जर्जर भवनों पर प्रशासन की सख्ती, बिना जांच नहीं मिलेगा गिरासू का दर्जा

देहरादून : जनपद देहरादून में जर्जर एवं संभावित रूप से असुरक्षित भवनों को लेकर प्रशासन ने गंभीर रुख अपनाया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने मंगलवार देर शाम वर्चुअल बैठक कर अधिकारियों को जर्जर भवनों के सर्वेक्षण, चिन्हीकरण और तकनीकी जांच के संबंध में जरूरी दिशा-निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी […] The post बड़ी खबर : जर्जर मकानों पर प्रशासन की नजर, बिना जांच नहीं मिलेगा ‘गिरासू’ का दर्जा appeared first on Uttarakhand Broadcast.

Sep 9, 2026 - 09:38
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जर्जर भवनों पर प्रशासन की सख्ती, बिना जांच नहीं मिलेगा गिरासू का दर्जा

जर्जर भवनों पर प्रशासन की सख्ती, बिना जांच नहीं मिलेगा गिरासू का दर्जा

देहरादून: जनपद देहरादून में जर्जर एवं संभावित रूप से असुरक्षित भवनों के मामलों को लेकर प्रशासन ने एक नई दिशा निर्धारित की है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने मंगलवार देर शाम वर्चुअल बैठक आयोजित कर विभिन्न अधिकारियों को जर्जर भवनों के सर्वेक्षण, चिन्हीकरण और तकनीकी जांच के लिए आवश्यक दिशानिर्देश जारी किए।

कम शब्दों में कहें तो, यदि कोई भवन जर्जर या गिरासू घोषित करना है, तो उसकी गहन तकनीकी जांच अनिवार्य है। यह कदम जनसुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए उठाया गया है। अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें.

सर्वेक्षण का काम प्राथमिकता पर

जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों, नगर निगम और नगर पालिका परिषदों के अधिकारियों को जर्जर एवं संभावित रूप से असुरक्षित भवनों का प्राथमिकता के आधार पर सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भवन की वास्तविक स्थिति, संरचनात्मक सुरक्षा और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जाए।

तकनीकी विशेषज्ञों की टीमों का गठन

जर्जर भवनों के निरीक्षण एवं तकनीकी परीक्षण के लिए नगर निगम, नगर पालिका परिषद, लोक निर्माण विभाग (PWD) और मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) के अधिकारियों को विशेषज्ञ टीमों का गठन करने के निर्देश दिए गए हैं। ये टीमें मिलकर भवनों की स्थिति का वैज्ञानिक एवं तकनीकी आधार पर मूल्यांकन करेंगी।

जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बैठक में कहा कि भवनों को गिरासू घोषित करने के कार्य में तकनीकी और विधिक दोनों पहलुओं का ध्यान रखा जाए। अधिकारियों को यह निर्देश भी दिया गया कि संभावित दुर्घटनाओं और जनहानि से बचने के लिए आवश्यक सुरक्षात्मक कदम समय पर उठाए जाएं।

विशेष रूप से जर्जर और संवेदनशील भवनों के मामलों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, अगर जरूरत पड़े, तो तत्काल सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है।

बैठक में शामिल अधिकारी

इस बैठक में कई प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे, जिसमें मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार, तथा नगर आयुक्त ऋषिकेश विजयनाथ शुक्ला शामिल थे। इसके अलावा, उप जिलाधिकारी और जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भी इस बैठक में उपस्थित रहे।

इस पूरी कार्यवाही का उद्देश्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और भविष्य में संभावित हादसों से बचाव करना है। डॉ. आशीष चौहान ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें।

जर्जर भवनों की स्थिति की समीक्षा कर इन क्षेत्रों में सुधार लाने के लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर प्रभावी और समयबद्ध तरीके से कार्य करने की आवश्यकता है।

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यह प्रशासनिक कदम जहां जनसुरक्षा के प्रति जिम्मेदारियों को दर्शाता है, वहीं भवनों की स्थिति में सुधार लाने का स्पष्ट संकेत भी है।

सुरक्षा के प्रति जागरूकता और तकनीकी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना न केवल प्रशासन का कर्तव्य है बल्कि यह समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी भी है। जर्जर भवनों की उचित जांच से ही हम संभावित हादसों से बच सकते हैं।

सुविधा और सुरक्षा के इस प्रयास में हमें सभी संबंधित विभागों द्वारा पूर्ण सहयोग की आवश्यकता है।

— टीम द ऑड नारी

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