बिहार में बाढ़ का बड़ा खतरा! गंगा ने तोड़ा 2016 का रिकॉर्ड

पटना: बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी ने बाढ़ की चिंता बढ़ा दी है। पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। यह स्तर वर्ष 2016 में दर्ज किए गए उच्चतम स्तर से करीब 5 सेंटीमीटर ऊपर बताया जा रहा […]

Sep 7, 2026 - 00:38
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बिहार में बाढ़ का बड़ा खतरा! गंगा ने तोड़ा 2016 का रिकॉर्ड

पटना: बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी ने बाढ़ की चिंता बढ़ा दी है। पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। यह स्तर वर्ष 2016 में दर्ज किए गए उच्चतम स्तर से करीब 5 सेंटीमीटर ऊपर बताया जा रहा है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही पटना समेत राज्य के कई जिलों में निचले इलाकों और नदी किनारे बसे गांवों पर खतरा बढ़ गया है।

ताजा तस्वीरों और सामने आई जानकारी के मुताबिक, गंगा के साथ-साथ कोसी, गंडक और बागमती जैसी नदियां भी कई स्थानों पर खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। इससे प्रशासन के सामने एक साथ कई इलाकों में राहत और बचाव अभियान चलाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

11 जिलों में बाढ़ का दबाव, 300 से ज्यादा पंचायतें प्रभावित

बिहार के करीब 11 जिलों में बाढ़ का असर गंभीर होता जा रहा है। इनमें भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, अरवल और पटना शामिल बताए जा रहे हैं। इन क्षेत्रों के करीब 61 प्रखंडों में 300 से अधिक ग्राम पंचायतें बाढ़ के पानी से प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

बाढ़ का पानी कई निचले इलाकों में पहुंचने के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है। खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ गया है। कई ग्रामीण रास्तों पर पानी चढ़ने के कारण गांवों का संपर्क आसपास के प्रमुख इलाकों से कमजोर हुआ है।

नदी के जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो आने वाले समय में और अधिक पंचायतों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जा रही है।

पटना में गंगा ने बढ़ाई चिंता

राजधानी पटना में गंगा का बढ़ता जलस्तर सबसे बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है। गांधी घाट पर पानी के 50.57 मीटर तक पहुंचने की जानकारी के बाद नदी किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

गंगा का जलस्तर बढ़ने का असर केवल नदी के आसपास के इलाकों तक सीमित नहीं रहता। लगातार बारिश और ऊंचे जलस्तर की स्थिति में छोटे नालों तथा सहायक नदियों के पानी की निकासी भी प्रभावित हो सकती है। इससे निचले इलाकों में जलजमाव की स्थिति गंभीर हो सकती है।

पटना के नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए प्रशासन की निगरानी इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि जलस्तर में थोड़ी सी अतिरिक्त बढ़ोतरी भी निचले इलाकों में तेजी से असर डाल सकती है।

कोसी, गंडक और बागमती भी दिखा रहीं तेवर

बिहार में बाढ़ का संकट सिर्फ गंगा तक सीमित नहीं है। कोसी, गंडक और बागमती जैसी नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी की बात सामने आई है। इन नदियों का प्रभाव राज्य के बड़े हिस्से पर पड़ता है और इनके जलस्तर में वृद्धि होने पर आसपास के गांवों तथा कृषि क्षेत्रों में पानी फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाना अपने आप में गंभीर स्थिति है, लेकिन जब एक साथ कई नदियां उफान पर हों तो बाढ़ प्रबंधन और राहत व्यवस्था की चुनौती कई गुना बढ़ जाती है।

ऐसे हालात में तटबंधों की निगरानी, जलस्तर की लगातार जानकारी और निचले इलाकों से समय पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना बेहद जरूरी हो जाता है।

NDRF और SDRF की टीमें राहत-बचाव में जुटीं

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए NDRF और SDRF की 34 टीमें राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी होने की जानकारी सामने आई है। संभावित प्रभावित इलाकों में प्रशासन की सक्रियता बढ़ाई गई है।

बाढ़ के दौरान सबसे बड़ी चुनौती लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ-साथ भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और जरूरी सामान उपलब्ध कराना होती है। प्रशासन के लिए यह भी जरूरी होता है कि प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री समय पर पहुंचे और किसी तरह की आपात स्थिति में बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंच सके।

ग्रामीण इलाकों में नावों की उपलब्धता, सुरक्षित आश्रय स्थल और मेडिकल टीमों की तैनाती भी राहत व्यवस्था का अहम हिस्सा बनती है।

मौसम विभाग के अलर्ट ने बढ़ाई चिंता

बाढ़ के बीच मौसम विभाग की ओर से अगले 48 घंटों में कई इलाकों में तेज बारिश का अलर्ट बताए जाने से चिंता और बढ़ गई है। यदि ऊपरी क्षेत्रों में भारी बारिश जारी रहती है तो नदियों में आने वाले पानी का दबाव और बढ़ सकता है।

बारिश और पहले से ऊंचे नदी जलस्तर का एक साथ होना निचले इलाकों के लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है। ऐसे में लोगों से नदी, तटबंध और जलभराव वाले क्षेत्रों के पास अनावश्यक रूप से जाने से बचने की अपील महत्वपूर्ण हो जाती है।

किसानों की बढ़ी परेशानी, फसलों पर मंडराया खतरा

बाढ़ का सीधा असर बिहार की खेती पर भी पड़ता है। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से धान समेत दूसरी फसलों को नुकसान हो सकता है। कई इलाकों में पहले से पानी जमा होने के कारण किसानों के सामने फसल बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पुलिया के ऊपर पानी आने से आवागमन बाधित होने पर किसानों को बाजार तक फसल पहुंचाने और जरूरी सामान लाने में भी परेशानी हो सकती है।

लोगों को सतर्क रहने की जरूरत

मौजूदा हालात में नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है। जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर जाना ही सबसे बेहतर विकल्प है।

बाढ़ के दौरान बच्चों को नदी और तेज बहाव वाले पानी से दूर रखना, बिजली के खंभों या पानी में डूबे बिजली उपकरणों से दूरी बनाए रखना और अफवाहों के बजाय प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करना जरूरी है।

बिहार में गंगा का 2016 के रिकॉर्ड से ऊपर पहुंचा जलस्तर अब सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि आने वाले दिनों की चुनौती का संकेत माना जा रहा है। गंगा समेत प्रमुख नदियों का जलस्तर, बारिश और प्रशासन की तैयारियां अब पूरे राज्य के लिए सबसे अहम निगरानी बिंदु बन गए हैं।

नोट: यह समाचार उपलब्ध कराई गई तस्वीर/जानकारी के आधार पर मौलिक रूप से तैयार किया गया है। जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों के आंकड़ों में समय के साथ बदलाव संभव है।

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