खेल विभाग के पोर्टल में बड़ा विवाद! 3.50 लाख खिलाड़ियों के डाटा चोरी का खतरा

Uttarakhand News : राष्ट्रीय खेलों के दौरान खेल विभाग ने पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार करने की जिम्मेदारी खेब टेक स्ट्राटेजी प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी थी। इन पोर्टल और ऐप को आगे आईटीडीए के सर्वर पर अपलोड किया जाना था। हालांकि, इससे पहले ही कंपनी की ओर से यूजर आईडी, पासवर्ड समेत अन्य लॉगिन संबंधी […]

Sep 11, 2026 - 09:38
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खेल विभाग के पोर्टल में बड़ा विवाद! 3.50 लाख खिलाड़ियों के डाटा चोरी का खतरा

खेल विभाग के पोर्टल में बड़ा विवाद! 3.50 लाख खिलाड़ियों के डाटा चोरी का खतरा

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों के दौरान खेल विभाग द्वारा तैयार किए गए पोर्टल और मोबाइल ऐप में 3.50 लाख खिलाड़ियों के डाटा चोरी होने का खतरा बढ़ गया है। इसके पीछे जिम्मेदार कंपनी खेब टेक स्ट्राटेजी प्राइवेट लिमिटेड की ओर से लॉगिन जानकारी में बदलाव की कार्यवाही की गई है।

उत्तराखंड की The Odd Naari रिपोर्ट के अनुसार, खेल विभाग ने राष्ट्रीय खेलों के दौरान पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार करने की जिम्मेदारी खेब टेक स्ट्राटेजी प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी थी। इन सभी सुविधाओं को आईटीडीए के सर्वर पर अपलोड किया जाना था। हालाँकि, इस प्रक्रिया से पहले ही कंपनी द्वारा यूजर आईडी, पासवर्ड और अन्य लॉगिन संबंधी जानकारी में बदलाव करने की खबरें सामने आई हैं।

3.50 लाख खिलाड़ियों के डाटा हुआ चोरी?

खेल विभाग के सूत्रों का कहना है कि कंपनी के पास करीब 3.5 लाख खिलाड़ियों का महत्वपूर्ण डाटा मौजूद है। इस डाटा के संभावित चोरी होने और इसके दुरुपयोग की आशंका ने खिलाड़ियों और उनके परिवारों में चिंता बढ़ा दी है। ऐसी स्थिति में यह प्रश्न उठता है कि क्या इस डाटा को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं?

3.50 लाख खिलाड़ियों ने योजना के लिए किया था आवेदन

गौरतलब है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक सितंबर को सीएम चैंपियंस ट्रॉफी का उद्घाटन किया था, जिसके लिए 3.5 लाख खिलाड़ियों ने आवेदन किया था। इसके साथ ही मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ियों को उन्नति देने वाली खेल छात्रवृत्ति योजना से संबंधित जानकारी भी कंपनी के पास है।

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3,900 खिलाड़ियों को दी थी 11.25 करोड़ की छात्रवृत्ति

पिछले वर्ष की छात्रवृत्ति योजना के तहत लगभग 3,900 खिलाड़ियों को 11.25 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई थी। इस बार भी नए खिलाड़ियों का डाटा पोर्टल पर अपडेट किया गया था। इस प्रकार की योजनाओं में उच्च सुरक्षा की आवश्यकता होती है, जिससे खिलाड़ियों की जानकारी सुरक्षित रह सके।

इस समाचार के प्रकाश में, खिलाड़ियों की जानकारी एक निजी कंपनी के पास होना और संबंधित लॉगिन विवरण भी बदले जाने की सूचना मिलना काफी चिंताजनक है। यदि इस डाटा को लीक किया जाता है या इसका दुरुपयोग होता है, तो यह खिलाड़ियों को गंभीर समस्याओं में डाल सकता है।

इस मामले में खिलाड़ियों, उनके परिवारों और संबंधित अधिकारियों ने स्पष्टता और प्रारंभक कार्रवाई की मांग की है। यह आवश्यक है कि इस स्थिति का सही समाधान निकाला जाए ताकि खिलाड़ियों का विश्वास टूटे नहीं। खिलाड़ी और उनके माता-पिता सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और इसलिए उचित कदम उठाना बहुत जरूरी है।

इस विवाद ने यह स्पष्ट किया है कि खेल विभाग के पोर्टल की सुरक्षा को सुनिश्चित करना अब पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह न केवल खिलाड़ियों के लिए बल्कि खेल विभाग की रक्षात्मकता के लिए भी एक बड़ा संकट बन सकता है।

इस डेटा चोरी के खतरे ने प्रौद्योगिकी और खेल के बीच के संबंध को फिर से अनुमानित करने की आवश्यकता को बढ़ा दिया है। सभी संबंधित पक्षों को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालने की जरूरत है, जिससे भविष्य में ऐसे घटनाओं को रोका जा सके।

टिप्स: हमेशा अपनी ऑनलाइन जानकारी और लॉगिन डिटेल्स को सुरक्षित रखें, और किसी भी संदिग्ध गतिविधी के बारे में सतर्क रहें।

संक्षेप में, खिलाड़ी इस समय असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और अब यह जिम्मेदारी खेल विभाग पर है कि वह उन्हें सही जानकारी और सुरक्षा प्रदान करे।

Team The Odd Naari

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