हिमालयन भोजनालय: पहाड़ी खाने का बढ़ता शौक, महिलाओं की आर्थिक स्थिति में जबर्दस्त सुधार

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में जिला प्रशासन की अभिनव पहल के तहत संचालित हिमालयन भोजनालय (Himalayan Bhojanalaya) न केवल पर्यटकों और यात्रियों को उत्तराखंड के पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद चखा रहा है, बल्कि स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम भी बन चुका […] The post पहाड़ी खाने का बढ़ा क्रेज! हिमालयन भोजनालय में उमड़ रहे पर्यटक, महिलाओं की हो रही शानदार कमाई appeared first on Uttarakhand Broadcast.

Jul 25, 2026 - 00:38
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हिमालयन भोजनालय: पहाड़ी खाने का बढ़ता शौक, महिलाओं की आर्थिक स्थिति में जबर्दस्त सुधार
हिमालयन भोजनालय: पहाड़ी खाने का बढ़ता शौक, महिलाओं की आर्थिक स्थिति में जबर्दस्त सुधार

हिमालयन भोजनालय: पहाड़ी खाने का बढ़ता शौक, महिलाओं की आर्थिक स्थिति में जबर्दस्त सुधार

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में चल रहे जिले के अभिनव प्रयासों से संचालित हिमालयन भोजनालय (Himalayan Bhojanalaya) न केवल पर्यटकों को उत्तराखंड के पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों का अनुभव दे रहा है, बल्कि यह स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का एक सशक्त जरिया भी है।

कम शब्दों में कहें तो, यह पहल महिलाओं के लिए आय का एक प्रमुख स्रोत बन रही है और स्थानीय व्यंजनों के लिए एक सही मंच भी स्थापित कर रही है।

आइए देखते हैं इस प्रोजेक्ट की विशेषताएँ और लाभ:

नई पहल के तहत चल रहे 10 हिमालयन भोजनालय

इस योजना के तहत देहरादून जिले में कुल 10 हिमालयन भोजनालय फूड वैन कार्यरत हैं। यह पहल पिछले कुछ वर्षों में शुरू हुई थी, और अब ये व्यंजन प्रेमियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं।

  • रायपुर – 1
  • डोईवाला – 1
  • विकासनगर – 1
  • सहसपुर – 5
  • कालसी – 2

स्वरोजगार की लागत और योगदान

प्रत्येक फूड वैन की स्थापना में लगभग 10 लाख रुपये की लागत आती है, जिसमें से:

  • 6 लाख रुपये REAP परियोजना से
  • 3 लाख रुपये बैंक ऋण से
  • 1 लाख रुपये स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का अंशदान

महिलाओं की आय और बचत में वृद्धि

इन भोजनालयों की स्थापना से महिलाओं के लिए आर्थिक लाभ उत्पन्न हो रहा है।

  • सामान्य क्षेत्रों में महिलाएं प्रतिदिन लगभग 2 हजार रुपये की बचत कर रही हैं।
  • यात्रा मार्गों पर संचालित भोजनालयों में यह बचत 3 से 4 हजार रुपये प्रतिदिन तक जा रही है।

स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन

रायपुर ब्लॉक के बांदल घाटी क्लस्टर लेवल फेडरेशन का “जय माता दी” स्वयं सहायता समूह हिमालयन भोजनालय का संचालन कर रहा है।

समूह की सदस्य कविता सकलानी बताती हैं कि इस फूड वैन से गांव की 10 महिलाओं को रोजगार मिला है।

चारधाम यात्रा मार्ग पर कारोबार में वृद्धि

डोईवाला के छिद्दरवाला स्थित भोजनालय को पर्यटकों से बड़ी संख्या में प्रतिक्रिया मिल रही है। श्री देव सुमन क्लस्टर लेवल फेडरेशन द्वारा चलाये जा रहे इस भोजनालय का संचालन मंजू कश्यप और उनके पति लेखराज कश्यप कर रहे हैं।

स्थानीय उत्पादों की बिक्री

हिमालयन भोजनालय में स्थानीय उत्पादों की भी बिक्री हो रही है। इनमें प्रमुख हैं:

  • पल्लर
  • अचार
  • हरा नमक
  • देसी घी
  • हल्दी
  • मिर्च
  • झंगोरा
  • मंडुवा
  • विभिन्न प्रकार की दालें

यात्रियों का अनुभव

यात्री आनंद कुमार शुक्ला ने इसे महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने के प्रयास के रूप में सराहा।

नए भोजनालयों की योजना

जिला परियोजना प्रबंधक सोनम गुप्ता ने बताया कि चकराता के हनोल मंदिर क्षेत्र में भी नया भोजनालय जल्द खोला जाएगा।

महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक सफल मॉडल

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह का कहना है कि यह REAP परियोजना महिलाओं को सशक्त बनाने का एक प्रभावी कदम है।

आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित भोजनालय

हिमालयन भोजनालय में आधुनिक सुविधाएं और पारंपरिक पहाड़ी संस्कृति का मेल है।

अगर आप पहाड़ी खाने का आनंद लेना चाहते हैं और इस मॉडल के बारे में अधिक जानना चाहतें हैं, तो यहाँ क्लिक करें

Team The Odd Naari

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