पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्तराखंड की रेनबो ट्राउट फिश का निर्यात, 5 टन मछली की सफलता
DEHRADUN/PITHORAGARH: उत्तराखंड के मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। राज्य गठन के बाद पहली बार उत्तराखंड में उत्पादित रेनबो ट्राउट मछली (Rainbow Trout Fish) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में दस्तक दी है। पिथौरागढ़ जिले की तीन मत्स्य सहकारी समितियों द्वारा तैयार की गई 5 मीट्रिक टन ट्राउट मछली का सफलतापूर्वक नेपाल […] The post ग्लोबल हो गई पहाड़ की ट्राउट फिश, पहली बार इंटरनेशनल मार्केट में एक्सपोर्ट की गई 5 टन मछली appeared first on Devbhoomi Dialogue.
पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्तराखंड की रेनबो ट्राउट फिश का निर्यात
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड की रेनबो ट्राउट मछली ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कदम रखा है, जब 5 मीट्रिक टन मछली का सफलतापूर्वक नेपाल को निर्यात किया गया।
DEHRADUN/PITHORAGARH: उत्तराखंड में मछली पालन क्षेत्र ने एक नई ऊँचाई छुई है। राज्य गठन के बाद की यह पहली बार है जब उत्तराखंड में उत्पादित रेनबो ट्राउट मछली (Rainbow Trout Fish) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बनाई है। पिथौरागढ़ जिले की तीन मत्स्य सहकारी समितियों द्वारा तैयार की गई 5 मीट्रिक टन ट्राउट मछली का सफल निर्यात नेपाल में किया गया है। इस जानकारी को साझा करते हुए मत्स्य विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि राज्य अब आने वाले समय में लगभग 30 मीट्रिक टन मछली के निर्यात की तैयारी कर रहा है।
गुजरात में प्रोसेसिंग के बाद नेपाल पहुंची मछली
मंत्री ने स्पष्ट किया कि कोल्ड-चेन व्यवस्था के तहत ट्राउट मछली को पहले गुजरात के वेरावल भेजा गया, जहाँ इसका प्रोसेसिंग किया गया। 23 जून 2026 को यह मछली नेपाल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात की गई। इस सफल निर्यात से 33 मत्स्य पालकों ने लगभग 23.50 लाख रुपये की आय प्राप्त की, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में मछली पालन से जुड़े किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ मिला है। सौरभ बहुगुणा ने बताया कि इस निर्यात को सफल बनाने के लिए मत्स्य विभाग ने हार्वेस्टिंग, पैकेजिंग और परिवहन के लिए 5.40 लाख रुपये की गैप फंडिंग प्रदान की।
मत्स्य पालन का तेजी से विकास
मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि नवीन ट्राउट प्रोत्साहन योजना और मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना जैसी योजनाओं के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन अब उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का एक तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र बन चुका है, जो ग्रामीण आजीविका, रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
विदेशों में भारी डिमांड
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दुबई में आयोजित गल्फ फूड एक्सपो के दौरान अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से बने संपर्कों ने इसे संभव बनाया। विभाग अब उत्तराखंड की ट्राउट मछली को यूरोप, मध्य-पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में पहुंचाने की दिशा में कार्य कर रहा है। आने वाले समय में 30 मीट्रिक टन ट्राउट मछली का निर्यात करना विभाग की योजना में शामिल है, जिससे प्रदेश के मत्स्य पालकों की आय बढ़ने के साथ-साथ उत्तराखंड की पहचान वैश्विक बाजार में मजबूत होगी।
सांख्यिकी और महिला मत्स्य पालकों की वृद्धि
सौरभ बहुगुणा ने बताया कि वर्ष 2022 तक राज्य में 10,011 मत्स्य पालक थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 15,657 हो गई है, जिसमें 3,584 महिला मत्स्य पालक शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2022-26 के दौरान राज्य में मत्स्य उत्पादन की वृद्धि दर 11 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि वर्ष 2026-27 में प्रदेश में 11,805 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन हुआ, जिसकी अनुमानित कीमत 165 करोड़ रुपये है।
इस सफलता से न केवल उत्तराखंड की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि मत्स्य पालन क्षेत्र में और अधिक युवा और महिला किसानों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।
यह विकास निश्चित रूप से उत्तराखंड के लिए एक नया अध्याय शुरू कर रहा है और हम उम्मीद करते हैं कि इसकी सफलता को अन्य क्षेत्रों में भी दोहराया जाएगा।
इस ऐतिहासिक कदम के लिए शुभकामनाएँ। टीम द ओड नारी इसके अलावा, अधिक अपडेट के लिए हमें यहां विजिट करें।
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