ग्राम प्रधानों ने सचिवालय कूच किया, बैरिकेडिंग तोड़कर धरना दिया
The post प्रधानों का सचिवालय कूच, बैरिकेडिंग तोड़कर सड़क पर धरना appeared first on Avikal Uttarakhand. ग्राम प्रधानों का शक्ति प्रदर्शन, पुलिस से झड़प मानदेय बढ़ाने समेत दस सूत्रीय मांग अविकल उत्तराखंड देहरादून। मानदेय में बढ़ोतरी समेत दस सूत्री मांगों को लेकर प्रदेश भर के ग्राम… The post प्रधानों का सचिवालय कूच, बैरिकेडिंग तोड़कर सड़क पर धरना appeared first on Avikal Uttarakhand.
ग्राम प्रधानों ने सचिवालय कूच किया, बैरिकेडिंग तोड़कर धरना दिया
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कम शब्दों में कहें तो, ग्राम प्रधानों ने अपने मानदेय बढ़ाने और अन्य मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
देहरादून। उत्तराखंड के ग्राम प्रधानों ने गुरुवार को अपनी मांगों को लेकर सचिवालय की ओर कूच किया। इस दौरान पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग लगाए जाने पर कई प्रधानों ने बैरिकेडिंग को तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिसके परिणामस्वरूप उनकी पुलिस से धक्का-मुक्की हुई। इस प्रदर्शन के अंतर्गत, प्रधानों ने मानदेय में वृद्धि के साथ-साथ दस सूत्रीय मांगों का कठोर विरोध किया।
इस प्रदर्शन का आयोजन प्रदेश ग्राम प्रधान संगठन के बैनर तले किया गया। परेड ग्राउंड से शुरू होकर, प्रधानों ने सचिवालय की ओर बढ़ते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उनके द्वारा मुख्य मांगों में मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि, ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार देने, प्रशासनिक उत्पीड़न को रोकने, और विकास कार्यों के विकेंद्रीकरण की मांग शामिल थी।
सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए, पुलिस ने सचिवालय के मार्ग पर बैरिकेडिंग लगाई। प्रधानों ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेडिंग को पार करने का प्रयास किया, जिसके कारण उनकी और पुलिस की बीच में नोकझोंक हुई। अंततः प्रदर्शनकारी वहीं सड़क पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ धरना शुरू कर दिया।
प्रदेश ग्राम प्रधान संगठन की अध्यक्ष योगिता कैंतुरा ने बताया कि सरकार लंबे समय से ग्राम प्रधानों की मांगों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने ग्राम प्रधानों का मानदेय बढ़ाने और ग्राम पंचायतों को कार्यों के लिए अधिक धन आवंटित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यकारी अध्यक्ष प्रकाश मेहरा ने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री या सक्षम स्तर से उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिल जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि वीबीजी रामजी योजना में हाजिरी को ऑफलाइन किया जाए और राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त की धनराशि जनसंख्या के आधार पर आवंटित की जाए।
ग्राम प्रधानों के इस प्रदर्शन के कारण राजधानी में यातायात व्यवस्था पर भारी प्रभाव पड़ा, जिससे कई क्षेत्रों में जाम लग गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर अपनी मांगों के बारे में शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध किया।
ग्राम प्रधानों का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि जब तक उनकी सभी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे। इस स्थिति में सरकार को भी उनकी चिंताओं का समाधान करने की आवश्यकता है, ताकि संतुलन बना रहे और विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम बढ़ाया जा सके।
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स्रोत: The Odd Naari
सादर, टीम द ओड नारी
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