देहरादून में प्रशासन ने नशे के खिलाफ दिखाया बड़ा जौहर, 208 मुकदमे दर्ज, 237 आरोपी हुए जेल

Dehradun News: राजधानी देहरादून में नशे के बढ़ते नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए जिला प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। 2026 में अब तक NDPS Act के तहत 208 मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जबकि 237 अभियुक्तों को जेल भेजा गया है। बिना पंजीकरण चल रहे नशामुक्ति केंद्रों पर भी प्रशासन ने सख्ती […] The post देहरादून में नशे के खिलाफ प्रशासन का बड़ा एक्शन, 208 मुकदमे दर्ज; 237 आरोपी पहुंचे जेल appeared first on Uttarakhand Broadcast.

Sep 3, 2026 - 09:38
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देहरादून में प्रशासन ने नशे के खिलाफ दिखाया बड़ा जौहर, 208 मुकदमे दर्ज, 237 आरोपी हुए जेल

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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में नशे के खिलाफ जिला प्रशासन ने कड़ा एक्शन लिया है। 2026 में अब तक NDPS अधिनियम के तहत 208 मुकदमे दर्ज किए गए हैं और 237 आरोपी जेल भेजे गए हैं।

देहरादून। राजधानी देहरादून के नशे के बढ़ते नेटवर्क पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने अपने प्रयासों को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री के नशामुक्त उत्तराखंड अभियान को सफल बनाने के लिए, प्रशासन ने ड्रग्स के खिलाफ अपनी कार्रवाई को सख्त करने के लिए समुचित निगरानी प्रणाली विकसित की है। जिला स्तरीय Narcotics Coordination Committee की समीक्षात्मक बैठक में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने नशे की सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए कठोर कदम उठाने का निर्देश दिया।

बिना पंजीकरण नशामुक्ति केंद्रों पर होगी सख्ती

बैठक के दौरान मोथरोवाला क्षेत्र में बिना पंजीकरण चल रहे नशामुक्ति केंद्रों की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी ने उनका तत्काल सीज करने का आदेश दिया। उपजिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्रों में संचालित नशामुक्ति केंद्रों का नियमित निरीक्षण करें।

यह महत्वपूर्ण है कि बिना पंजीकरण और निर्धारित मानकों का पालन किए गए केंद्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

नशामुक्ति केंद्रों की निगरानी के लिए Online Dashboard

स्थिति को और प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन एक Online Dashboard विकसित करेगा। इसका उपयोग सभी नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्रों की गतिविधियों की निगरानी के लिए किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को इस व्यवस्था पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं।

कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में निरीक्षण

जिलाधिकारी ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में औचक निरीक्षण को बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत संदेहास्पद मामलों की पहचान के लिए रैंडम सैंपलिंग भी की जाएगी।

छात्रों से Anti-Drug E-Pledge भरवाने और नियमित Anti-Drug Awareness Workshops आयोजित करने का भी निर्देश दिया गया है, जिसका उद्देश है कि युवा वर्ग में नशे के प्रति जागरूकता फैलाई जा सके।

Drug Hotspots की पहचान GIS Mapping से

पुलिस विभाग को नशे से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान के लिए GIS Based Analysis करने का निर्देश दिया गया है। यह आवश्यक होगा कि अधिकारी इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करें।

मेडिकल स्टोरों पर भी कड़ी नजर

इसके अलावा, नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री रोकने के लिए मेडिकल स्टोरों की नियमित जांच करनी होगी। CCTV Cameras, Drug Register, तथा Stock Register की निगरानी भी की जाएगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले अवैध उत्पादन और धूम्रपान पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

CCTV निगरानी में वृद्धि

जिलाधिकारी ने छात्रावासों, PG Accommodation, और कोचिंग संस्थानों पर CCTV निगरानी को बढ़ाने का निर्देश भी दिया है। साथ ही नशे के खिलाफ शिकायत पहुंचाने के लिए Anti-Drug Helpline 1933 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है।

मुकदमों और अभियुक्तों का आंकड़ा

बैठक में पुलिस विभाग ने जानकारी दी कि 2026 में NDPS Act के तहत 208 मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 237 अभियुक्त जेल भेजे गए।

इसी प्रकार, 40 अभियुक्तों के खिलाफ धारा 29 के तहत कार्रवाई की गई और चार अभियुक्तों के खिलाफ धारा 27A के तहत कानूनी कदम उठाए गए।

औषधि विभाग की कार्रवाई

औषधि विभाग ने जुलाई 2026 तक 58 औचक निरीक्षण किए, जिसमें से 15 मामलों में ड्रग्स के नमूने लिए गए। नकली या मिलावटी दवाओं के निर्माण से जुड़ी चार FIR भी दर्ज की गई हैं।

गणना केंद्र का प्रस्ताव

75 बेड के Government De-addiction Centre के निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इसके लिए 775.09 लाख रुपये की DPR शासन को भेजी गई है। सरकार ने पहले चरण की सहायता के रूप में 132 लाख रुपये जारी किए हैं।

नशामुक्ति की दिशा में प्रशासन का फोकस

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नशामुक्त उत्तराखंड के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्रवाई के साथ-साथ नशे की डिमांड को भी कम करना आवश्यक है। युवाओं में जागरूकता बढ़ाने और नशामुक्ति केंद्रों की निगरानी को प्राथमिकता दी जाएगी।

जिलाधिकारी की इस बैठक में कई अन्य अधिकारी भी शामिल रहे, जिनमें अपर जिलाधिकारी स्मृता परमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एम.के. शर्मा आदि शामिल हैं।

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सादर, टीम द ओड नारी

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