राज्य स्तरीय माॅक ड्रिल से होगी मानसून तैयारियों की सटीक परख
The post माॅक ड्रिल से परखी जाएंगी मानसून की तैयारियां appeared first on Avikal Uttarakhand. दो जुलाई को होगी मानसून पूर्व तैयारियों पर राज्य स्तरीय माॅक ड्रिल सभी 13 जनपदों में करीब 70 स्थानों पर एक साथ होगा आयोजन मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में… The post माॅक ड्रिल से परखी जाएंगी मानसून की तैयारियां appeared first on Avikal Uttarakhand.
माॅक ड्रिल से परखी जाएंगी मानसून की तैयारियां
कम शब्दों में कहें तो, दो जुलाई को होने वाली राज्य स्तरीय माॅक ड्रिल 13 जनपदों में लगभग 70 स्थानों पर बेजोड़ तैयारियों का आगाज़ करेगी। इस पहल का उद्देश्य मानसून में संभावित आपदाओं से निपटने के लिए प्रशासनिक तंत्र को प्रभावी बनाना है।
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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों के तहत, आगामी 2 जुलाई को उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों में एक साथ मॉडर्न "माॅक ड्रिल" आयोजित की जाएगी। इस ड्रिल का मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान होने वाली आपदाओं का त्वरित और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है।
यूएसडीएमए द्वारा इस आयोजन की तैयारियाँ बेहद उत्साह के साथ की जा रही हैं। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में एक ओरिएंटेशन एवं कोऑर्डिनेशन कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न जनपदों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। सचिव ने कहा कि यह ड्रिल प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर पर संकट में राहत और बचाव कार्यों की क्षमता का परीक्षण करेगी।
मुख्यमंत्री धामी ने मानसून की तैयारियों की समीक्षा बैठक में इस ड्रिल के आयोजन का निर्णय लिया था, जो सभी 70 स्थानों पर किया जाएगा। विशेष बात यह है कि जहाँ पहले मॉक ड्रिल हुई है, वहाँ पुनः आयोजन नहीं किया जाएगा, ताकि नई जगहों पर अभ्यास हो सके।
30 जून को आयोजित की जाने वाली टेबल टॉप एक्सरसाइज में सभी जनपद तैयारियों के साथ संसाधनों की उपलब्धता और उनकी तैनाती पर चर्चा करेंगे। यह ड्रिल घटना प्रतिक्रिया प्रणाली के अंतर्गत होगी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने का प्रयास करेगी।
आपदा प्रबंधन के दिशानिर्देश
अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन, प्रकाश चंद्र ने प्रशिक्षित सरकारी कर्मचारियों का डाटाबेस बनाने एवं उन्हें प्रथम प्रतिक्रियादाता के रूप में तैयार करने के दिशा-निर्देश दिए हैं। इस ड्रिल में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
सामुदायिक सहभागिता को प्राथमिकता
बातचीत में, सचिव ने सामुदायिक सहभागिता पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी आपदा के दौरान स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसी कारण, पूर्व सैनिकों, स्वयंसेवी संगठनों, एनसीसी और एनएसएस सदस्यों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
आपदा प्रबंधन उपकरणों की प्रदर्शनी
मॉक ड्रिल के द्वारा आपदा प्रबंधन उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसमें विभिन्न एजेंसियों द्वारा राहत एवं बचाव कार्यों में प्रयुक्त आधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन किया जाएगा।
अभ्यास के विविध परिदृश्य
इस ड्रिल के दौरान मानसून जनित विभिन्न आपदा परिदृश्यों पर भी अभ्यास किया जाएगा, जैसे कि जलभराव, भूस्खलन, और बच्चों की सुरक्षित निकासी। यह परिदृश्य सुनिश्चित करेगा कि सभी प्रतिक्रियाकर्ता प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकें हों और आवश्यकतानुसार तेज़ी से कार्य कर सकें।
इसके अलावा, राहत शिविरों की स्थापना, बिजली, पानी, भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था का भी रियल टाइम में परीक्षण किया जाएगा। इस दौरान, पुलिस और होमगार्ड के जवान भी तैनात रहेंगे।
इस प्रकार, 2 जुलाई को होने वाली यह मॉक ड्रिल न केवल आपदा प्रबंधन की तैयारियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगी, बल्कि इससे स्थानीय समुदाय की भागीदारी से आपातकालीन प्रतिक्रिया के तंत्र में सुधार भी होगा।
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सादर,
टीम द ऑड नारी
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