उत्तराखंड में ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ नागरिक अभियान शुरू
The post बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के विरुद्ध नागरिक अभियान का शुभारंभ appeared first on Avikal Uttarakhand. उत्तराखंड अगेंस्ट नॉइज़ पॉल्यूशन की शुरुआत अविकल उत्तराखंड देहरादून। शनिवार को स्थानीय नागरिकों, सेवानिवृत्त सैन्य एवं सिविल अधिकारियों तथा पर्यावरण के प्रति चिंतित नागरिकों ने मिलकर उत्तराखंड अगेंस्ट नॉइज़ पॉल्यूशन… The post बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के विरुद्ध नागरिक अभियान का शुभारंभ appeared first on Avikal Uttarakhand.
उत्तराखंड में ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ नागरिक अभियान शुरू
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ एक नई नागरिक मुहिम की शुरुआत हुई है।
देहरादून में शनिवार को स्थानीय नागरिकों, सेवानिवृत्त सैन्य और सिविल अधिकारियों और पर्यावरण के प्रति सजग नागरिकों ने मिलकर "उत्तराखंड अगेंस्ट नॉइज़ पॉल्यूशन" मुहिम की शुरुआत की। यह एक नागरिक समूह है, जिसका उद्देश्य उत्तराखंड में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण की गंभीरता को समझाना और इसे रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाना है। यह मुहिम होटलों, रिसॉर्ट्स, रेस्तरां, पबों और अन्य आयोजनों से बढ़ते ध्वनि प्रदूषण की समस्या के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित है।
आंदोलन के उद्देश्य
अनूप नौटियाल, इस मुहिम के प्रमोटर ने बताया कि इस अभियान के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं:
- जन जागरूकता बढ़ाना: ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता फैलाना और एक राज्यव्यापी नागरिक आंदोलन खड़ा करना।
- प्रेरित करना: होटल, रिसॉर्ट्स, शादी समारोह स्थलों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को स्वेच्छा से ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए प्रेरित करना।
- कानून का पालन सुनिश्चित करना: संबंधित सरकारी एजेंसियों से ध्वनि प्रदूषण नियमों का प्रभावी अनुपालन कराने की मांग करना।
स्थानीय नागरिकों की समस्याएं
मेजर जनरल अतुल रावत (सेवानिवृत्त) ने बताया कि उन्हें अपने घर में शांति बनाए रखने के लिए लगभग दो लाख रुपये खर्च करने पड़े क्योंकि आस-पास के रेस्तरां और पबों से आने वाले तेज शोर ने उनके जीवन को कठिन बना दिया है। उन्होंने कहा कि यह हालात उनके माता-पिता के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं।
लेफ्टिनेंट कर्नल करुणा थपलियाल (सेवानिवृत्त) के अनुसार, ध्वनि प्रदूषण के कारण उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा। उन्होंने कहा कि उनकी शिकायतों का कोई असर नहीं हुआ और वे उत्पीड़न का सामना कर रहे थे।
84 वर्षीय धर्म सिंह रावत ने बताया कि उनके क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण के कारण स्थानीय लोगों का स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है और यह जगह अब रहने लायक नहीं रही।
स्वास्थ्य पर प्रभाव
ध्वनि प्रदूषण से प्रभावित कई नागरिकों ने अपनी परेशानियों का उल्लेख किया। विनेश रावत ने बताया कि देर रात तक तेज संगीत और आतिशबाज़ी के कारण उनके छोटे बच्चे सो नहीं पाते। सुल्तान सिंह और पंकज रावत ने भी अपने अनुभव साझा किए, जिसमें उन्होंने बताया कि तेज शोर के कारण घर में सामान्य बातचीत करना भी मुश्किल हो जाता है।
नितिन अहलावत ने ध्वनि प्रदूषण के पारिस्थितिकी प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मालसी वन क्षेत्र में पक्षियों की संख्या में गिरावट आ रही है, जिसका कारण होटलों की नजदीकी है।
आगे का रास्ता
कार्यक्रम के अंत में, अनूप नौटियाल, आलोक लाल और जगमोहन मेंदीरत्ता ने सभी नागरिकों से इस अभियान से जुड़ने और अपने शहरों में स्थानीय चैप्टर स्थापित करने की अपील की। उत्तराखंड अगेंस्ट नॉइज़ पॉल्यूशन ने यह स्पष्ट किया कि यह अभियान एक दीर्घकालिक राज्यव्यापी जन-अभियान का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य उत्तराखंड को एक शांत, स्वस्थ और रहने योग्य जगह बनाना है।
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साभार, टीम द ओड नारी
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