गढ़वाल आयुक्त की सख्त कार्रवाई: लैंड फ्रॉड के 45 मामलों का त्वरित निस्तारण
देहरादून : गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में शनिवार को सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में प्राप्त आख्या की समीक्षा की गई। इस दौरान समिति द्वारा लैंड फ्रॉड से संबंधित 20 लंबित एवं 105 नए […]
गढ़वाल आयुक्त की सख्त कार्रवाई: लैंड फ्रॉड के 45 मामलों का त्वरित निस्तारण
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कम शब्दों में कहें तो, गढ़वाल आयुक्त ने लैंड फ्रॉड के मामलों के प्रति नीती में कड़ा रुख अपनाया है और 45 मामलों का तत्काल निस्तारण किया है।
देहरादून: गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में शनिवार को सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की उच्चस्तरीय बैठक हुई। इस बैठक के माध्यम से पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा की गई। बैठक में लैंड फ्रॉड से संबंधित 20 लंबित और 105 नए मामलों तक कुल 125 मामलों पर चर्चा की गई। इसके परिणामस्वरूप 45 मामलों का निस्तारण करते हुए 24 मामलों में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने के आदेश दिए गए।
बैठक में चर्चा की गई कि देहरादून जनपद में लैंड फ्रॉड के सबसे ज्यादा 74 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा हरिद्वार में 15, पौड़ी में 13, टिहरी में 02 और चमोली में 01 मामला शामिल है।
प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति
आयुक्त ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार और माननीय मुख्यमंत्री की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के अंतर्गत भूमि धोखाधड़ी के मामलों को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे मामलों का त्वरित और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करें। जिन मामले में संयुक्त निरीक्षण की आवश्यकता है, उन्हें इस सप्ताह समाप्त कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निरीक्षण दिए गए।

महत्वपूर्ण बैठक और नये खुलासे
उन्होंने बताया कि लैंड फ्रॉड कमेटी की बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हर 15 दिनों के अंतराल में लैंड फ्रॉड मामलों की समीक्षा की जा रही है। ताजा बैठक में 125 मामलों पर विचार हुआ, जिनमें 24 मामले विशेष रूप से गंभीर पाए गए। इनमें तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए हैं। शिकायतों में भूमि पर कब्जा कर धोखाधड़ी का प्रयास और जमीन की चोरी से संबंधित मामले शामिल हैं।
आयुक्त ने बताया कि जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिसमें जमीन के बिना बिक्री, खसरा नंबर में हेरफेर करना, और भूमि का विस्तार कर बेचना जैसे गंभीर फर्जीवाड़े शामिल हैं।
स्वयं न्यायालय के समक्ष लंबित मामले
आयुक्त ने 24 एफआईआर योग्य मुद्दों सहित 45 अन्य प्रकरणों का भी निस्तारण किया। इनमें से कुछ मामलों में दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो गया है, जबकि कुछ में प्रशासनिक हस्तक्षेप से धनराशि वापस कर दी गई है। कुछ प्रकरण अदालत में लंबित पाए गए हैं।

धोखाधड़ी और अवैध कब्जे पर सख्त कार्रवाई
आयुक्त ने उन मामलों में तेजी लाने पर नाराजगी व्यक्त की, जिनमें अवैध कब्जा सिद्ध हो चुका है। उन्होंने निर्देशित किया कि ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि सभी भूमि धोखाधड़ी के मामलों में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए जाएं। शिकायतकर्ताओं को यह सूचना भी दी जाए कि उनके मामले लैंड फ्रॉड से संबंधित नहीं हैं।
आयुक्त ने निर्देश दिया कि भूमि से संबंधित मामलों में विवाद की पहचान प्रारंभिक स्तर पर करें और आवश्यक उपाय उठाएं, जिससे भविष्य में कोई जटिलता न उत्पन्न हो।
अंत में
आयुक्त ने न्यायालय में लंबित मामलों को छोड़कर अन्य सभी प्रकरणों में विभागीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए और किसी भी भूमि संबंधी मुद्दे को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखने की सलाह दी। यह घटनाक्रम दिखाता है कि गढ़वाल क्षेत्र में भूमि धोखाधड़ी के मामलों के प्रति प्रशासन कड़ा रुख अपनाने के लिए तत्पर है।
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Priya Sharma
Team The Odd Naari
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