एकता नगर में भारतीय कारीगरों की कला का प्रदर्शन, वोकल फॉर लोकल को मिला बढ़ावा

भारत पर्व 2026 में CCIC की भागीदारी भारतीय हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योग को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे स्थानीय उत्पादों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाने और पारंपरिक कला को व्यावसायिक अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

Oct 31, 2026 - 18:38
 112  4.7k
एकता नगर में भारतीय कारीगरों की कला का प्रदर्शन, वोकल फॉर लोकल को मिला बढ़ावा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अक्टूबर 2026 को गुजरात के केवड़िया स्थित एकता नगर में आयोजित भारत पर्व 2026 के दौरान सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CCIC) के पवेलियन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भारत की पारंपरिक हथकरघा और हस्तशिल्प विरासत को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी का अवलोकन किया। वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले इस सरकारी निगम ने अपने पवेलियन के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों के कारीगरों और बुनकरों की कला, हुनर और रचनात्मकता को प्रदर्शित किया।
प्रधानमंत्री का यह दौरा CCIC के लिए महत्वपूर्ण अवसर रहा। निगम ने इस आयोजन के जरिए भारतीय पारंपरिक शिल्प को प्रोत्साहित करने, स्थानीय कारीगरों को बाजार से जोड़ने और उनके उत्पादों को देश-विदेश तक पहुंचाने के प्रयासों को सामने रखा। पवेलियन में भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े हस्तनिर्मित उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। इन उत्पादों के माध्यम से भारतीय कला और शिल्प की विविधता के साथ पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक कारीगरी की झलक देखने को मिली।

CCIC का मुख्य उद्देश्य देश के कारीगरों और बुनकरों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना तथा उनकी आजीविका को मजबूत बनाने के लिए अवसर पैदा करना है। निगम विभिन्न पहलों के माध्यम से पारंपरिक उत्पादों को नए ग्राहकों तक पहुंचाने का काम कर रहा है। भारत पर्व में लगाए गए पवेलियन में भी इसी प्रयास को प्रमुखता से दर्शाया गया। यहां आने वाले लोगों को यह समझने का अवसर मिल रहा है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में किस तरह पारंपरिक तकनीकों और स्थानीय संसाधनों की मदद से आकर्षक हस्तशिल्प तैयार किए जाते हैं। इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू केंद्र सरकार के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल से ग्लोबल’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना है।

इसके तहत स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें बड़े घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया जा रहा है। इससे कारीगरों को अपने उत्पादों की पहचान बढ़ाने और आय के नए अवसर हासिल करने में मदद मिल सकती है। CCIC के पवेलियन में गुजरात के स्थानीय कारीगरों की कला भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। यहां एगेट यानी सुलेमानी पत्थर और अन्य अर्ध-कीमती पत्थरों से तैयार की गई कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया। इसके अलावा जटिल एप्लिक वर्क के जरिए तैयार की गई पारंपरिक कलाकृतियों ने भी भारतीय हस्तशिल्प की बारीकियों को सामने रखा। इन उत्पादों में स्थानीय कारीगरों की मेहनत, तकनीकी दक्षता और रचनात्मक सोच की झलक दिखाई देती है।

प्रदर्शनी में केवल गुजरात ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से आए कारीगरों और बुनकरों के उत्पाद भी शामिल हैं। हथकरघा से तैयार कपड़े, पारंपरिक सजावटी सामान और अलग-अलग क्षेत्रों की विशिष्ट शिल्प कलाएं भारतीय संस्कृति की विविधता को प्रदर्शित करती हैं। प्रत्येक उत्पाद के पीछे स्थानीय परंपरा, पारिवारिक कौशल और वर्षों का अनुभव जुड़ा हुआ है। ऐसे आयोजनों से इन कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और पारंपरिक शिल्प को जीवित रखने में मदद मिलती है। इस अवसर पर CCIC के प्रबंध निदेशक बिमल गोपालाचारी सहित निगम के अधिकारी, कारीगर और बुनकर भी मौजूद रहे। उन्होंने पवेलियन के माध्यम से निगम की गतिविधियों और कारीगरों को सशक्त बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को प्रस्तुत किया।

कारीगरों की प्रत्यक्ष भागीदारी से प्रदर्शनी को विशेष महत्व मिला, क्योंकि यहां लोगों को पारंपरिक उत्पादों के साथ उन्हें तैयार करने वाले हुनरमंद लोगों से भी जुड़ने का अवसर मिल रहा है। भारत पर्व 2026 में CCIC की भागीदारी भारतीय हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योग को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे स्थानीय उत्पादों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाने और पारंपरिक कला को व्यावसायिक अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। गुजरात के केवड़िया स्थित एकता नगर में आयोजित यह प्रदर्शनी 15 नवंबर 2026 तक आम लोगों और पर्यटकों के लिए खुली रहेगी। ऐसे में यहां आने वाले आगंतुक देश की विविध हस्तशिल्प परंपराओं को करीब से देख सकेंगे। साथ ही उन्हें स्थानीय कारीगरों और बुनकरों के हुनर को समझने तथा स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने का अवसर भी मिलेगा। इस आयोजन के जरिए भारतीय कला, संस्कृति और पारंपरिक कारीगरी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का संदेश दिया जा रहा है।

 

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow