सोनिया गांधी की किताब भारत में कौन छापेगा

नई दिल्ली: कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित किताब ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ भारत में रिलीज से पहले ही चर्चा और विवाद का विषय बन गई है। किताब के भारतीय प्रकाशन से अलग होने के फैसले पर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। प्रकाशक ने उन अटकलों को […]

Sep 1, 2026 - 18:38
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सोनिया गांधी की किताब भारत में कौन छापेगा

नई दिल्ली: कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित किताब ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ भारत में रिलीज से पहले ही चर्चा और विवाद का विषय बन गई है। किताब के भारतीय प्रकाशन से अलग होने के फैसले पर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। प्रकाशक ने उन अटकलों को खारिज किया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि किताब से पीछे हटने के पीछे किसी तरह का सरकारी या बाहरी दबाव था।

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की ओर से कहा गया है कि कंपनी इस किताब को प्रकाशित करने को लेकर काफी उत्साहित थी। प्रकाशक ने इसे लंबे समय से चल रही संपादकीय और अधिग्रहण प्रक्रिया के बाद हासिल की गई महत्वपूर्ण पुस्तक बताया। कंपनी के मुताबिक, पांडुलिपि सामान्य संपादकीय प्रक्रिया से गुजरी और इस दौरान लेखक की टीम के साथ अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत हुई।

प्रकाशक ने बताया कि संपादन से जुड़े कई सुझावों पर सोनिया गांधी की टीम ने सहमति जताई, जबकि कुछ मामलों में प्रकाशक ने भी लेखिका की टीम की बात स्वीकार की। हालांकि, बातचीत के अंतिम चरण में एक विशेष मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद लेखिका की टीम ने पेंगुइन के साथ आगे प्रकाशन प्रक्रिया जारी नहीं रखने का फैसला किया।

किस मुद्दे पर नहीं बनी सहमति?

पेंगुइन ने फिलहाल उस खास मुद्दे की जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, जिस पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद हुआ। कंपनी का कहना है कि सोनिया गांधी के साथ हुए समझौते और लेखिका की गोपनीयता से जुड़ी बाध्यताओं के चलते वह बातचीत के विस्तृत ब्योरे को सार्वजनिक नहीं कर सकती।

इसी अस्पष्टता के कारण किताब के भारतीय प्रकाशन को लेकर अटकलों का दौर जारी है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि पांडुलिपि के उन हिस्सों पर संपादकीय चर्चा हुई थी, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और चीन जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषयों का जिक्र है। इन रिपोर्टों के बाद कांग्रेस से जुड़े कुछ नेताओं ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संभावित दबाव को लेकर सवाल उठाए।

हालांकि, पेंगुइन ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि पांडुलिपि की तथ्य-जांच और संपादकीय सुझाव प्रकाशन की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। कंपनी के अनुसार, पूरी बातचीत के दौरान किताब को प्रकाशित करने में उसकी रुचि बनी हुई थी। इसलिए प्रकाशक ने किसी बाहरी अथवा सरकारी हस्तक्षेप की बात से इनकार किया है।

सोनिया गांधी की जिंदगी पर आधारित है किताब

‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ सोनिया गांधी के निजी जीवन और उनके भारत से जुड़ाव पर केंद्रित किताब है। इसमें उनके इटली में बचपन, राजीव गांधी के साथ उनके संबंध, भारत आने और नेहरू-गांधी परिवार का हिस्सा बनने के अनुभवों को शामिल किया गया है।

किताब में उनके जीवन के कई निजी और भावनात्मक दौरों का भी उल्लेख होने की बात कही गई है। परिवार में हुए व्यक्तिगत नुकसान और कठिन परिस्थितियों के साथ भारत के प्रति उनके विकसित होते जुड़ाव को भी पुस्तक का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

10 नवंबर को होगा अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन

किताब का वैश्विक प्रकाशन अमेरिकी प्रकाशन संस्था अल्फ्रेड ए. नॉफ की ओर से 10 नवंबर को किया जाना है। यानी पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के भारतीय संस्करण से पीछे हटने के बावजूद किताब का अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक होने की उम्मीद है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत में ‘बिलॉन्गिंग’ को कौन-सा प्रकाशक प्रकाशित करेगा। पेंगुइन के फैसले के बाद भारतीय संस्करण की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।

सोनिया गांधी की किताब को लेकर विवाद का केंद्र फिलहाल यही बना हुआ है कि आखिर वह कौन-सा विशेष मुद्दा था, जिस पर प्रकाशक और लेखिका की टीम के बीच अंतिम सहमति नहीं बन पाई। पेंगुइन ने दबाव की अटकलों को खारिज कर दिया है, लेकिन उस मुद्दे को सार्वजनिक नहीं किए जाने के कारण इस मामले पर राजनीतिक और मीडिया बहस जारी रहने की संभावना है।

 

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