पौड़ी में जच्चा और नवजात की मौत: अस्पताल प्रशासन पर उठे सवाल, आक्रोशित लोगों ने की कार्रवाई की मांग

PAURI GARHWAL: पौड़ी जिला मुख्यालय में एक निजी अस्पताल उत्तरा केयर में प्रसव के दौरान नवजात की मौत हो गई। गंभीर हालत में रेफर की गई प्रसूता ने जौलीग्रांट अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। ये मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना से आक्रोशित लोगों ने आज शहर में जुलूस निकालकर […] The post पौड़ी निजी अस्पताल में जच्चा बच्चा की मौत पर आक्रोश, आक्रोशित लोगों ने की कार्रवाई की मांग appeared first on Devbhoomi Dialogue.

Aug 1, 2026 - 18:38
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पौड़ी में जच्चा और नवजात की मौत: अस्पताल प्रशासन पर उठे सवाल, आक्रोशित लोगों ने की कार्रवाई की मांग
पौड़ी में जच्चा और नवजात की मौत: अस्पताल प्रशासन पर उठे सवाल, आक्रोशित लोगों ने की कार्रवाई की मांग

पौड़ी में जच्चा और नवजात की मौत: अस्पताल प्रशासन पर उठे सवाल, आक्रोशित लोगों ने की कार्रवाई की मांग

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कम शब्दों में कहें तो, पौड़ी में एक निजी अस्पताल में जच्चा और नवजात की मौत पर स्थानीय लोगों का आक्रोश सामने आया है। परिजनों और शहरवासियों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ रैली निकालकर कार्रवाई की मांग की है।

घटना का विवरण

PAURI GARHWAL: पौड़ी जिला मुख्यालय में प्रतिष्ठित निजी अस्पताल उत्तरा केयर में एक दुखद घटना घटी। प्रसव के दौरान नवजात की मौत हो गई और गंभीर हालत में रेफर की गई प्रसूता ने जौलीग्रांट अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना ने अब तूल पकड़ लिया है और आक्रोशित भीड़ ने आज शहर में जुलूस निकालकर अस्पताल के खिलाफ प्रदर्शन किया।

परिजनों का दुःख और मांगें

मृतका की पति, रजनीश लिंगवाल ने बताया कि उनकी पत्नी रेनु की प्रसव तिथि 31 जुलाई निर्धारित थी। 27 जुलाई को निरंतर जांच के लिए उन्होंने पत्नी को अस्पताल लाया। अस्पताल ने उन्हें बताया कि 28 जुलाई को आपरेशन करना होगा। इसके बाद, उन्हें आशंका के चलते नवजात की मौत की सूचना दी गई।

रजनीश ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के बाद उनकी पत्नी की स्थिति बिगड़ गई, और उन्हें एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया था, किंतु अस्पताल कर्मियों ने उन्हें जौलीग्रांट अस्पताल ही भेजा, जहाँ इलाज के दौरान उनकी पत्नी की भी मृत्यु हो गई। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

स्थानीय लोगों का आक्रोश

इस घटना ने स्थानीय निवासियों में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। लोगों ने रामलीला ग्राउंड से लेकर उत्तरा केयर अस्पताल तक एक विशाल रैली निकालकर घटना का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी उपाय किए जाएं।

सीएमओ की प्रतिक्रिया

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. एसएम शुक्ला ने कहा कि मामले का संज्ञान लिया गया है और जांच के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की एक टीम गठित की गई है। रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

परिजनों के आरोप

परिजनों ने आरोप लगाया कि प्रसव के दौरान अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में जरूरी चिकित्सीय उपकरण उपलब्ध नहीं थे। वे यह भी दावा करते हैं कि अगर डॉक्टरों ने समय पर सही कदम उठाए होते, तो मां और बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।

अस्पताल प्रशासन का पक्ष

अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को खारिज कर दिया है। अस्पताल की प्रतिनिधि डॉ. अनु भारती ने कहा कि टीम ने महिला और नवजात की जान बचाने के लिए सभी प्रयास किए। उन्होंने दोहराया कि सभी मानक चिकित्सीय प्रक्रियाओं का पालन किया गया, लेकिन जटिलताओं के कारण नवजात को नहीं बचाया जा सका।

इस घटना ने न केवल स्थानीय समुदाय को प्रभावित किया है, बल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर एक गहरा सवाल भी खड़ा करता है। अधिक अपडेट के लिए यहाँ क्लिक करें

सामान्यतः ऐसी घटनाएँ हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या स्वास्थ्य सेवा में सुधार की आवश्यकता है और हम किस प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएँ चाहते हैं।

सादर,
टीम द ओड नारी.

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