अडानी पॉवर: कांग्रेस और भाजपा के बीच की ऊर्जा राजनीति
The post अडानी पॉवर पर झलकी कांग्रेस-भाजपा की ‘पावर’ appeared first on Avikal Uttarakhand. कांग्रेस की तुलना में धामी सरकार ने किया सस्ती बिजली का किया इंतजाम कांग्रेस ने 11.26 रुपए, भाजपा ने किया 5.74 रुपए प्रति यूनिट का करार ऊर्जा प्रदेश बनाने को… The post अडानी पॉवर पर झलकी कांग्रेस-भाजपा की ‘पावर’ appeared first on Avikal Uttarakhand.
अडानी पॉवर: कांग्रेस और भाजपा के बीच की ऊर्जा राजनीति
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कम शब्दों में कहें तो, कांग्रेस और भाजपा के बीच अडानी पॉवर के मुद्दे पर तीखी बहस चल रही है। भाजपा ने धामी सरकार की ओर से सस्ती बिजली की पेशकश की है, जिसके अनुसार उन्होंने 5.74 रुपए प्रति यूनिट बिजली का करार किया है, जबकि कांग्रेस की पेशकश 11.26 रुपए प्रति यूनिट रही है।
देहरादून। हाल ही में अडानी पॉवर के साथ 1320 मेगावाट थर्मल पावर के लिए हुए करार को लेकर भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के बीच राजनीतिक वार-पलट शुरू हो चुका है। भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस सरकार के 2016 के महंगे गैस पावर सौदे की याद दिलायी। उन्होंने कहा कि तब पार्टी ने 11.26 रुपए प्रति यूनिट की दर से करार किया था, जिससे राज्य की बिजली आपूर्ति महंगी हो गई थी।
भाजपा का दावा: सस्ती और विश्वसनीय बिजली
महेंद्र भट्ट ने जोर देकर कहा कि भाजपा की धामी सरकार ने 25 साल के लिए 5.74 रुपए प्रति यूनिट की दर से थर्मल पावर का करार किया है, जिसे सबसे सस्ता समझा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर ट्रांसमिशन चार्ज भी जोड़ दिए जाएं, तो भी यह कीमत छह रुपए से अधिक नहीं होगी। भट्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अडानी पावर को कोई मुफ्त कोल ब्लॉक नहीं मिला है और केंद्र सरकार के आवंटित कोल ब्लॉक का उपयोग किया जाएगा।
भट्ट ने कहा, "सौर और हाइड्रो पावर उत्पादन पर जलवायु और मौसम के कारण निर्भरता होती है। ऐसे में थर्मल पावर सबसे विश्वसनीय विकल्प माना जाता है।" इससे स्पष्ट होता है कि भाजपा यह संकेत दे रही है कि उनकी सरकार की योजना राज्य की ऊर्जा दरों को स्थिर और किफायती बनाए रखने के लिए कार्यरत है।
कांग्रेस का बचाव
वहीं कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर भाजपा पर हमलावार है, और अपने पुराने करार को लेकर विपक्ष के सवालों का जवाब देने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि भाजपा केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए ओछी राजनीति कर रही है।
कांग्रेस ने कहा कि उनके द्वारा किए गए करार के लिए जिम्मेदारी लेनी चाहिए, और यह भी दावा किया कि वे उत्तराखंड के ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
अडानी पॉवर का मामला केवल एक करार नहीं है; यह उत्तराखंड की भविष्य की ऊर्जा नीति और राजनीतिक शक्ति संतुलन का संकेत भी है। ऊर्जा प्रदेश बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों का सीधा असर न केवल राजनीतिक विजय पर पड़ेगा, बल्कि आम नागरिकों की जीवनशैली और आर्थिक स्थिति पर भी पड़ेगा।
भाजपा यदि अपने वादों को पूरा करने में सफल रहती है तो यह राज्य में ऊर्जा के क्षेत्र में एक ठोस विकास का प्रतीक बनेगा। वहीं कांग्रेस यदि अपने पुराने करारों की समीक्षा कर सुधारात्मक कार्रवाई करती है, तो यह उनकी किरकिरी को कम कर सकती है।
निष्कर्ष
आखिरकार, अडानी पॉवर का यह करार केवल ऊर्जा से संबंधित नहीं है; यह उत्तराखंड की राजनीतिक और आर्थिक दिशा को भी तय करेगा। इस बार दोनों प्रमुख दलों के बीच की यह ऊर्जा राजनीति महज बहस का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह राज्य के विकास और जनता के जीवन स्तर को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण चुनौती में बदल गई है।
इसके साथ ही, हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि ऊर्जा के क्षेत्र में स्थायी और भरोसेमंद समाधान प्रदान करने के लिए सुदृढ़ नीतिगत बनाने की आवश्यकता है। विकास की योजनाओं से न केवल रोजगार सृजन होगा, बल्कि आम जनता को सस्ती बिजली भी मिलेगी।
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सादर,
टیم द ओड नारी - प्रिया शर्मा
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