देहरादून की सांस्कृतिक धरोहर फिर से जिंदा! ‘दून बासमती’ का पुनर्जीवन

देहरादून। कभी अपनी अनोखी सुगंध, स्वाद और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध रही दून बासमती (Doon Basmati) अब एक बार फिर उत्तराखंड के खेतों में लौटती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संकल्प, जिला प्रशासन की पहल और किसानों की मेहनत से दून बासमती के पुनर्जीवन अभियान को नई […] The post विलुप्ति की कगार से लौटी देहरादून की शान! फिर महकेगी दुनिया में मशहूर ‘दून बासमती appeared first on Uttarakhand Broadcast.

Jul 27, 2026 - 00:38
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देहरादून की सांस्कृतिक धरोहर फिर से जिंदा! ‘दून बासमती’ का पुनर्जीवन
देहरादून की सांस्कृतिक धरोहर फिर से जिंदा! ‘दून बासमती’ का पुनर्जीवन

देहरादून की सांस्कृतिक धरोहर फिर से जिंदा! ‘दून बासमती’ का पुनर्जीवन

कम शब्दों में कहें तो, देहरादून की प्रसिद्ध दून बासमती एक बार फिर से उत्तराखंड के खेतों में लौटती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों, जिला प्रशासन की योजनाओं और किसानों की मेहनत से दून बासमती के पुनर्जीवन अभियान को नई सफलता मिल रही है। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - The Odd Naari

देहरादून। हमेशा से अपनी अनोखी सुगंध, उत्कृष्ट स्वाद और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए मशहूर रही दून बासमती अब एक बार फिर से हमारे खेतों में लहराने लगी है। यह विशेष धान की प्रजाति न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व में अपनी पहचान बनाई थी। अब, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दृढ़ संकल्प, जिला प्रशासन की पहल और मेहनती किसानों की कोशिशों से यह बासमती चावल पुनर्जीवित हो रहा है।

75 हेक्टेयर में 160 किसान कर रहे हैं दून बासमती की खेती

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि दून बासमती के संरक्षण और संवर्धन के लिए जिला प्रशासन निरंतर प्रयास कर रहा है। पिछले वर्ष सफल ट्रायल के बाद अब इस वर्ष दून बासमती की खेती का क्षेत्र बढ़ाकर 75 हेक्टेयर कर दिया गया है, जिसमें लगभग 160 किसान शामिल हैं। सहसपुर, विकासनगर के साथ अब रायपुर और डोईवाला के किसान भी इस पारंपरिक फसल की खेती के लिए उत्साहित हैं।

2025 का ट्रायल रहा सफल, किसानों को मिला बेहतर दाम

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह के अनुसार वर्ष 2025 में करीब 65 हेक्टेयर क्षेत्र में 100 से अधिक किसानों ने दून बासमती की खेती की थी। इस परियोजना के तहत किसानों से 200 क्विंटल दून बासमती धान ₹65 प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा गया था, जिससे किसान अपने खातों में 13 लाख रुपये से अधिक की राशि प्राप्त कर चुके हैं।

विकासनगर में बनेगा सीड बैंक और टेस्टिंग लैब

दून बासमती की गुणवत्ता और संरक्षण के लिए विकासनगर में एक सीड बैंक स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही, दून बासमती की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच के लिए एक टेस्टिंग सुविधा भी विकसित की जाएगी, ताकि किसानों को प्रमाणित बीज एवं बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा सके।

550 हेक्टेयर से घटकर रह गई थी खेती

मुख्य कृषि अधिकारी देवेंद्र सिंह के अनुसार, एक समय दून बासमती की खेती लगभग 550 हेक्टेयर में होती थी, लेकिन विभिन्न कारणों की वजह से यह घटकर 150 से 200 हेक्टेयर तक सीमित रह गई। अब जिला प्रशासन, कृषि विभाग और ग्रामोत्थान के संयुक्त प्रयासों से इसकी खेती को पुनः बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।

किसानों को मिल रहा प्रशासन का पूरा सहयोग

हरबर्टपुर के किसान सूर्य प्रकाश बहुगुणा ने बताया कि जिला प्रशासन और कृषि विभाग किसानों को हर स्तर पर सहयोग कर रहे हैं। उनके क्षेत्र के 25 से 30 किसान इस अभियान में शामिल हैं, और वे आगे बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं।

बीज से ब्रांडिंग तक होगी पूरी व्यवस्था

जिला प्रशासन दून बासमती के संरक्षण के लिए केवल खेती को बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम कर रहा है:

  • गुणवत्तापूर्ण बीज संरक्षण
  • वैज्ञानिक टेस्टिंग
  • किसानों से सीधी खरीद
  • बेहतर मार्केटिंग
  • राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग

यह सभी प्रयास एक साथ मिलकर किसानों की आय को बढ़ाने और देहरादून की पारंपरिक कृषि विरासत को संरक्षित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

दून बासमती केवल एक फसल नहीं, बल्कि देहरादून की पहचान और कृषि विरासत है। वर्ष 2025 के सफल ट्रायल और 2026 में बढ़े हुए खेती के क्षेत्र ने यह आशा जगाई है कि आने वाले वर्षों में दून बासमती एक बार फिर से देश और दुनिया में अपनी विशिष्ट सुगंध और गुणवत्ता के लिए नई पहचान बनाएगी।

अधिक जानकारी के लिए विजिट करें: theoddnaari.com

सादर, टीम द ओड नारी (सुमित्रा कुमारी)

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