‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’: भारतीय लोक एवं जनजातीय कला का अद्भुत उत्सव
The post ‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’- जीवंत हुई भारतीय लोक एवं जनजातीय कला appeared first on Avikal Uttarakhand. श्रेष्ठ पांच विजेता कलाकारों को 25-25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि अविकल उत्तराखण्ड देहरादून। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी), प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी,… The post ‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’- जीवंत हुई भारतीय लोक एवं जनजातीय कला appeared first on Avikal Uttarakhand.
‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’: भारतीय लोक एवं जनजातीय कला का अद्भुत उत्सव
कम शब्दों में कहें तो इस चार दिवसीय कार्यशाला ने भारतीय लोक एवं जनजातीय कला को जीवंत किया और आधुनिक सन्दर्भ में उससे जुड़ने का अवसर प्रदान किया।
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देहरादून में आयोजित चार दिवसीय ‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’ कार्यशाला ने भारतीय लोक और जनजातीय कला के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी), प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, और ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 50 कलाकारों ने भाग लिया।
कला का प्रभावशाली संगम
इस कार्यशाला के माध्यम से विभिन्न विधाओं की लोक कला को प्रदर्शित किया गया, जिसमें चित्रकला प्रतियोगिता सबसे आकर्षक थी। कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से भारतीय संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य की झलक प्रस्तुत की।
मुख्य अतिथि की प्रेरणादायक बातें
समापन समारोह में डॉ. माधुरी बड़थ्वाल, प्रसिद्ध लोक गायिका और पद्मश्री सम्मान प्राप्तकर्ता, ने कहा कि कला केवल एक कार्य नहीं, बल्कि एक साधना है। उन्होंने बताया कि लोक कला हमें हमारे प्राकृतिक स्रोतों से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है। उनका मानना है कि एक संवेदनशील कलाकार समाज में सकारात्मकता और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है।
युवाओं की भूमिका
विशिष्ट अतिथि डॉ. राकेश भट्ट ने भी युवाओं को लोक कला के संरक्षण के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी क्षेत्र में युवा पीढ़ी को अपनी पारंपरिक कला और संस्कृति को समझने और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
विजेता कलाकार और पुरस्कार
चित्रकला प्रतियोगिता में चयनित पांच विजेता कलाकारों को 25-25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। इन कलाकारों में विशाखा गुंज्याल, मानवी सलाथिया, मीरा चौहान, आरुषि सेमवाल, और हर्षदीप कौर शामिल हैं। प्रत्येक प्रतिभागी को आगे बढ़ने के लिए एनसीजेडसीसी द्वारा 2100 रुपये की सम्मान राशि भी दी गई।
कार्यक्रम का महत्व
कार्यक्रम के समन्वयक, डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य समृद्ध लोक और जनजातीय कला को संरक्षित करना है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस कार्यक्रम ने विभिन्न क्षेत्रो से आए कलाकारों के बीच अनुभव साझा करने का अद्भुत अवसर उत्पन्न किया।
विद्यार्थियों की प्रतिक्रियाएँ
इस आयोजन की नोडल अधिकारी डॉ. मंदाकिनी शर्मा ने बताया कि यह कार्यक्रम पारंपरिक कला विधाओं के संरक्षण और प्रोत्साहन का महत्वपूर्ण कदम है। छात्रों ने इस कार्यशाला को अपनी प्रतिभा दिखाने का एक बेहतरीन मंच बताया।
अंतिम विचार
इस कार्यशाला ने न केवल कलाकारों को अपने हुनर के प्रदर्शन का मौका दिया, बल्कि भारतीय लोक एवं जनजातीय कला की विविधता को समझने का भी अवसर प्रदान किया। इस प्रकार के आयोजनों को आगे बढ़ाना आवश्यक है ताकि हमारी संस्कृति और कला की धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।
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Team The Odd Naari
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