10 रुपये के कैरी बैग का बड़ा मुआवजा, उपभोक्ता आयोग का ऐतिहासिक फैसला

रोहतक। अक्सर खरीदारी के दौरान ग्राहक कैरी बैग के लिए लिए जाने वाले 5 या 10 रुपये को मामूली रकम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन हरियाणा के रोहतक में एक उपभोक्ता ने इसी अतिरिक्त शुल्क के खिलाफ आवाज उठाई और आखिरकार न्याय भी हासिल किया। रोहतक जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण […]

Jun 19, 2026 - 00:38
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10 रुपये के कैरी बैग का बड़ा मुआवजा, उपभोक्ता आयोग का ऐतिहासिक फैसला
10 रुपये के कैरी बैग का बड़ा मुआवजा, उपभोक्ता आयोग का ऐतिहासिक फैसला

10 रुपये के कैरी बैग का बड़ा मुआवजा, उपभोक्ता आयोग का ऐतिहासिक फैसला

रोहतक। अक्सर खरीदारी के दौरान ग्राहक कैरी बैग के लिए लिए जाने वाले 5 या 10 रुपये को मामूली रकम समझकर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन हरियाणा के रोहतक में, एक उपभोक्ता ने इस अतिरिक्त शुल्क के खिलाफ अपनी आवाज उठाई और आखिरकार न्याय हासिल किया। रोहतक जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए प्रसिद्ध फुटवियर ब्रांड रेडटेप (REDTAPE) को ग्राहक से कैरी बैग के लिए 10 रुपये वसूलने के मामले में फटकार लगाते हुए कुल 8,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण मिसाल बन चुका है।

क्या हुआ था घटनाक्रम में?

मामले के अनुसार, रोहतक निवासी एक ग्राहक ने कंपनी के शोरूम से कई जूते खरीदे। खरीदारी के बाद, सामान ले जाने के लिए उसे कैरी बैग दिया गया, जिसके बदले बिल में 10 रुपये का अतिरिक्त चार्ज जोड़ा गया। ग्राहक ने इसके खिलाफ आपत्ति जताई और कहा कि जब वह कंपनी का उत्पाद खरीद रहा है, तो सामान ले जाने के लिए अलग से शुल्क क्यों लिया जा रहा है। लेकिन शोरूम प्रबंधन ने इसे कंपनी की नीति बताकर शुल्क वसूलना जारी रखा।

उपभोक्ता आयोग में शिकायत

इस घटना के बाद, ग्राहक ने रोहतक के जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में स्पष्ट किया गया कि किसी उत्पाद की खरीदारी के बाद, उपभोक्ता को सामान सुरक्षित तरीके से घर पहुंचाने की व्यवस्था विक्रेता की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में कैरी बैग के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूलना अनुचित व्यापारिक व्यवहार है।

कंपनी की दलीलें

सुनवाई के दौरान, कंपनी ने यह दलील दी कि कैरी बैग के लिए शुल्क लेना पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वाली नीति का हिस्सा है। कंपनी ने कहा कि इस उपाय से लोग प्लास्टिक या पेपर बैग के उपयोग से बचते हैं और खुद से बैग लेकर आने के लिए प्रेरित होते हैं। इसके अलावा, कंपनी ने यह भी कहा कि ग्राहक के पास कैरी बैग खरीदने या न खरीदने का विकल्प उपलब्ध था।

आयोग का फैसला

हालांकि, आयोग ने कंपनी की दलीलों को मानने से इंकार कर दिया। आयोग ने यह माना कि जब कोई ग्राहक किसी ब्रांडेड स्टोर से उत्पाद खरीदता है, तो उसे सामान ले जाने के लिए आवश्यक पैकेजिंग उपलब्ध कराना विक्रेता की जिम्मेदारी होती है। विशेष रूप से, जब कैरी बैग पर कंपनी का नाम, लोगो और ब्रांडिंग हो। आयोग ने कहा कि ग्राहक से ऐसे बैग के लिए अतिरिक्त शुल्क लेना उपभोक्ता हितों के खिलाफ है और इसे अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना जा सकता है।

उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि कंपनी को ग्राहक के 10 रुपये वापस करने के साथ-साथ 4,000 रुपये मानसिक प्रताड़ना और असुविधा के लिए मुआवजा और 4,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में देने का निर्देश दिया। इस तरह कंपनी को कुल 8,000 रुपये का भुगतान करना होगा।

उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला उन लाखों ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो रोजमर्रा की खरीदारी में अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करते हैं, परंतु उसके खिलाफ कोई शिकायत नहीं दर्ज कराते। यह निर्णय साबित करता है कि उपभोक्ता को अगर अनुचित व्यवहार का सामना करना पड़ा है, तो वह न्याय पाने का हकदार है, चाहे मामला कितना भी छोटा क्यों न हो।

व्यापारिक प्रतिष्ठान के लिए चेतावनी

यह फैसला कंपनियों के लिए एक चेतावनी का काम करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों को अपने ग्राहकों के साथ पारदर्शी व्यवहार करना चाहिए और ऐसे शुल्कों से बचना चाहिए जो उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालते हों। साथ ही, ग्राहकों को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और किसी भी प्रकार की अनुचित वसूली होने पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

रोहतक उपभोक्ता आयोग का यह निर्णय एक बार फिर साबित करता है कि उपभोक्ता संरक्षण कानून छोटे मामलों में भी प्रभावी भूमिका निभाता है। यही कारण है कि यह मामला अब उपभोक्ता अधिकारों की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।

कम शब्दों में कहें तो, इस फैसले ने उपभोक्ताओं को यह संदेश दिया है कि वे अपने अधिकारों के लिए खड़े हों और किसी भी प्रकार की अनुचित वसूली को बर्दाश्त न करें।

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यह लेख पूरी तरह से उपभोक्ता अधिकारों और उनके संरक्षण के लिए एक मार्गदर्शक साबित होता है। आपकी राय इस मामले पर क्या है? हमें अपने विचार भेजें।

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धन्यवाद,

टीम द ओड नारी, आपके साथ, प्रियंका शर्मा

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