UKSSSC पर नई चिंताएँ: परीक्षा किट टेंडर में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

UKSSSC TENDER विवाद: पारदर्शिता पर सवाल, जांच की मांग तेज UKSSSC TENDER: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए परीक्षा किट की आपूर्ति से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह […]

Apr 7, 2026 - 18:38
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UKSSSC पर नई चिंताएँ: परीक्षा किट टेंडर में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
UKSSSC पर नई चिंताएँ: परीक्षा किट टेंडर में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

UKSSSC पर नई चिंताएँ: परीक्षा किट टेंडर में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) को परीक्षा किट टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप झेलना पड़ रहा है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और जांच की मांग तेज हो गई है।

UKSSSC TENDER विवाद: पारदर्शिता पर सवाल, जांच की मांग तेज

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। परीक्षा किट की आपूर्ति से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं, जानकारों ने इस पूरे मामले की गंभीरता को रेखांकित किया है।

मुख्य बिंदु

टेंडर प्रक्रिया और उसके विवाद

जानकारी के मुताबिक, ये टेंडर 15 सितंबर 2025 को UKTENDER पोर्टल के माध्यम से जारी किया गया था। स्कीमेटिक्स माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड के मालिक आदित्य मंगल का कहना है कि शुरुआती चरण में केवल उनकी कंपनी ने ही बिड डाली थी। इसके बाद आयोग द्वारा टेंडर को निरस्त कर दोबारा जारी किया गया। हैरानी की बात यह है कि इस प्रक्रिया को चार बार रद्द कर फिर से खोला गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप

आदित्य मंगल ने आरोप लगाया कि बार-बार टेंडर निरस्त करने के बाद उनकी कंपनी को प्रक्रिया से अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद दिल्ली की एक कंपनी को टेंडर में शामिल कर अंतिम रूप से कार्य आवंटित कर दिया गया। उनका दावा है कि यह सब एक सुनियोजित तरीके से किया गया, ताकि बाहरी कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ कंपनियों को गलत दस्तावेजों के आधार पर क्वालीफाई किया गया और MSME व EMD से जुड़े नियमों की अनदेखी की गई।

कीमत में भारी अंतर, निष्पक्ष जांच की मांग

आदित्य मंगल ने आगे आरोप लगाया कि जिस परीक्षा किट की वास्तविक कीमत करीब 350 रुपये होनी चाहिए थी, उसे कथित रूप से 5000 रुपये तक दिखाया जा रहा है। यह बड़ी लागत बढ़ाने (Cost Inflation) को इशारा करता है। उन्होंने कहा कि शिकायत दर्ज कराने के प्रयासों के बावजूद उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया गया।

मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग

आदित्य मंगल ने शासन से उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच को सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (CVC) या किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपा जाए और दोषी अधिकारियों व संबंधित कंपनियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोग या शासन स्तर पर इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया आती है।

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टीम द ऑड नारी, सविता शर्मा

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