किसानों और पशुपालकों के अधिकार, बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि अधिकार और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर अनेक संगठन सक्रिय हैं।

उन्होंने कहा कि इन संगठनों की अपनी स्वतंत्र पहचान और अलग-अलग प्राथमिकताएं हैं, लेकिन जनहित और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े साझा सवालों पर समन्वय स्थापित करने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के विभिन्न जिलों में सक्रिय संगठनों के पदाधिकारियों से संपर्क किया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में सभी संगठनों की स्वतंत्र पहचान और स्थानीय मुद्दों का सम्मान करते हुए सहयोग की व्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

लोकतांत्रिक अधिकारों और जनआंदोलनों की स्वतंत्रता पर भी जोर

उपाध्याय ने कहा कि देश बचाओ मोर्चा का दायरा केवल कृषि और व्यापार समझौते तक सीमित नहीं रहेगा। मोर्चा किसानों, मजदूरों, युवाओं और आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों के साथ लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के सवाल भी उठाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण आंदोलनों को कई प्रकार की प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने राजनीतिक दलों से भी जनहित के मुद्दों पर प्रभावी भूमिका निभाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की।

उपाध्याय के शब्दों में, लोकतंत्र का अर्थ केवल सरकार बनाना नहीं, बल्कि नागरिकों को अपनी बात रखने, शांतिपूर्ण विरोध करने और संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने की स्वतंत्रता देना भी है।

दो चरणों में आगे बढ़ेगा देश बचाओ मोर्चा का अभियान

कार्तिक उपाध्याय ने बताया कि मोर्चे की आगामी रणनीति दो प्रमुख चरणों में आगे बढ़ाई जाएगी। पहले चरण में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में भारतीय कृषि, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के हितों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा। इसके तहत सरकार से समझौते की शर्तें सार्वजनिक करने और किसानों के हितों के विपरीत किसी प्रावधान से बचने की मांग की जाएगी।

दूसरे चरण में विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक इकाइयों का विस्तार कर किसानों, मजदूरों और अन्य जनआंदोलनों से जुड़े मुद्दों पर साझा राष्ट्रीय रणनीति तैयार करने का प्रयास होगा। इसमें एमएसपी की कानूनी गारंटी, फसलों के लाभकारी मूल्य, रोजगार, सुलभ शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और मजदूर अधिकारों जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

उपाध्याय के मुताबिक, आगामी एक माह में विभिन्न राज्यों में बैठकें आयोजित कर स्थानीय संगठनों की समस्याओं, प्राथमिकताओं और साझा मांगों को संकलित करने की योजना है।

उन्होंने कहा कि 19 नवंबर को उत्तराखंड में होने वाली बैठक राष्ट्रीय स्तर पर जनआंदोलनों के बीच समन्वय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होगी। उनका कहना था कि मोर्चे का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में संगठन खड़ा करना नहीं, बल्कि किसानों, मजदूरों, युवाओं और आम जनता से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाना है।

 

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