बंगाल SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दी सुनवाई की नई तारीख, क्या मतदान होगा प्रभावित?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद नामों को लेकर आपत्तियों और दावों की सुनवाई के लिए विशेष अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं। लेकिन बड़ी संख्या में मामले लंबित रहने के कारण प्रक्रिया की गति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त की शुरुआत तक करीब 38 लाख अपीलों में से केवल…
बंगाल SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट का तत्काल सुनवाई से इनकार
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कम शब्दों में कहें तो, पश्चिम बंगाल के मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। मामले की सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी, जबकि मतदान 6 अक्टूबर को निर्धारित है।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के SIR को लेकर चल रहा विवाद नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले अदालत तक पहुंच गया। हालाँकि, शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई को तत्काल आगे बढ़ाने से मना कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने चार अक्टूबर के लिए सुनवाई निर्धारित की है, जो मतदान के एक दिन पहले होगी। इससे उन मतदाताओं की चिंताएँ बढ़ गई हैं जिनके नाम मतदाता सूची से हट चुके हैं और जिनकी बहाली के लिए अपील लंबित हैं।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का हाल
सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत याचिकाकर्ताओं ने जल्द सुनवाई की मांग की थी। उनके अनुसार, विशेष अपीलीय ट्रिब्यूनल के समक्ष बड़ी संख्या में अपीलें लंबित हैं और प्रभावित मतदाताओं को पिछले चुनाव में मतदान का अवसर नहीं मिल पाया। अदालत ने कहा कि उक्त मतदाता अपना मत डालने में सक्षम हो सकें, इसके लिए यह जरूरी है कि सुनवाई का निर्णय शीघ्र हो।
चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में SIR से संबंधित लगभग 38.20 लाख अपीलें दायर हुई हैं। इनमें से मात्र 1.02 लाख मामलों का निपटारा हुआ है। यह चिंता का विषय है कि इतनी बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं, निर्भरता के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है।
राजनीतिक दलों के बहस
नंदीग्राम और रेजीनगर क्षेत्र के उपचुनाव में मतदाता सूची से संबंधित बड़े विवाद हैं। दोनों क्षेत्रों में मतदाता नाम हटाने या जोड़ने के मामलों की बड़ी संख्या में अपीलें दर्ज की गई हैं। कांग्रेस पार्टी ने इस विरुद्ध चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और कहा कि यदि प्राधिकृत मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं, तो उन्हें नाम बहाल करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। इसी मुद्दे के माध्यम से कांग्रेस ने मतदाता के अधिकारों की सुरक्षा की बात भी कही है।
इस बीच, भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट के रुख का हवाला देते हुए इसे राजनीतिक विवाद का मुद्दा बनाने पर आपत्ति जताई है। उनके अनुसार, जब अदालत ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की, तो इसको लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा करना तर्कसंगत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके बाद की संभावनाएँ
सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रबंधित विशेष अपीलीय ट्रिब्यूनल ने समीक्षा प्रक्रिया की शुरुआत की है। लेकिन लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए संभावित रूप से मतदान प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त के प्रारंभ तक करीब 38 लाख अपीलों में से केवल लगभग 2 प्रतिशत मामलों का निपटारा हुआ था। इस पर सबकी नजरें 5 अक्टूबर के सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रेजीनगर और नंदीग्राम के उपचुनाव में मतदान सही तरीके से होगा या नहीं। हालांकि, अदालती निर्णय के बाद स्थिति क्या होगी, यह अभी से कहना मुश्किल है। मतदान के लिए निर्धारित तिथि 6 अक्टूबर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। For more updates, visit The Odd Naari.
Team The Odd Naari - प्रियंका शर्मा
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