कश्मीर की सियासत में उठा नया तूफान, महबूबा मुफ्ती ने कहा- राज्य का दर्जा पर्याप्त नहीं

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले कश्मीर की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी केवल राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग तक सीमित […]

Jul 18, 2026 - 18:38
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कश्मीर की सियासत में उठा नया तूफान, महबूबा मुफ्ती ने कहा- राज्य का दर्जा पर्याप्त नहीं
कश्मीर की सियासत में उठा नया तूफान, महबूबा मुफ्ती ने कहा- राज्य का दर्जा पर्याप्त नहीं

कश्मीर की सियासत में उठा नया तूफान, महबूबा मुफ्ती ने कहा- राज्य का दर्जा पर्याप्त नहीं

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले कश्मीर की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ आ गया है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी केवल राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग तक सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने कहा है कि यदि विरोध प्रदर्शन में अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक बंदियों की रिहाई को भी प्राथमिकता दी जाती है, तभी उनकी पार्टी इसमें शामिल होगी।

कम शब्दों में कहें तो, महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कश्मीर की राजनीति में केवल राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग किसी भी तरह से पर्याप्त नहीं है।

महबूबा मुफ्ती ने एक्स पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने इस मुद्दे पर गहन चर्चा की है। उनका मानना है कि केवल राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठाना जम्मू-कश्मीर के व्यापक संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई को सीमित कर देगा। उन्होंने सुझाव दिया कि केवल राज्य का दर्जा बहाल करना न सिर्फ जनहित में है, बल्कि यह समय की मांग भी नहीं है।

इसके अतिरिक्त, पीडीपी प्रमुख का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों का मुद्दा सिर्फ राज्य का दर्जा नहीं है, बल्कि उन संवैधानिक अधिकारों से भी जुड़ा है जिन्हें 5 अगस्त 2019 को समाप्त कर दिया गया था। उनके अनुसार, यदि विरोध प्रदर्शन में इन संवैधानिक मुद्दों को शामिल नहीं किया गया, तो इससे यह संकेत मिलेगा कि अन्य संवैधानिक प्रश्न अब महत्त्वहीन हो गए हैं। इसलिए, उनकी पार्टी की प्राथमिकता संविधान के तहत मिले अधिकारों की बहाली है, और उसी की आधार पर वे अपने राजनीतिक कदम उठाएंगी।

महबूबा ने नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को प्रदर्शन का निमंत्रण देने के लिए धन्यवाद दिया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान स्वरूप में किए जाने वाले इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होना पीडीपी के लिए उचित नहीं होगा। उनका मानना है कि यदि प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य केवल राज्य का दर्जा बहाल कराना है, तो यह उनकी पार्टी के राजनीतिक एजेंडे और जनता से किए गए वादों के अनुरूप नहीं होगा।

वहीं, कांग्रेस ने भी जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर अपनी स्थिति को स्पष्ट किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा का कहना है कि कांग्रेस लंबे समय से “स्टेटहुड प्लस” का समर्थन करती आई है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के लिए केवल राज्य का दर्जा बहाल करना संतोषजनक नहीं है। पार्टी का मानना है कि इसके साथ-साथ भूमि और सरकारी नौकरियों से जुड़े अधिकारों के लिए भी संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले आए इन बयानों ने विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक रणनीति पर चर्चा को नया मोड़ दिया है। वहीं, जहां नेशनल कॉन्फ्रेंस राज्य का दर्जा बहाल करने को एक महत्वपूर्ण मुद्दा मान रही है, वहीं पीडीपी अनुच्छेद 370 और राजनीतिक बंदियों के मुद्दों को भी समान महत्व देने की मांग कर रही है। कांग्रेस का “स्टेटहुड प्लस” रुख भी इस बहस को नया आयाम दे रहा है।

ऐसे में, यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी विरोध प्रदर्शन केवल राज्य के दर्जे तक सीमित रहेगा या उसका दायरा और भी व्यापक होगा। इस नैतिक दुविधा को लेकर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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सादर, टीम द ओड नारी (संगीता सिंह)

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