रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ: भारत पर बढ़ता अमेरिकी दबाव
भारत पर बढ़ सकता है अमेरिकी दबाव वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान करने वाले कानून को मंजूरी दे दी है। इस कानून के लागू होने से रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदने वाले देशों में भारत […]
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ: भारत पर बढ़ता अमेरिकी दबाव
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कम शब्दों में कहें तो, अमेरिका ने रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान किया है, जिससे भारतीय सरकार को नए व्यापारिक और ऊर्जा संबंधों की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिका का नया कानून
वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान करने वाले एक नए कानून को मंजूरी दे दी है। इस कानून के अंतर्गत भारत जैसे देश, जो रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदते हैं, पर दबाव बढ़ सकता है। इस संबंध में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।
इस कानून को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ कहा गया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने इस विधेयक को 262 वोट के समर्थन और 159 वोट के विरोध के साथ पारित किया था। इससे पहले, अगस्त में अमेरिकी सीनेट ने इसे 86-11 के वोट से स्वीकृति दी थी।
भारत समेत अन्य देश भी सूची में शामिल
कानून के तहत उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है, जो रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहे हैं। वर्तमान में, भारतीय सरकार के अलावा चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान भी इस सूची में शामिल हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय हर 180 दिनों में इस सूची की समीक्षा करेगा, जिससे संभावित परिस्थितियों में बदलाव संभव है।
यह ध्यान देने योग्य है कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रूस से आयात कर रहा है, ऐसे में यह प्रस्तावित टैरिफ भारत के व्यापार और ऊर्जा आयात पर गहरा असर डाल सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद आयात में वृद्धि
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ा दिया। युद्ध से पहले तक इस आयात में रूस की हिस्सेदारी कम थी, लेकिन सस्ते रूसी कच्चे तेल के चलते, 2022-23 में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया।
इसके चलते, रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात कई गुना बढ़ा, और कुछ अवधियों में यह रोजाना करीब 16 से 20 लाख बैरल तक पहुंच गया। इससे भारत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो गया।
चुनौतियों के बीच कई विकल्प मौजूद
भारत केवल रूस पर निर्भर नहीं है। इसके अलावा, भारत इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर से भी कच्चा तेल खरीदता है। साथ ही, नाइजीरिया, अंगोला, ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों से भी कच्चे तेल का आयात होता है। हालांकि, रूसी कच्चे तेल की मात्रा और कीमत भारतीय रिफाइनिंग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है।
भारत का राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की प्रक्रिया के बीच, भारतीय सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के साथ समझौता नहीं करेगी। नए अमेरिकी कानून के पश्चात, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार तथा ऊर्जा संबंधों पर बातचीत और महत्वपूर्ण हो सकती है।
इस आर्टिकल में चर्चा की गई चुनौतियों के बीच, भारत को सस्ते और उपलब्ध कच्चे तेल की आवश्यकता महसूस होती है, जो अमेरिका के दबाव के चलते कठिनाइयों का सामना कर सकता है।
भारत की सरकार ने इस प्रेस वार्ता में राष्ट्रीय हितों को संरक्षण के महत्व और अमेरिका के साथ संवाद को प्राथमिकता दी है। अधिक जानकारी के लिए, कृपया [The Odd Naari](https://theoddnaari.com) पर जाएं।
— टीम द ओड नारी, साक्षी कुमारी
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