मुकेश ऋषि और Pocket FM का अनुठा अभियान: 'ना' कहने वाले पिताओं को समर्पित
मुंबई, महाराष्ट्र, भारत हर बच्चे को अपनी कहानी का एक विलेन जरूर याद रहता है। वह शख्स जो हमेशा ‘ना’ कहता था। देर रात बाहर जाने के लिए ना। एक और घंटा टीवी देखने के लिए ना। बाइक के लिए ना। आसान रास्ता चुनने के लिए ना। बहानों के लिए ना। हम में से कई […]
मुकेश ऋषि और Pocket FM का अनुठा अभियान: 'ना' कहने वाले पिताओं को समर्पित
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कम शब्दों में कहें तो, Pocket FM ने फादर्स डे के अवसर पर अभिनीत 'The Villain Who Raised Me' अभियान के जरिए उन पिताओं को समर्पित किया है, जिन्होंने हमेशा अपने बच्चों के भले के लिए कठिन निर्णय लिए हैं।
मुंबई, महाराष्ट्र, भारत हर बच्चे की कहानी में एक ऐसा विलेन होता है जो हमेशा 'ना' कहता है। चाहे वह देर रात बाहर जाने का प्रस्ताव हो, एक और घंटा टीवी देखने का आग्रह हो या किसी साधारण मांग का ठुकराव हो, यह विलेन अक्सर हमारे पिताजी होते हैं।
इस फादर्स डे, Pocket FM ने एक अनूठा अभियान 'The Villain Who Raised Me' पेश किया है, जो उन पिताओं को समर्पित है जिन्होंने अपने बच्चों की नाराज़गी को सहन किया, लेकिन उनके उज्जवल भविष्य के लिए सही निर्णय लेते रहे।
क्या है 'The Villain Who Raised Me' अभियान?
इस कैंपेन के जरिए यह दिखाया गया है कि कैसे हर पिता कभी न कभी अपने बच्चे की कहानी में विलेन बनता है, इस आशा के साथ कि वह उनके जीवन का हीरो बन सके। इस अभियान के चेहरे के रूप में भारतीय सिनेमा के मशहूर विलेन अभिनेता मुकेश ऋषि को चुना गया है।
मुकेश ऋषि, जिनके द्वारा कई कुख्यात विलेन का निबंधन किया गया है, इस अभियान के माध्यम से एक ऐसी सच्चाई को उजागर करते हैं: कई बार पिताओं के द्वारा लिए गए कठोर निर्णयों का प्यार और मंशा केवल तब समझ में आती है जब बच्चे बड़े हो जाते हैं।
पिता की भूमिका
कई मामलों में, पिता को कठिन अनुशासन बनाए रखने, सीमाएं तय करने और मुश्किल निर्णय लेने में कठोर नजर आना पड़ता है। यह सभी पल वे हैं जिन पर बच्चे अक्सर नाखुश होते हैं। लेकिन यही पल उनको जीवन में महत्वपूर्ण सीख और आदतें प्रदान करते हैं।
इस अभियान ने पिता को एक नए नजरिए से प्रस्तुत किया है। यहाँ पिता का चित्रण एक हीरो के रूप में नहीं किया गया है जो हर समस्या का समाधान लाता है, बल्कि उस अभिभावक के रूप में जो किसी बड़े उद्देश्य के लिए गलत समझे जाने का जोखिम उठाता है।
कैसे बना ये अभियान?
इस विचार को जिंदा करने के लिए मुकेश ऋषि का चयन इस चुनाव को सार्थक बनाता है। उनका हल्का-फुल्का अंदाज न केवल पिताओं का प्रतिनिधित्व करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि उनके कठोर निर्णयों के पीछे छुपा प्यार और जिम्मेदारी भी है।
इस अभियान के संदर्भ में विनीत सिंह, एसवीपी एवं ग्लोबल हेड, ब्रांड मार्केटिंग, कम्युनिकेशंस, पार्टनरशिप्स और पब्लिक अफेयर्स, Pocket FM ने कहा, "हम चाहते थे कि हम पिता की उस भूमिका का सम्मान करें, जिसमें वे अक्सर अपने बच्चों के लिए विलेन बनते हैं।"
फादर्स डे हमेशा पिताओं को हीरो के रूप में दर्शाने की कोशिश करता है, लेकिन Pocket FM ने इस बार कहानी को एक अलग मोड़ दिया है। अभियान का उद्देश्य यह है कि कैसे फादर्स अपने बच्चों से अक्सर 'ना' कहने की भूमिका में रहते हैं।
पिता-पुत्र का रिश्ता
मुकेश ऋषि ने इस अभियान पर बात करते हुए कहा, "हर पिता ने अपने जीवन में कभी न कभी विलेन की भूमिका निभाई है। प्यार का मतलब अक्सर 'ना' कहना ही होता है। यह सीमाएं तय करने, कठिन फैसले लेने और इस बात को मानने की कोशिश करना कि बच्चे तुरंत समझ नहीं पाते।"
Pocket FM की इन-हाउस क्रिएटिव टीम द्वारा निर्मित यह अभियान दर्शकों को एक गहरी और आत्मीय कहानी से परिचित कराता है, जिसमें जीवन के वास्तविक भावनाओं, रिश्तों और अनुभवों का समावेश है।
इस तरह, Pocket FM ने इस अभियान के माध्यम से सिर्फ एक फादर्स डे कैम्पेन नहीं बनाया, बल्कि पिताओं के प्रति सम्मान और उनकी भूमिका को एक छवि में रूपांतरित किया है। वे इसमें एक सच्चाई को उजागर करते हैं कि हर मुश्किल फैसला उनके बच्चों के लिए एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए है।
इस फादर्स डे, Pocket FM ने पिता की भूमिका को एक नई दृष्टि दी है। क्या आपने अपने पिता के संघर्षों और त्यागों पर कभी ध्यान दिया? यह अभियान हमें यह सोचने पर मजबूर करता है।
उन सभी पिताओं के साथ जो हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, हमारा यह अभियान एक श्रद्धांजलि है।
अधिक अपडेट के लिए, कृपया देखें: The Odd Naari
सादर,
दीपिका शर्मा
टीम द ऑड नारी
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