रचनात्मकता की नई उड़ान: मैस्कॉट डिज़ाइन एवं स्लोगन प्रतियोगिता में विजेता सम्मानित
The post मैस्कॉट डिज़ाइन एवं स्लोगन प्रतियोगिता के विजेता सम्मानित appeared first on Avikal Uttarakhand. एमडीडीए की नई पहचान को मिली रचनात्मक उड़ान मैस्कॉट प्रतियोगिता में स्नेहा भण्डारी ने प्रथम, अनुराग रमोला को द्वितीय, अंकिता बिष्ट को तृतीय पुरस्कार, स्लोगन प्रतियोगिता में अंकित सिंह रावत… The post मैस्कॉट डिज़ाइन एवं स्लोगन प्रतियोगिता के विजेता सम्मानित appeared first on Avikal Uttarakhand.
रचनात्मकता की नई उड़ान: मैस्कॉट डिज़ाइन एवं स्लोगन प्रतियोगिता में विजेता सम्मानित
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कम शब्दों में कहें तो, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अपनी पहचान को लोगों की रचनात्मकता से जोड़ते हुए मैस्कॉट डिज़ाइन एवं स्लोगन प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया। इस में स्नेहा भण्डारी ने प्रथम, अनुराग रमोला ने द्वितीय, और अंकिता बिष्ट ने तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया। स्लोगन प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार अंकित सिंह रावत को मिला।
देहरादून।
किसी संस्था की पहचान इसके कार्यों और योजनाओं से नहीं, बल्कि उसके पीछे की सोच और जुड़ाव से बनती है। इसी सोच को यथार्थ में उतारते हुए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अपने पहले मैस्कॉट डिज़ाइन एवं स्लोगन प्रतियोगिता का आयोजन किया। इस प्रतियोगिता के विजेताओं को बुधवार को एमडीडीए कार्यालय में आयोजित समारोह में सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर संयुक्त सचिव गौरव चटवाल और वित्त नियंत्रक संजीव कुमार सहित अन्य अधिकारी और प्रतिविदियों की उपस्थिति रही। विजेताओं को पुरस्कार राशि और प्रशस्ति-पत्र देकर उनकी प्रतिभा का सम्मान किया गया।
पहचान गढ़ने का मौका जनता को मिला
एमडीडीए ने 3 अगस्त से 16 अगस्त तक इस प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य सिर्फ एक प्रतीक या स्लोगन की पहचान करना नहीं, बल्कि प्राधिकरण की सोच और भविष्य की दिशा को रचनात्मक अभिव्यक्ति देना था। यह पहला अवसर था जब आम लोगों और युवाओं को अपनी कल्पना के माध्यम से प्राधिकरण की पहचान का हिस्सा बनने का मौका मिला।
प्रतियोगिता में प्राप्त प्रविष्टियों ने यह साबित कर दिया कि किसी संस्था से जुड़ाव केवल उसके कार्यों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जब लोग अपनी सोच व्यक्त करते हैं, तब वही जुड़ाव एक नई पहचान का रूप ले लेता है। इस तरह से चयनित प्रतिभागियों को उनका योगदान देने वाले रूप में पहचान मिली।
स्नेहा भण्डारी की मैस्कॉट और अंकित का अव्वल स्लोगन
मैस्कॉट प्रतियोगिता में स्नेहा भण्डारी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया और उन्हें 50,000 रुपये एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। अनुराग रमोला को द्वितीय पुरस्कार के रूप में 30,000 रुपये, और अंकिता बिष्ट को तृतीय पुरस्कार के लिए 15,000 रुपये दिए गए। स्लोगन प्रतियोगिता में अंकित सिंह रावत ने प्रथम पुरस्कार जीता और उन्हें 10,000 रुपये एवं प्रशस्ति-पत्र से सम्मानित किया गया।
यह पहल इस बात का संकेत है कि किसी संस्था की पहचान उसके कार्यों के साथ-साथ उसकी सोच और समाज से उसके जुड़ाव से भी बनती है। मैस्कॉट और स्लोगन जैसे प्रतीक संस्था के विजन और मूल्यों को सरल लेकिन प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाने में सहायक होते हैं।
सोच से पहचान तक का सफर
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि प्रतियोगिता में प्रस्तुत की गई रचनात्मकता इस बात का प्रमाण है कि लोगों में एमडीडीए को लेकर अपनी कल्पना और विचार हैं। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की कोशिश रहेगी कि विकास के साथ-साथ जनभागीदारी और नवाचार को आगे बढ़ाया जाए। प्रतियोगिता में शामिल सभी प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की गई।
इस समारोह ने यह भी संदेश दिया कि जब किसी संस्था की पहचान बनाने की प्रक्रिया में समाज की कल्पना शामिल होती है, तो वह पहचान केवल एक प्रतीक नहीं बल्कि लोगों से जुड़ी एक कहानी बन जाती है।
इस आयोजन के माध्यम से एमडीडीए ने नई पहचान के लिए एक रचनात्मक आधार तैयार किया है। इसके साथ, यह भी दिखाता है कि जब समुदाय को अपने विचार व्यक्त करने का अवसर मिलता है, तो वे स्वाभाविक रूप से उस संस्था के साथ जुड़ते हैं।
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सादर,
टीम द ओड नारी (वैष्णवी)
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