बैंकों की 7000 करोड़ की वसूली: जानिए कैसे हो रही है ग्राहकों की जेब काटने की प्रक्रिया
नई दिल्ली। देश के करोड़ों बैंक ग्राहकों के लिए एक अहम जानकारी सामने आई है। संसद में केंद्र सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान निजी क्षेत्र के बैंकों ने न्यूनतम बैलेंस (Minimum Balance) नहीं रखने वाले ग्राहकों से करीब 4,948.71 करोड़ रुपये की वसूली की। वहीं सार्वजनिक और […]
बैंकों की 7000 करोड़ की वसूली: जानिए कैसे हो रही है ग्राहकों की जेब काटने की प्रक्रिया
नई दिल्ली। देश के करोड़ों बैंक ग्राहकों के लिए एक अहम जानकारी सामने आई है। संसद में केंद्र सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान निजी बैंकें न्यूनतम बैलेंस (Minimum Balance) न रखने वाले ग्राहकों से करीब 4,948.71 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। वहीं, सार्वजनिक और निजी बैंकों की मिलाकर यह राशि लगभग 7,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इन आंकड़ों ने एक बार फिर बैंकिंग शुल्क और ग्राहकों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर नई बहस छेड़ दी है। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - The Odd Naari
न्यूनतम बैलेंस शुल्क की बढ़ती समस्या
इस बात पर सबसे अधिक चर्चा हो रही है कि निजी क्षेत्र के बड़े बैंकों ने न्यूनतम बैलेंस के नियम के तहत सबसे ज्यादा शुल्क वसूला। संसद में दिए गए जवाब के अनुसार, एचडीएफसी बैंक इस सूची में पहले स्थान पर रहा, जबकि एक्सिस बैंक दूसरे नंबर पर है।
न्यूनतम बैलेंस का मतलब क्या है?
अधिकांश बैंक अपने बचत खातों में एक निश्चित राशि बनाए रखने की शर्त रखते हैं, जिसे Minimum Average Balance (MAB) कहा जाता है। यदि किसी ग्राहक के खाते में निर्धारित औसत राशि से कम बैलेंस रहता है, तो बैंक उसके खाते से पेनाल्टी या सेवा शुल्क काट लेते हैं।
हालांकि, यह नियम सभी खातों पर लागू नहीं होता। विशेष रूप से प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) के तहत खोले गए खातों को इस नियम से छूट दी गई है।
एचडीएफसी बैंक का आंकड़ा सबसे ऊंचा
संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में:
- एचडीएफसी बैंक ने न्यूनतम बैलेंस शुल्क के रूप में 1,798.14 करोड़ रुपये वसूले।
- एक्सिस बैंक ने 1,081.33 करोड़ रुपये की वसूली की।
इन दोनों बैंकों ने मिलकर निजी क्षेत्र के बैंकों द्वारा वसूले गए कुल शुल्क का लगभग 58 प्रतिशत हिस्सा अकेले वसूल किया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि न्यूनतम बैलेंस से जुड़े शुल्क में कुछ बड़े निजी बैंकों की हिस्सेदारी काफी अधिक रही है।
निजी बैंकों की कुल वसूली
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, निजी क्षेत्र के 19 बैंकों ने मिलकर न्यूनतम बैलेंस शुल्क के रूप में लगभग 4,948.71 करोड़ रुपये ग्राहकों से वसूले। यदि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा वसूले गए शुल्क को भी इसमें जोड़ दिया जाए तो कुल राशि लगभग 7,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। यही वजह है कि यह मामला आम ग्राहकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
जनधन खाताधारकों को राहत
सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री जनधन योजना के खातों से न्यूनतम बैलेंस के नाम पर कोई शुल्क नहीं लिया गया। जनधन खाते जीरो बैलेंस पर भी संचालित किए जा सकते हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के करोड़ों खाताधारकों को राहत मिलती है।
बैंक क्यों काटते हैं ये शुल्क?
बैंकों का तर्क है कि बचत खाते का संचालन, डिजिटल सेवाएं, एटीएम, शाखा संचालन और अन्य सुविधाओं पर खर्च आता है। इसलिए खातों में न्यूनतम औसत बैलेंस बनाए रखने की शर्त रखी जाती है। यदि ग्राहक इस शर्त का पालन नहीं करता है तो निर्धारित नियमों के अनुसार पेनाल्टी ली जाती है।
ग्राहकों को क्या करना चाहिए?
यदि ग्राहक अपने खाते से इस प्रकार की कटौती से बचना चाहते हैं तो उन्हें अपने बैंक की न्यूनतम बैलेंस संबंधी शर्तों की जानकारी रखनी चाहिए। इसके अलावा:
- खाते का औसत बैलेंस बनाए रखें।
- अगर नियमित रूप से न्यूनतम राशि रखना संभव नहीं है तो जीरो बैलेंस या बेसिक सेविंग्स अकाउंट के विकल्प के बारे में बैंक से जानकारी लें।
- बैंक द्वारा भेजे गए एसएमएस और ई-मेल अलर्ट पर ध्यान दें।
- किसी भी अनधिकृत कटौती की स्थिति में बैंक शाखा या ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क करें।
बैंकिंग शुल्क पर बहस
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते दौर में न्यूनतम बैलेंस पर भारी शुल्क वसूलने की व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। दूसरी ओर, बैंकों का कहना है कि खाते के संचालन और सेवाओं की लागत को देखते हुए यह शुल्क बैंकिंग व्यवस्था का हिस्सा है।
संसद में सामने आए ताजा आंकड़ों ने एक बार फिर इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि बैंक अपनी शुल्क नीति में कोई बदलाव करते हैं या नहीं और क्या ग्राहकों को इस मामले में और राहत मिलती है।
कम शब्दों में कहें तो, बैंकिंग शुल्कों पर यह नया खुलासा ग्राहक हितों और उनकी जेब पर गंभीर प्रश्न उठाता है। अधिक जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक करें.
सादर, टीम द ऑड नारी - प्रियंका शर्मा
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