मुख्यमंत्री फडणवीस की मौजूदगी में सासंद और विधायक के बीच जातिगत विवाद

 ‘सीटिंग अरेंजमेंट’ पर बढ़ा जातिगत विवाद पुणे। महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी पुणे में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर एक बड़े आंतरिक विवाद का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुणे में आयोजित एक आधिकारिक सम्मान समारोह के दौरान बीजेपी की राज्यसभा सांसद प्रो. डॉ. मेधा कुलकर्णी और लातूर के औसा से बीजेपी विधायक अभिमन्यु […]

Jun 27, 2026 - 09:38
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मुख्यमंत्री फडणवीस की मौजूदगी में सासंद और विधायक के बीच जातिगत विवाद
मुख्यमंत्री फडणवीस की मौजूदगी में सासंद और विधायक के बीच जातिगत विवाद

मुख्यमंत्री फडणवीस की मौजूदगी में सासंद और विधायक के बीच जातिगत विवाद

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कम शब्दों में कहें तो, पुणे में बीजेपी नेताओं के बीच हुआ विवाद जातिगत टिप्पणियों के कारण बढ़ गया, जिससे सत्ताधारी पार्टी की आंतरिक स्थिति पर सवाल खड़ा हो गया।

पुणे। महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी पुणे में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर एक बड़े आंतरिक विवाद का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब पुणे में आयोजित एक आधिकारिक सम्मान समारोह के दौरान बीजेपी की राज्यसभा सांसद प्रो. डॉ. मेधा कुलकर्णी और लातूर के औसा से बीजेपी विधायक अभिमन्यु पवार के बीच पहले पंक्ति में बैठने को लेकर तीखी बहस हो गई।

इस विवाद ने इतनी तूल पकड़ ली कि सांसद मेधा कुलकर्णी ने विधायक पर जातिगत टिप्पणी करने का गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया और वहां से बाहर निकल गईं। यह समारोह ‘सारथी’ नामक संस्था द्वारा यूपीएससी (UPSC) और एमपीएससी (MPSC) परीक्षा में सफल हुए मराठा समुदाय के मेधावी छात्रों के सम्मान के लिए आयोजित किया गया था।

सांसद मेधा कुलकर्णी का गंभीर आरोप

कार्यक्रम स्थल से बाहर निकलते समय भावुक होते हुए मेधा कुलकर्णी ने मीडिया के सामने विधायक अभिमन्यु पवार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा:

  • जातिगत भेदभाव का दावा: कुलकर्णी ने आरोप लगाया कि प्रोटोकॉल के तहत जब सरकारी अधिकारियों ने उन्हें पहली पंक्ति में बैठने के लिए कहा, तो विधायक पवार ने सीधे उन्हें रोका। उनका कहना था कि पवार ने कहा, “यह मराठा समुदाय का कार्यक्रम है, आपका यहां पहली पंक्ति में बैठना ठीक नहीं लगेगा, इससे विवाद हो सकता है।”

  • जुराद याद दिलाई: उन्होंने यह भी कहा कि जब विधायक अभिमन्यु पवार चुनाव लड़ रहे थे, तब उन्होंने लातूर में ब्राह्मण मतदाताओं को साधने के लिए खुद को लगातार प्रचार के लिए बुलाया था। उन्होंने कहा कि इससे पहले उनके साथ ऐसे भेदभाव का अनुभव नहीं हुआ था।

विधायक अभिमन्यु पवार की सफाई: “यह केवल गलतफहमी थी”

इस विवाद के बाद विधायक अभिमन्यु पवार ने तत्काल अपनी प्रतिक्रिया दी और आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा:

विधायक पवार का पक्ष: “मेधा कुलकर्णी ताई का केवल एक बड़ा गैरसमज (गलतफहमी) हुआ है। मैंने जाति को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की। वहां अन्नासाहेब पाटिल आर्थिक पिछड़ा विकास महामंडल के अध्यक्ष नरेंद्र पाटिल मौजूद थे। चूंकि यह कार्यक्रम सारथी और मराठा समाज से जुड़ा था, इसलिए मैंने केवल इतना कहा था कि नरेंद्र पाटिल जी पहली पंक्ति में बैठें और हमारे सभी लोकप्रतिनिधि (सांसद और विधायक) दूसरी पंक्ति में बैठ सकते हैं। अगर मेरी किसी बात से ताई को ठेस पहुंची है, तो मैं इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगता हूँ।”

बैकग्राउंड और राजनीतिक मायने

इस पूरे घटनाक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राज्य के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार भी उपस्थित थे। सत्ताधारी दल के भीतर ‘मराठा बनाम ब्राह्मण’ के कथित विवाद के सार्वजनिक होने से राज्य के राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। बाद में, मेधा कुलकर्णी ने यह भी कहा कि “पवार उनके भाई जैसे हैं और उन्होंने उन्हें माफ कर दिया है, लेकिन सच भगवान के सामने साफ होना चाहिए।”

इस विवाद ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि राजनीतिक रंजिशें और जातिगत भेदभाव अब भी प्रभावशाली नेताओं के बीच की बातचीत का एक हिस्सा हैं, जो कि भारतीय राजनीति की एक पुरानी स्थिति है।

फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विवाद का सत्ताधारी पार्टी की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा और क्या यह चुनावों के नजदीक किसी नई दिशा में कदम बढ़ाने की प्रेरणा देगा।

यह घटना दर्शाती है कि बीजेपी में आंतरिक संघर्ष बढ़ता जा रहा है और ऐसे में पार्टी को अपनी रणनीतियों में सुधार करने की आवश्यकता है।

फिर भी उम्मीद की जाती है कि नेताओं के बीच आपसी बातचीत और समझौता से यह स्थिति जल्दी ही सही दिशा में बढ़ेगी।

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सादर, टीम द ओड नारी - स्नेहा शर्मा

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