दिव्यांगजनों के लिए एक नई शुरुआत: 12 मामलों में मिली कानूनी संरक्षकता, अब बैंकिंग और पेंशन में होगी आसानी
देहरादून, दिव्यांगजनों के सामाजिक, आर्थिक और न्यायिक सशक्तीकरण की दिशा में देहरादून जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिनव शाह की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में समाज कल्याण विभाग द्वारा जिला स्तरीय समिति एवं स्थानीय स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में […] The post दिव्यांगजनों के लिए बड़ी खुशखबरी! 12 मामलों में मिली कानूनी संरक्षकता, बैंकिंग और पेंशन का रास्ता हुआ आसान appeared first on Uttarakhand Broadcast.
दिव्यांगजनों के लिए एक नई शुरुआत: 12 मामलों में मिली कानूनी संरक्षकता, अब बैंकिंग और पेंशन में होगी आसानी
देहरादून, दिव्यांगजनों के सामाजिक, आर्थिक और न्यायिक सशक्तीकरण की दिशा में देहरादून जिला प्रशासन ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिनव शाह की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में समाज कल्याण विभाग द्वारा जिला स्तरीय समिति एवं स्थानीय स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 एवं राष्ट्रीय न्यास अधिनियम-1999 के तहत प्राप्त आवेदन पर विचार करते हुए 12 मामलों में विधिक संरक्षकता एवं सीमित संरक्षकता प्रदान करने का निर्णय लिया गया।
कम शब्दों में कहें तो, यह निर्णय दिव्यांगजनों के जीवन में एक नई रौशनी लेकर आया है, जिससे उनकी बैंकिंग एवं पेंशन से जुड़ी आवश्यकताएं पूरी करना आसान हो जाएगा।
8 मामलों में विधिक अभिभावक, 4 मामलों में सीमित संरक्षकता
बैठक में ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, बौद्धिक दिव्यांगता तथा बहु-दिव्यांगता से प्रभावित व्यक्तियों के ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों की समीक्षा की गई। स्थानीय स्तरीय समिति ने 08 मामलों में विधिक अभिभावक नियुक्त करने का निर्णय लिया, जबकि दिव्यांगजन अधिकार नियमावली-2019 के तहत गठित जिला स्तरीय समिति ने 04 मामलों में सीमित संरक्षकता प्रदान करने का निर्णय लिया।
बैंकिंग और कानूनी कार्यों में मिलेगी बड़ी सुविधा
अब जिन दिव्यांगजनों के लिए स्वयं कानूनी या वित्तीय निर्णय लेना संभव नहीं है, उन्हें विधिक अभिभावक या सीमित संरक्षक के माध्यम से निम्नलिखित कार्यों में सहायता मिलेगी:
- बैंक खाता संचालित करने,
- बैंकिंग संबंधी आवश्यक कार्य कराने,
- विभिन्न सरकारी एवं कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने,
- अन्य वैधानिक दस्तावेजों से जुड़े कार्यों को संपन्न कराने में।
पारिवारिक पेंशन पाने का रास्ता हुआ आसान
बैठक में यह भी बताया गया कि जिन दिव्यांगजनों के माता-पिता सरकारी सेवा में थे और उनके निधन के बाद पारिवारिक पेंशन प्राप्त करने में कानूनी बाधाएं आ रही थीं, वे अब विधिक अभिभावक या सीमित संरक्षक के माध्यम से पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह निर्णय दिव्यांगजन समुदाय को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा और उन्हें आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने में मदद करेगा।
जागरूकता बढ़ाने के दिए निर्देश
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि विधिक संरक्षकता एवं सीमित संरक्षकता से जुड़े प्रावधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि दिव्यांगजन एवं उनके परिवार इन सुविधाओं का सही उपयोग कर सकें।
बैठक में रहे मौजूद
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एम.के. शर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, जिला शासकीय अधिवक्ता, और दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न स्वैच्छिक संस्थाओं के गैर-सरकारी सदस्य तथा समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम जैसे कानूनों की सहायता से सरकार अपने नागरिकों को समानता और स्वतंत्रता देने की दिशा में अगर ऐसे कदम उठाती है, तो यह न केवल न्यायिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने में भी मददगार साबित होगा। आगे बढ़ते हुए, हमें इस बात की प्रेरणा लेनी चाहिए कि कैसे हम दिव्यांगजनों के लिए ऐसे फैसलों को जनसामान्य तक पहुँचाएँ, ताकि प्रत्येक दिव्यांगजन स्वयं को सशक्त महसूस करे।
दिव्यांगजनों की सुरक्षा और कानून का सही उपयोग एक ऐसी सामाजिक जिम्मेदारी है, जिससे हम सभी को जुड़ना चाहिए। उनके अधिकारों की सुरक्षा करने के लिए, समाज का हर सदस्य इस दिशा में अपने हिस्से का योगदान दे सकता है।
इस नई पहल ने न केवल दिव्यांगजनों के जीवन को सरल बनाया है, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी एक सहारा प्रदान किया है। ऐसा कदम निस्संदेह समाज में समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
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सादर,
टीम द ओड नारी, अनुश्री कुमारी
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