देहरादून में मातृ मृत्यु दर पर सख्त कदम, DM ने की कार्रवाई

देहरादून। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर अंकुश लगाने को लेकर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सख्त रुख अपनाया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मातृ मृत्यु, शिशु मृत्यु और राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान डीएम ने अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर […] The post मातृ मृत्यु के 12 मामलों ने बढ़ाई चिंता, देहरादून DM ने कसा शिकंजा; लापरवाही पर ANM निलंबित appeared first on Uttarakhand Broadcast.

Oct 1, 2026 - 00:38
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देहरादून में मातृ मृत्यु दर पर सख्त कदम, DM ने की कार्रवाई

देहरादून में मातृ मृत्यु के 12 मामलों ने बढ़ाई चिंता, DM ने नियामक कार्रवाई की

देहरादून। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर अंकुश लगाने के लिए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सख्त रुख अपनाया है। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - The Odd Naari

कम शब्दों में कहें तो, जिलाधिकारी ने मातृ मृत्यु मामलों की समीक्षा करते हुए पूरी स्थिति का गहन विश्लेषण किया और प्रभावी कदम उठाने का निर्णय लिया। प्रमुख रूप से हालिया आंकड़ों के आधार पर, उन्होंने जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का आदेश दिया।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मातृ मृत्यु, शिशु मृत्यु और राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान, DM ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे पिछले पांच वर्षों के डेटा का उपयोग करके जियो-इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) मैपिंग के माध्यम से जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करें।

टास्क फोर्स का गठन और नियमित निगरानी

जिलाधिकारी ने मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए एक टास्क फोर्स के गठन का आदेश दिया। यह टास्क फोर्स गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और निगरानी पर ध्यान केंद्रित करेगा। डॉ. चौहान ने कहा, "जो कार्य योजना तैयार की जाएगी, उसका असर वास्तविकता में दिखाई देना चाहिए।" उन्होंने स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।

मामलों की गंभीरता और अनियमितताएँ

2026 में प्रसव के दौरान या कुछ समय बाद हुई 12 मातृ मृत्यु के मामलों की गहन समीक्षा की गई। यह पाया गया कि प्रेमनगर में रुखसाना की मृत्यु के संबंध में दिए गए अधिकारियों के स्पष्टीकरण में विरोधाभास थे। जिलाधिकारी ने इस मामले के संबंध में विभागीय लापरवाही के आधार पर एएनएम को निलंबित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने सख्त शब्दों में कहा, "आम जनता की जिंदगी के साथ कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।" गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए उपाय भी सुझाए गए, जिनमें प्रसव से पहले अस्पताल में भर्ती कराने और जरूरी जांच करवाने का ध्यान रखना शामिल है।

टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा

बैठक के दौरान राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा भी की गई। DM ने जनसंख्या के अनुपात में टीबी जांच की कमी पर नाराजगी जताई। उन्होंने निजी क्षेत्र को भी अभियान में शामिल करने का निर्देश दिया ताकि अधिक से अधिक लोग जांच के दायरे में आ सकें।

वर्तमान स्वास्थ्य संकेतक

जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य संकेतकों की समीक्षा करते हुए बताया कि देहरादून का मातृ मृत्यु अनुपात 31.0 है, जो उत्तराखंड और राष्ट्रीय स्तर पर काफी बेहतर है। लेकिन जन्म के समय का लिंगानुपात, जो 924.4 है, देहरादून के लिए अभी भी समस्या बनी हुई है। यह संख्या राज्य और राष्ट्रीय औसत से कम है।

बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एमके शर्मा, गायनी विशेषज्ञ डॉ. ज्योति शर्मा, चिकित्सक और स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में उठाए गए इन कदमों की बारीकी से जांच की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से विश्वास हासिल किया जा सके।

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सच्चाई को उजागर करने के लिए उठाए गए कदमों से लगता है कि देहरादून में स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से सुधार हो सकता है, लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि सभी अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से निभाना चाहिए।

टीम द ऑड नारी - प्रियंका शर्मा

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