छोटे बौद्ध अध्ययन विभाग से उभरे बड़े राजनीतिक चेहरे! DUSU चुनाव 2023 में गूंजा नाम
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव में इस बार बौद्ध अध्ययन विभाग की खास मौजूदगी देखने को मिली। छात्रसंघ के केंद्रीय पैनल के चार पदों के लिए मैदान में उतरे 10 उम्मीदवारों में से 7 उम्मीदवार इसी विभाग से जुड़े रहे। इनमें अध्यक्ष पद के दोनों प्रमुख उम्मीदवारों के साथ-साथ उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त […] The post छोटा विभाग, बड़े सियासी चेहरे! DUSU चुनाव में बौद्ध अध्ययन के 7 छात्रों ने मचाई हलचल appeared first on Uttarakhand Broadcast.
छोटे बौद्ध अध्ययन विभाग से उभरे बड़े राजनीतिक चेहरे! DUSU चुनाव 2023 में गूंजा नाम
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव में इस बार बौद्ध अध्ययन विभाग की स्थिति खास रही, जिसकी गूंज पूरे चुनावी माहौल में सुनाई दी। कुल 10 उम्मीदवारों में से 7 उम्मीदवार इसी विभाग से जुड़े हुए थे। इसमें अध्यक्ष के पद के दोनों प्रमुख उम्मीदवारों के अलावा उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों के उम्मीदवार भी शामिल थे।
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर मुकाबला
इस चुनाव में अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास ने 24,576 वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की, जबकि उनके प्रतिद्वंदी NSUI के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। इस प्रकार, बार-बार की तरह इस बार भी बौद्ध अध्ययन से जुड़े उम्मीदवारों ने दिखाया कि चुनावी मैदान में उनका प्रभाव कितना गहरा है।
उपाध्यक्ष पद पर स्वतंत्र उम्मीदवार दीपांशु शोकीन ने 30,615 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। दीपांशु स्वयं बौद्ध अध्ययन विभाग में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इस विभाग के मनोज चौधरी ने 2009 में DUSU अध्यक्ष पद की जीत हासिल की थी, और तब से यह विभाग लगातार मजबूती से चुनावी प्रक्रियाओं में उपस्थित रहा है।
बौद्ध अध्ययन विभाग की विस्तृत उपस्थिति
बौद्ध अध्ययन विभाग की उपस्थिति केवल अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों तक सीमित नहीं थी। सचिव पद के लिए NSUI की नम्रता चुनावी मैदान में उपस्थित थीं, जबकि संयुक्त सचिव के लिए NSUI के गोपाल चौधरी और समाजवादी छात्र सभा के विशेष यादव भी इसी विभाग से जुड़े हुए थे।
पिछले वर्षों की उल्लेखनिय उपलब्धियाँ
2025 में भी बौद्ध अध्ययन से NSUI के उम्मीदवार राहुल झांसला ने उपाध्यक्ष पद जीता था, जबकि करण और दीपिका झा ने सचिव और संयुक्त सचिव पद पर विजय प्राप्त की थी। 2024 में MA के छात्र लोकेश चौधरी ने संयुक्त सचिव के पद पर जीत हासिल की थी और इस क्रम में पिछले वर्षों में लगातार बौद्ध अध्ययन विभाग के छात्रों की उपस्थिति बनी रही।
छात्र राजनीति में बौद्ध अध्ययन का प्रभाव
अब सवाल यह उठता है कि बौद्ध अध्ययन विभाग से इतने चेहरे छात्र राजनीति में क्यों सामने आ रहे हैं? विभाग के प्रमुख प्रोफेसर कामाख्या नारायण तिवारी बताते हैं कि इसका संबंध सीधे तौर पर विभाग के पाठ्यक्रम की प्रकृति और प्रवेश व्यवस्था से हैं।
प्रोफेसर तिवारी के अनुसार, बौद्ध अध्ययन का पाठ्यक्रम विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए खुला है। इस विभाग में करीब 200 सीटें हैं और दाखिला CUET के माध्यम से होता है। छात्रों को बौद्ध साहित्य की पूर्व अध्ययन की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे छात्र विभिन्न पृष्ठभूमियों से आकर इस क्षेत्र में दाखिला ले सकते हैं।
इसके अलावा, विभाग की दोहरी प्रकृति के कारण छात्र राजनीति में भाग लेना भी आसान हो जाता है। राजनीतिक गतिविधियों की स्वतंत्रता छात्रों को अपनी रुचियों के अनुसार गतिविधियों में भाग लेने का अवसर प्रदान करती है। प्रोफेसर तिवारी ने स्पष्ट किया कि पढ़ाई और छात्र राजनीति को अलग-अलग दृष्टि से देखने की आवश्यकता है।
राजनीति और शिक्षा का संतुलन
हालांकि, छात्र संगठनों ने इस पूरे पैटर्न पर विभिन्न राय व्यक्त की हैं। NSUI के सदस्य ने आरोप लगाया कि ABVP उम्मीदवारों की लगातार उपस्थिति राजनीति का इशारा करती है। दूसरी ओर, ABVP सदस्यों ने इस बात का खंडन किया है और कहा है कि चुनाव में सफलता उनकी टीम की मेहनत का परिणाम है, जिसका किसी विशेष संगठन से कोई सीधा संबंध नहीं है।
भागीदारी के अवसर और विभिन्न गतिविधियाँ
अंततः, बौद्ध अध्ययन विभाग की छात्रों की उपलब्धता को समझने के लिए आवश्यक है कि पाठ्यक्रम में व्यापक प्रवेश पात्रता, कक्षा के बाहर उपलब्ध समय और विषय की मूल प्रकृति को ध्यान में रखा जाए। यही कारण है कि यह विभाग दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
कम शब्दों में कहें तो, बौद्ध अध्ययन विभाग ने इस बार DUSU चुनाव में अपनी गहरी छाप छोड़ी है, जो आगे चलकर देखने के लिए एक दिलचस्प परिदृश्य प्रस्तुत करता है। अधिक अपडेट के लिए यहाँ क्लिक करें.
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— Team The Odd Naari, साक्षी शर्मा
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