हरेला पर्व पर CIMS एवं UIHMT कॉलेज में रोपण कार्यक्रम, हरियाली और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प

देहरादून। उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के शुभ अवसर पर सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज, देहरादून में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्थान के अध्यक्ष एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने सीआईएमएस कैंपस, कुंआवाला में पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण, हरियाली बढ़ाने और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया। उन्होंने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की […] The post हरेला पर्व पर CIMS & UIHMT ग्रुप ऑफ कॉलेजेज में पौधरोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश appeared first on Uttarakhand Broadcast.

Jul 17, 2026 - 00:38
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हरेला पर्व पर CIMS एवं UIHMT कॉलेज में रोपण कार्यक्रम, हरियाली और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प
हरेला पर्व पर CIMS एवं UIHMT कॉलेज में रोपण कार्यक्रम, हरियाली और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प

हरेला पर्व पर CIMS एवं UIHMT कॉलेज में रोपण कार्यक्रम, हरियाली और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प

कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के मौके पर सीआईएमएस एवं यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज, देहरादून में एक विशेष पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल हरियाली बढ़ाना था बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी प्रसारित करना था।

देहरादून। उत्तराखंड के प्रमुख लोकपर्व हरेला के शुभ अवसर पर सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज ने एक विशेष पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के अध्यक्ष एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने किया, जिन्होंने सीआईएमएस कैंपस, कुंआवाला में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण, हरियाली बढ़ाने और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया।

एडवोकेट जोशी ने उत्तराखंडवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएँ देते हुए कहा, "उत्तराखंड, विशेष रूप से कुमाऊँ क्षेत्र में मनाया जाने वाला हरेला पर्व प्रकृति, हरियाली, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है। यह पर्व हमें पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार बनने की प्रेरणा देता है।"

हरेला पर्व का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

एडवोकेट जोशी ने बताया कि हरेला पर्व से नौ दिन पहले विभिन्न प्रकार के अनाजों को रिंगाल की टोकरी या पत्तों से बनी टोकरियों में बोया जाता है। पौधों की पूरी देखभाल की जाती है और दसवें दिन विधि-विधान से पूजा करके हरेले को कटाई कर देवताओं को अर्पित किया जाता है। बड़े-बुजुर्ग इस समय सुख, समृद्धि और दीर्घायु के लिए परिवार के सदस्यों को आशीर्वाद देते हैं।

पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण का आह्वान

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में पर्यावरण संरक्षण मानव जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। हरेला सिर्फ एक पारंपरिक पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी प्रकृति के प्रति आस्था, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का प्रतीक बन गया है।

जोशी ने सुझाव दिया कि अगर प्रत्येक व्यक्ति इस अवसर पर कम से कम एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो पर्यावरण पर काफी सकारात्मक असर पड़ेगा। यह जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

छात्रों से पौधों की देखभाल का आह्वान

इस कार्यक्रम में, एडवोकेट जोशी ने संस्थान के छात्रों से अपील की कि वे अधिक से अधिक पौधरोपण करें, पौधों की नियमित देखभाल सुनिश्चित करें और पर्यावरण संरक्षण का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाएं। सभी उपस्थित लोगों ने भी पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में रहे मौजूद

यहां ध्यान देने योग्य है कि इस अवसर पर सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के मैनेजिंग डायरेक्टर संजय जोशी, पर्यावरण प्रेमी मनमोहन सिंह, लोक गायक गणेश कांडपाल सहित कॉलेज के शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

आइए, हम सभी मिलकर इस पर्व की रूह को समझें और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में अपना योगदान दें। अधिक अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें

Team The Odd Naari द्वारा, प्रियंका जोशी

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