मनोज जरांगे की भूख हड़ताल का अंत, सरकार को 90 दिन का अल्टीमेटम

सरकार को दिया 90 दिन का समय मराठा आरक्षण की मांग पर आंदोलन जारी रखने का ऐलान, मांगें पूरी नहीं होने पर मुंबई में फिर आंदोलन की चेतावनी जालना। मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने गुरुवार को 20 दिन बाद अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी। उन्होंने […]

Sep 17, 2026 - 09:38
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मनोज जरांगे की भूख हड़ताल का अंत, सरकार को 90 दिन का अल्टीमेटम

मनोज जरांगे की भूख हड़ताल का अंत, सरकार को 90 दिन का अल्टीमेटम

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कम शब्दों में कहें तो, मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आन्दोलन कर रहे मनोज जरांगे ने 20 दिनों बाद अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। उन्होंने सरकार को 90 दिन का समय दिया है, जिससे उनकी मांगों पर कार्रवाई की जा सके। यदि सरकार ने उनकी मांगों का समाधान नहीं किया, तो वे फिर से आन्दोलन करने की चेतावनी दी है। मनोज जरांगे

सरकार को दिया 90 दिन का समय

मराठा आरक्षण की मांग पर आंदोलन जारी रखने का ऐलान, मांगें पूरी नहीं होने पर मुंबई में फिर आंदोलन की चेतावनी

जालना। मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आन्दोलन कर रहे मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने गुरुवार को 20 दिन बाद अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को अपनी मांगों पर विचार और कार्रवाई के लिए 90 दिन यानी तीन महीने का समय दिया है। जरांगे ने स्पष्ट किया कि यदि इस अवधि में उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे एक बार फिर मुंबई में आंदोलन शुरू करेंगे।

29 अगस्त से भूख हड़ताल की शुरुआत

जरांगे ने 29 अगस्त को जालना जिले के अंतरवाली सराटी से भूख हड़ताल की शुरुआत की थी। उनकी प्रमुख मांग मराठा समुदाय को कुणबी वंशावली के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटे में आरक्षण देने की है। इसके साथ ही, उन्होंने हैदराबाद, सतारा और औंध गजट को मान्यता देने और पुराने सरकारी रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर कुणबी प्रमाणपत्र जारी करने की मांग भी रखी है।

15 सितंबर को मुंबई की ओर बढ़ा मार्च

जब उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, तब जरांगे ने 15 सितंबर को मुंबई की ओर मार्च करने का निर्णय लिया। जालना से रवाना होने से पहले उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि दी। हालांकि, बीड जिले के पाटोदा पहुंचने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके कारण उन्हें मार्च रोकना पड़ा।

डॉक्टरों के अनुसार, लंबी भूख हड़ताल के चलते जरांगे का रक्तचाप और रक्त शर्करा काफी कम हो गया था, और वे शरीर में पानी की कमी की समस्या से भी जूझ रहे थे। उनके स्वास्थ्य में गिरावट के बाद, आंदोलन के अगले चरण की चर्चा भी शुरू हो गई थी।

सरकार के प्रतिनिधियों से वार्ता के बाद फैसला

पाटोदा में महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक ने जरांगे के भूख हड़ताल खत्म करने के निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सरकार की ओर से बातचीत के लिए मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील, दादा भुसे, विधान परिषद सदस्य प्रसाद लाड, विधायक सुरेश धस, और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

बैठक में सरकार के प्रतिनिधियों ने जरांगे को मराठा आरक्षण से संबंधित विभिन्न मांगों पर अब तक प्रारंभ किए गए कामों की जानकारी दी, और आगे की प्रक्रिया की रूपरेखा प्रस्तुत की। मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने बताया कि सतारा और कोल्हापुर गजट से जुड़े मामलों में महाधिवक्ता की लिखित राय प्राप्त होने के बाद नवंबर या दिसंबर में आगे की कार्रवाई की संभावनाएं रहेंगी।

सरकार ने जरांगे से तीन प्रतिनिधियों की नियुक्ति करने का प्रस्ताव भी रखा, जो आरक्षण से संबंधित सरकारी प्रक्रियाओं की प्रगति पर निगरानी रख सकेंगे।

90 दिन की समयसीमा के साथ आंदोलन की चेतावनी

बैठक के बाद, जरांगे ने सरकार को 90 दिन का समय देने की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इस अवधि में उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे दोबारा मुंबई का रुख करेंगे और आन्दोलन की प्रक्रिया को फिर से शुरू करेंगे।

मराठा आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का विषय बना हुआ है। जरांगे पहले भी आरक्षण की मांग को लेकर कई बार आंदोलन और भूख हड़ताल कर चुके हैं। इस बार 20 दिन तक चले आन्दोलन के बाद सरकार और जरांगे के बीच हुई वार्ता के परिणामस्वरूप फिलहाल आन्दोलन को विराम मिला है, लेकिन 90 दिनों की समयसीमा के बाद स्थिति कितनी बदलती है, यह देखने की जरूरत होगी।

इस समाचार पर हमारी विस्तृत रिपोर्ट के लिए अधिक जानकारी के लिए [The Odd Naari](https://theoddnaari.com) पर जाएँ।

टीम द ओड नारी

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