बुजुर्ग विधवा की पेंशन में रुकावट, हाईकोर्ट ने कलेक्टर को भेजा अवमानना नोटिस
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 78 वर्षीय विधवा को उसके दिवंगत पति से जुड़े लंबित सेवा लाभ और पेंशन का भुगतान नहीं होने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने सरगुजा कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अजीत वसंत को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि पूर्व में दिए गए […]
बुजुर्ग विधवा की पेंशन में रुकावट, हाईकोर्ट ने कलेक्टर को भेजा अवमानना नोटिस
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 78 वर्षीय विधवा के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। यह मामला न्यायालय में दिवंगत पति से जुड़े लंबित सेवा लाभ और पेंशन के न मिलने से संबंधित है। उच्च न्यायालय ने सरगुजा कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अजीत वसंत को अवमानना नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है। अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि पूर्व में दिए गए आदेश का पालन न करने के लिए उन पर अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए। अगली सुनवाई पांच सप्ताह बाद होगी।
कम शब्दों में कहें तो, ये मामला बुजुर्ग विधवाओं के पेंशन के अधिकारों और प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयान करता है।
मामले का背景
इस विवाद का मूलभूत कारण याचिकाकर्ता बी. एक्का की याचिका है, जिसमें उन्होंने न्यायालय में अपने दिवंगत पति के सेवा संबंधी लंबित लाभों का भुगतान न होने की शिकायत की थी। इनमें संशोधित वेतनमान, टाइम पे स्केल, क्रमोन्नति, बकाया राशि, और पेंशन के पुनर्निर्धारण जैसे आवश्यक लाभ शामिल थे। विधवा ने इन लाभों को हासिल करने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
कोर्ट का रुख
हाईकोर्ट ने 6 जनवरी 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया था कि याचिकाकर्ता के दावे पर उचित कार्रवाई की जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 60 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई को पूरा किया जाए। इसके साथ ही, कोर्ट ने महिला की आयु को देखते हुए इस मामले में शीघ्रता बरतने की भी आवश्यकता जताई थी।
प्रशासन की विफलता
अदालत के निर्देश आने के बाद प्रशासन ने कार्यवाही शुरू की। 11 मई को सरगुजा संभाग आयुक्त द्वारा कलेक्टर को दिशा-निर्देश भेजे गए ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके। इसके बाद के दिनों में अपर कलेक्टर ने 21 मई को पेंशन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की।
हालांकि, याचिकाकर्ता ने समय पर सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए, जिनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, मृत्यु प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक कागजात शामिल थे। इसके बावजूद, महिला को उसके दिवंगत पति से संबंधित पेंशन का पूर्ण पुनर्निर्धारण, बकाया राशि और अन्य सेवा लाभ प्राप्त नहीं हुए।
हाईकोर्ट में अवमानना याचिका
लंबे समय तक कोई कार्रवाई न होने के परिणामस्वरूप महिला ने उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की। इसके लिए उन्होंने अधिवक्ता नेल्सन पन्ना और आशुतोष मिश्रा की सहायता प्राप्त की। याचिका में आरोप लगाया गया था कि अधिकारियों ने न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक कार्रवाई नहीं की।
अगली सुनवाई और प्रशासन की प्रतिक्रिया
मामले की सुनवाई जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की पीठ के समक्ष हुई। अदालत ने पुनः सरगुजा कलेक्टर को अवमानना नोटिस जारी किया है। नोटिस के माध्यम से कलेक्टर को यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि अदालत के पूर्व आदेश का पालन न करने के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
अब कलेक्टर को न्यायालय के समक्ष अपना उत्तर दाखिल करना होगा। अगली सुनवाई पांच सप्ताह बाद निर्धारित की गई है, जिसके दौरान अदालत प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई और पूर्व आदेश के अनुपालन की स्थिति की समीक्षा कर सकती है।
महत्व और निष्कर्ष
यह मामला सरकारी कर्मचारियों के लंबित सेवा लाभ और पेंशन के मामलों में समयबद्ध कार्रवाई के महत्व को उजागर करता है। विशेषकर बुजुर्ग पेंशनभोगियों या उनके आश्रितों के मामलों में प्रशासनिक देरी गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर सकती हैं। हाईकोर्ट की कार्रवाई यह दर्शाती है कि न्यायिक आदेशों का निर्धारित समय सीमा में पालन करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
इस केस के जरिए यह स्पष्ट होता है कि ना केवल न्यायपालिका की भूमिका महत्वपूर्ण है, बल्कि प्रशासन को भी अपने कर्तव्यों को समय पर निभाना आवश्यक है।
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— Team The Odd Naari, प्रियंका शर्मा
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