दून महायोजना: जनता की भागीदारी से भविष्य का निर्माण
The post दून महायोजना- भविष्य को आकार देने उमड़ रही जनता appeared first on Avikal Uttarakhand. दूसरे चरण की सुनवाई में कई आपत्तियां और सुझाव दर्ज शहर के सुनियोजित विकास के लिए नागरिकों, सामाजिक संगठनों और कॉलोनीवासियों ने रखे अहम प्रस्ताव अविकल उत्तराखंड देहरादून। राजधानी के… The post दून महायोजना- भविष्य को आकार देने उमड़ रही जनता appeared first on Avikal Uttarakhand.
दून महायोजना: जनता की भागीदारी से भविष्य का निर्माण
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून महायोजना-2041 के दूसरे चरण की सुनवाई में नागरिकों, सामाजिक संगठनों और कॉलोनीवासियों ने महत्वपूर्ण सुझाव और आपत्तियां दर्ज की हैं।
देहरादून इस समय एक महत्वपूर्ण योजना के तहत आगे बढ़ रहा है, जिसका नाम है 'देहरादून महायोजना-2041'। यह योजना शहर के सुनियोजित विकास को सुनिश्चित करने के लिए मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) द्वारा तैयार की जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य इसे अधिक व्यावहारिक और जनोन्मुख बनाना है। इसका दूसरा चरण 28 जुलाई से शुरू हुआ है और अब तक इसे नागरिकों से काफी सकारात्मक प्रतिसाद मिला है।
दूसरे चरण की सुनवाई और नागरिकों की भागीदारी
मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी की दिशा में, जनसुनवाई अभियान जारी है। ये सुनवाई शहर की विकास योजनाओं के प्रति नागरिकों की अपेक्षाओं को समझने का एक महत्वपूर्ण मंच है। पहले दिन की तरह, दूसरे दिन भी काफी संख्या में नागरिक, सामाजिक संगठन, कॉलोनी वेलफेयर एसोसिएशन और व्यापारिक प्रतिनिधि उपस्थित हुए।
दूसरे दिन में, लगभग 28 सुझाव और आपत्तियां प्राप्त हुईं। इनमें सड़क नेटवर्क, यातायात प्रबंधन, सार्वजनिक सुविधाएं, पार्किंग, हरित क्षेत्रों का संरक्षण, जल निकासी व्यवस्था और आवासीय और व्यावसायिक विकास जैसे मुद्दे शामिल थे।
महायोजना का विकास: एक सामूहिक प्रयास
प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि महायोजना-2041 केवल एक विकासात्मक दस्तावेज नहीं बल्कि देहरादून की आगामी विकास यात्रा का चौड़ा रोडमैप है। इसे अंतिम रूप देने से पहले प्रत्येक हितधारकों की राय को गम्भीरता से लिया जाएगा। सभी सलाह और आपत्तियां विशेषज्ञों और तकनीकी अधिकारियों द्वारा गहराई से जांची जाएंगी, ताकि जो सुझाव जनहित में होंगे, उन्हें योजना में शामिल किया जा सके।
MDDA ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी महायोजना की सफलता तभी संभव है जब लोकल जरूरतों का समुचित समावेश हो। इसी को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने पहले चरण के बाद नागरिकों की सुविधा के लिए दूसरे चरण की सुनवाई का आयोजन किया है, जिससे कोई भी व्यक्ति अपनी राय रखने से न चूके।
भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप एक соврем योजना
प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि नागरिकों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करना और उनकी आवाज को सुनना अत्यंत आवश्यक है। सभी प्राप्त सुझावों को विशेषज्ञ समिति के समक्ष पेश किया जाएगा और तकनीकी परीक्षण के पश्चात उपयुक्त सुझावों को अंतिम प्रारूप में सामिल किया जाएगा। MDDA का उद्देश्य देहरादून को एक सुव्यवस्थित, पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक शहरी सुविधाओं से युक्त शहर बनाना है।
जनसहभागिता: महायोजना की मुख्य ताकत
बंशीधर तिवारी ने कहा, "दून महायोजना के निर्माण में जनता की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। हमारा लक्ष्य केवल विकास का खाका तैयार करना नहीं है, बल्कि ऐसा विजन डॉक्यूमेंट बनाना है जो शहर की वर्तमान जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करे।"
सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा, "हमारी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी सुझावों को विधिवत अभिलेखित किया जा रहा है। प्रत्येक सुझाव का तकनीकी और नियमानुकूल परीक्षण किया जाएगा।"
इस प्रकार, देहरादून महायोजना-2041 एक जनभागीदारी और समन्वित शहरी नियोजन का आदर्श दस्तावेज बनने की दिशा में बढ़ रहा है।
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सादर, टीम द ओड नारी
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