उत्तरकाशी के कालिंदी ट्रैक पर फंसे 29 ट्रैकर्स का सफल रेस्क्यू, हर्षिल पहुंचाए गए
UTTARKASHI: उत्तरकाशी के कालिंदी ट्रैक स्थित ओडिनकॉल क्षेत्र में फंसे ट्रैकर्स का रेस्क्यू अभियान सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। ओडिनकॉल क्षेत्र से कुल 29 ट्रैकर्स को हेलीकॉप्टर के माध्यम से रेस्क्यू कर हर्षिल पहुंचाया गया। इसके अलावा गंगोत्री नेशनल पार्क के गोमुख-तपोवन ट्रैक पर भारी बर्फबारी के बीच फंसे 121 ट्रैकरों को वन विभाग […] The post कालिंदी ट्रैक पर फंसे 29 ट्रैकर्स का रेस्क्यू पूरा, हेली के जरिए पहुंचाया गया हर्षिल appeared first on Devbhoomi Dialogue.
उत्तरकाशी के कालिंदी ट्रैक पर फंसे 29 ट्रैकर्स का सफल रेस्क्यू अभियान
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तरकाशी के कालिंदी ट्रैक पर फंसे 29 ट्रैकर्स का रेस्क्यू अभियान सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह अभियान हाल ही में भारी बर्फबारी के चलते शुरू किया गया था।
कालिंदी ट्रैक पर संकट और रेस्क्यू की तैयारियाँ
उत्तरकाशी के कालिंदी ट्रैक स्थित ओडिनकॉल क्षेत्र में फंसे 29 ट्रैकर्स को सुरक्षित निकालने के लिए प्रशासन और बचाव दल ने एक सफल रेस्क्यू अभियान चलाया। इन ट्रैकर्स को हेलीकॉप्टर के माध्यम से सुरक्षित रूप से हर्षिल पहुंचाया गया। इसके साथ ही, गंगोत्री नेशनल पार्क के गोमुख-तपोवन ट्रैक पर भी 121 अन्य ट्रैकर फंसे हुए थे, जिनका भी रेस्क्यू वन विभाग की टीम ने किया। ये सभी लोग पिछले दो-तीन दिनों से गोमुख और तपोवन में ट्रेकिंग कर रहे थे।
रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल टीमें
रेस्क्यू अभियान में उत्तरकाशी प्रशासन, SDRF, जिला पुलिस, भारतीय सेना और UCADA की टीमें एकजुट होकर काम कर रही थीं। सभी 29 ट्रैकर्स को सुरक्षित रूप से ओडिन कॉल क्षेत्र से निकाला गया और आर्मी बेस हर्षिल के चिकित्सालय में भेजा गया। यहाँ उनकी प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की जा रही है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ हों।
गंभीर मौसम के कारण स्थिति की कठिनाई
गोमुख और तपोवन क्षेत्र में पिछले दो दिनों में अचानक हुई भारी बर्फबारी ने ट्रैक पर आवाजाही को बेहद कठिन बना दिया था। प्रशासन को जैसे ही इस बात की सूचना मिली, उन्होंने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। भारी बर्फबारी और हिमस्खलन के खतरे के बीच बचाव दल ने सावधानीपूर्वक सभी 121 ट्रैकरों को सुरक्षित रूप से गंगोत्री धाम पहुंचाया।
एकता और साहस का प्रतीक
इस रेस्क्यू अभियान ने न केवल सामुदायिक एकता का प्रदर्शन किया, बल्कि बचाव कार्यों में जुटी टीमों की साहसिकता और समर्पण को भी उजागर किया। इन ट्रैकर्स की सुरक्षा के लिए किए गए प्रयास सभी के लिए एक प्रेरणा बन गए हैं।
रेस्क्यू अभियानों के पीछे की मेहनत यह दर्शाती है कि जब भी संकट आता है, तो हमारी सीमाएं और संसाधन एकजुट होकर कार्य करते हैं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि उत्तराखंड प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी और स्थानीय प्रशासन की तत्परता हमेशा उच्चतम स्तर पर रहती है।
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साभार, टीम द ओड नारी (संगीता)
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