विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना में मजदूरों का उग्र प्रदर्शन: उपेक्षित सुरक्षा मानक और मुआवजे विवाद
The post विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना में गुस्साए मजदूरों का हंगामा,घेराव appeared first on Avikal Uttarakhand. टीएचडीसी टनल हादसे में आठ मौतों के बाद प्रदर्शन, आपदा मंत्री कौशिक का घेराव सुरक्षा मानकों की अनदेखी प्रस्तावित पांच लाख मुआवजे पर टूटा सब्र का बांध मृतकों के परिजनों को… The post विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना में गुस्साए मजदूरों का हंगामा,घेराव appeared first on Avikal Uttarakhand.
विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना में मजदूरों का उग्र प्रदर्शन: उपेक्षित सुरक्षा मानक और मुआवजे विवाद
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कम शब्दों में कहें तो, विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते मजदूरों में आक्रोश पनप गया है, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने प्रदर्शन किया और स्थानीय आपदा मंत्री का घेराव किया।
आंदोलन की जड़ें
चमोली में विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टनल में हाल में हुए हादसे के बाद, स्थानीय मजदूरों की नाराजगी शुक्रवार को उग्र प्रदर्शन में बदल गई। 13 अगस्त को टनल में पानी और मलबा भरने से आठ मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि दो मजदूर अब भी लापता हैं। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने परियोजना स्थल पर एकत्र होकर सरकार और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।
मृतकों के परिवारों को प्रस्तावित पांच लाख रुपये मुआवजे की राशि को अपर्याप्त बताते हुए प्रदर्शनकारियों ने 1 करोड़ रुपये मुआवजे की और पीड़ित परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की। उनके अनुसार, यह राशि ऐसे संवेदनशील मामले में पूरी तरह से असंतोषजनक है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी का मामला
मजदूरों और स्थानीय लोगों ने इस दौरान सुरक्षा मानकों के प्रति परियोजना प्रबंधन की लापरवाही पर गहरा सवाल उठाया। उनका कहना था कि सुरंग में काम कर रहे श्रमिक हमेशा जोखिम में रहते हैं और ऐसे में कड़े सुरक्षा मानकों का पालन किया जाना अनिवार्य है। प्रदर्शनकारियों ने एक निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि हादसे के कारणों का पता लगाया जा सके।
आंदोलन के दौरान आपदा मंत्री मदन कौशिक का घेराव किया गया, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों की मांगें सुनने के लिए उनकी बातों को गंभीरता से लिया।

टीएचडीसी का पत्र और विवाद
टीएचडीसी द्वारा मृतकों के परिवारों को पांच लाख रुपये मुआवजे का प्रस्ताव एक बड़ा विवाद बन गया। स्थानीय सामुदायिक नेताओं ने आरोप लगाया कि यह राशि मृतकों के परिवारों की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए अपर्याप्त है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जल विद्युत परियोजना से रोजगार और विकास की संभावनाएं हैं, लेकिन मजदूरों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने मजदूरों की बातें सुनीं और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
कांग्रेस का विरोध
विपक्षी पार्टी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने भी टीएचडीसी और राज्य सरकार से उचित मुआवजे की मांग की और सुरक्षा मानकों की जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, क्षेत्र में जल विद्युत परियोजनाओं से जुड़े भारी डंपिंग जोन भी इस प्रकार की दुर्घटनाओं में योगदान कर रहे हैं।
स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि प्राकृतिक झरनों का पानी पूर्व निर्धारित मार्ग से मुड़ने के परिणामस्वरूप सुरंग के आसपास जल भराव बढ़ रहा है, जो इस दुर्घटना का मुख्य कारण बताया जा रहा है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री धामी ने घटना के तुरंत बाद घायलों से मिलने का आश्वासन दिया था, परंतु स्थानीय लोगों की मांगें अभी भी सुनवाई का इंतज़ार कर रही हैं।
हादसे से जुड़े सवालों का समाधान न होने तक यह मामला तूल पकड़ता रहेगा। इससे न केवल मजदूरों की सुरक्षा बल्कि सामुदायिक जनजीवन और क्षेत्र के विकास पर भी प्रभाव पड़ेगा।
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— दियां रावत, Team The Odd Naari
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