एमबीबीएस दाखिला फर्जीवाड़ा: 12 सीटें रद्द, देहरादून में दो और गिरफ्तार, 34 पर मुकदमा

देहरादून। नीट-यूजी 2025 में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस दाखिले के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। देहरादून में पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने दो और आरोपितों संजय कुमार और गिरीश सिंह को गिरफ्तार किया है। दोनों पर तीन अभ्यर्थियों के कूटरचित दस्तावेज, आधार कार्ड, मूल निवास और […] The post MBBS दाखिला फर्जीवाड़े पर बड़ा वार, 12 सीटें रद्द; देहरादून में 2 और गिरफ्तार, 34 पर मुकदमा appeared first on Uttarakhand Broadcast.

Sep 29, 2026 - 00:38
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एमबीबीएस दाखिला फर्जीवाड़ा: 12 सीटें रद्द, देहरादून में दो और गिरफ्तार, 34 पर मुकदमा

एमबीबीएस दाखिला फर्जीवाड़ा: 12 सीटें रद्द, देहरादून में दो और गिरफ्तार, 34 पर मुकदमा

देहरादून। नीट-यूजी 2025 में प्रवेश के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चल रहा समाचार काफी गंभीरता से उठ रहा है। देहरादून में पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने संजय कुमार और गिरीश सिंह नाम के दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप लगाया गया है कि इन्होंने तीन अभ्यर्थियों के लिए कूटरचित दस्तावेज, आधार कार्ड और मूल निवास प्रमाणपत्र तैयार करने में मदद की। यह मामला अब तेजी से बढ़ता जा रहा है। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - The Odd Naari

कम शब्दों में कहें तो, एमबीबीएस दाखिले में फर्जीवाड़े की संलिप्तता सामने आई है, जिससे 12 छात्रों के दस्तावेज रद्द हो गए हैं। इसके साथ ही 34 लोगों पर मुकदमा भी दर्ज किया गया है।

वर्तमान में, The Odd Naari के अनुसार, एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने 12 छात्र-छात्राओं का एमबीबीएस सीट आवंटन निरस्त कर दिया है। इससे पहले, इस मामले में तीन सीटों का आवंटन भी रद्द किया जा चुका था। इस प्रकार, नीट-यूजी 2025 के राज्य कोटे में अब तक कुल 15 एमबीबीएस सीटें निरस्त की जा चुकी हैं।

जांच की शुरुआत और गिरफ्तारी

पुलिस के अनुसार, संजय और गिरीश की जांच में सामने आया है कि ये 2007 से एक-दूसरे को जानते थे और इन्होंने स्वाति, परी, और खुशी नाम की कूटरचित दस्तावेज तैयार करने में मदद की। इसकी शुरुआत 13 सितंबर को थाना रायपुर और थाना क्लेमेनटाउन में दर्ज अपराधों से हुई।

जांच के शुरुआती साक्ष्यों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र के लिए किए गए आवेदनों की गड़बड़ी का पता चला। इसके बाद रायपुर में मुकदमा अपराध संख्या 380/26 और क्लेमेनटाउन में मुकदमा अपराध संख्या 86/26 दर्ज हुआ।

विशेष जांच टीम का गठन

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, एसएसपी देहरादून ने जया बलोनी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी ने अस्पतालों के रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच की, जिससे कई पेशेवर धोखाधड़ी और गलत दस्तावेज़ों के मामले सामने आए।

संजय और गिरीश सर्वाधिक एक महत्वपूर्ण कड़ी बनते जा रहे हैं। पूछताछ के बाद इन्हें गिरफ्तार किया गया। अब तक, एसआईटी ने चार अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार किया है, जिसमें रुपेश पंडित, अरविंद कुमार और धीरज कुमार श्रीवास्तव शामिल हैं।

फर्जीवाड़े की गहराई

एफ़एनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने प्रदेश के कई जिलों से प्राप्त प्रमाणपत्र सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर और 12 छात्रों का एमबीबीएस सीट आवंटन रद्द कर दिया है। सीधा आरोप लगाया गया है कि इन छात्रों ने फर्जी स्थायी निवास और जाति प्रमाणपत्रों का उपयोग किया है।

विश्वविद्यालय ने नीट-यूजी काउंसलिंग से संबंधित 778 प्रमाणपत्रों की सत्यापन के लिए जिलों को भेजा था। सत्यापन में फर्जी प्रमाणपत्र पाए जाने पर संबंधित सीटों का आवंटन निरस्त किया गया।

उपाय और कार्रवाई

निरस्त सीटों पर प्रभावी कार्रवाई भी की जा रही है। उदाहरण के लिए, 12 अभ्यर्थियों में अनुराग भोजवाल, दीक्षा कुमारी, और अन्य का नाम शामिल है। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. विजय जुयाल के अनुसार, आगे और भी कार्रवाई की जा सकती है।

इस फर्जीवाड़े में पुलिस और प्रशासनिक कार्यवाही की गंभीरता ने मामले को और उग्र बना दिया, जिसमें ऊधमसिंह नगर जिले में भी फर्जी प्रमाणपत्रों से संबंधित अनेक मामले सामने आए हैं। 28 सितंबर तक, जिले में 30 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं, और 34 आरोपियों की चर्चा हो रही है।

संभावित परिणाम

यह पूरा मामला न केवल छात्रों के लिए बल्कि संबंधित व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करना और उन्हें सही साबित करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अभी कई और केस खुलने की संभावना है, जिससे अगले दौर में और गिरफ्तारी हो सकती है।

इस प्रकार, यह मामला दिखाता है कि एक सुसंगत और मजबूत व्यवस्था से हम धांधली और धोखाधड़ी को हरा सकते हैं, जो केवल शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि समाज में भी नकारात्मक प्रभाव डालती है।

टीम द ओड नारी द्वारा संकलित, आगे की अपडेट्स के लिए साथ बने रहें!

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