मलेशिया और भारत के बीच संस्कृत-रामायण संबंधों पर महत्वपूर्ण चर्चा
The post मलेशिया के साथ संस्कृत-रामायण संबंधों पर भी चर्चा appeared first on Avikal Uttarakhand. यज्ञ से ‘सेवा संकल्प अभियान’ का शुभारंभ अविकल उत्तराखण्ड देहरादून। उत्तराखंड में संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्कृत एवं सांस्कृतिक संबंधों… The post मलेशिया के साथ संस्कृत-रामायण संबंधों पर भी चर्चा appeared first on Avikal Uttarakhand.
मलेशिया और भारत के बीच संस्कृत-रामायण संबंधों पर महत्वपूर्ण चर्चा
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में संस्कृत भाषा और रामायण के संबंधों को मजबूत करने के लिए मलेशिया उच्चायोग में महत्वपूर्ण बैठक हुई है।
देहरादून। हाल ही में उत्तराखंड में संस्कृत भाषा को प्रोत्साहित करने और भारत-मलेशिया सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने हरिद्वार में आयोजित यज्ञ के साथ ‘सेवा संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने मलेशिया के अधिकारियों से संस्कृत और रामायण के सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर चर्चा की।
हरिद्वार में यज्ञ करते समय, दीपक कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि यह समय भारतीय संस्कृति को व्यापक स्तर पर फैलाने का है और संस्कृत के छात्रों को अपनी क्षमता और महत्व का एहसास कराने का।
कार्यक्रम में प्रो. विनय विद्यालंकार ने वेदों और यज्ञ की पुरानी परंपराओं के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को ध्यान में रखते हुए, भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। सिद्धार्थ राजीव गुप्ता, जो रूस से आए थे, ने भी भारतीय संस्कृति के बढ़ते सम्मान के विषय में चर्चा की।
संस्कृत भाषा और संस्कृत भाषियों की भूमिका भारत के सशक्त निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है। समारोह में अन्य उपस्थित व्यक्तियों में नगर मजिस्ट्रेट हरिगिरि, संस्कृत शिक्षा के उपनिदेशक डॉ. वाजश्रवा आर्य और अन्य गणमान्य लोग शामिल थे।
मलेशिया के साथ संस्कृत-रामायण पर सहयोग की पहल
नई दिल्ली में दीपक कुमार ने मलेशिया के चार्ज डी’अफेयर्स शरीफा एज्नीदा वफा से भेंट की। बैठक में भारत और मलेशिया के बीच संस्कृत को द्वितीय राजभाषा के रूप में बढ़ावा देने के लिए चार अति महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई।
दीपक कुमार ने मलेशिया के विश्वविद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थानों के साथ सहयोग हेतु एक व्यापक योजना प्रस्तुत की। इस योजना में रामायण और संस्कृत के माध्यम से द्वीपक्षीय सांस्कृतिक संबंधों को मजबूती देने के लिए कई पहलों को शामिल किया गया है, जैसे कि विश्वविद्यालयों के बीच छात्र और प्रोफेसर का आदान-प्रदान, और वाल्मीकि रामायण एवं ‘हिकायत सेरी रामा’ का तुलनात्मक अध्ययन।
बैठक में मलेशिया में भारतीय प्रवासी समुदाय की भूमिका की भी चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन का प्रस्ताव रखा गया।
मलेशियाई उच्चायोग की अधिकारी ने इस प्रस्ताव को सराहते हुए भारतीय विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने उत्तराखंड के चारधामों और संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा मिलने पर भी खुशी व्यक्त की।
बैठक में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. अरविंद नारायण मिश्र और मलेशियाई उच्चायोग के फर्स्ट सेक्रेटरी अहमद रादजी मोहम्मद जिम भी शामिल रहे।
इस बैठक और चर्चाओं से स्पष्ट होता है कि भारत और मलेशिया के बीच सांस्कृतिक और भाषाई संबंधों को और भी मजबूत किए जाने की संभावनाएँ हैं, जो दोनों देशों की साझी विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती हैं।
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सादर,
टीम द ओड नारी
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